मध्य प्रदेश में वाहन धोखाधड़ी गिरोह का भंडाफोड़: 20 ट्रैक्टर सहित 25 वाहन जब्त, ₹2.60 करोड़ की संपत्ति बरामद
सारांश
Key Takeaways
मध्य प्रदेश पुलिस ने 2 मई 2026 को भोपाल और उज्जैन में सक्रिय संगठित वाहन धोखाधड़ी गिरोहों का भंडाफोड़ किया है। दोनों मामलों में पुलिस ने 20 ट्रैक्टर सहित कुल 25 वाहन जब्त किए हैं, जिनकी अनुमानित कीमत ₹2 करोड़ 60 लाख से अधिक बताई जा रही है। कार्रवाई में कम से कम दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है।
उज्जैन में किसानों से ट्रैक्टर ठगी का मामला
पुलिस को सबसे बड़ी सफलता उज्जैन जिले के थाना भाटपचलाना क्षेत्र में मिली, जहाँ किसानों की लगातार शिकायतों के बाद विशेष जाँच टीम गठित की गई थी। तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर सूचना के आधार पर पुलिस ने मुख्य आरोपी रफीक पुत्र गनी मोहम्मद, निवासी ग्राम माधीपुरा, को गिरफ्तार किया। उसके कब्जे से उज्जैन, इंदौर, धार एवं रतलाम जिलों के विभिन्न क्षेत्रों से 20 ट्रैक्टर बरामद किए गए, जिनकी कीमत लगभग ₹1 करोड़ 80 लाख आँकी गई है।
जाँच में सामने आया कि आरोपी ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों को ट्रैक्टर पर अधिक मासिक किराया देने का प्रलोभन देता था। किसानों के ट्रैक्टर अपने कब्जे में लेने के बाद वह उन्हें दूरस्थ जिलों में बेच देता या गिरवी रख देता था। न तो किसानों को किराया दिया जाता था और न ही उनके वाहन वापस किए जाते थे। गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी कथित तौर पर लगातार अपने मोबाइल नंबर बदलता रहता था और अपने निवास स्थान से फरार रहता था।
भोपाल में एयरपोर्ट किराए का झाँसा देकर वाहन बेचने का गिरोह
राजधानी भोपाल के थाना अयोध्यानगर पुलिस ने एक अलग मामले में वाहन धोखाधड़ी गिरोह का पर्दाफाश किया। इस मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से एक महिन्द्रा एक्सयूवी, दो बोलेरो एवं दो इनोवा कार सहित कुल पाँच चार पहिया वाहन जब्त किए गए, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग ₹80 लाख है।
शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया कि आरोपी ने वाहन को एयरपोर्ट पर किराए से लगवाने का झाँसा देकर अनुबंध के माध्यम से वाहन लिया। प्रारंभिक अवधि में किराया देने के बाद वाहन को भोपाल लाकर अन्य व्यक्तियों को सस्ते दामों पर बेच दिया गया। जाँच में यह भी सामने आया कि आरोपी अपने साथियों के साथ मिलकर टीकमगढ़, सागर एवं दमोह जिलों के ग्रामीण वाहन मालिकों को सरकारी विभाग में वाहन लगवाने और अधिक किराया दिलाने का लालच देते थे, फिर वाहनों को मजबूरी का हवाला देकर कम कीमत पर बेच देते थे।
गिरोह की कार्यप्रणाली और दायरा
दोनों मामलों में एक समान पैटर्न देखा गया है — आरोपी ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के वाहन मालिकों व किसानों को अधिक आय का प्रलोभन देकर निशाना बनाते थे। यह ऐसे समय में आया है जब मध्य प्रदेश में कृषि वाहन वित्त पोषण तेज़ी से बढ़ा है और ग्रामीण किसान बड़े पैमाने पर ट्रैक्टर ऋण ले रहे हैं, जिससे वे इस तरह की ठगी के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाते हैं। गौरतलब है कि जब्त वाहन उज्जैन, इंदौर, धार, रतलाम, टीकमगढ़, सागर और दमोह जैसे कई जिलों में फैले हुए थे, जो गिरोह के व्यापक नेटवर्क की ओर इशारा करता है।
आगे की कार्रवाई
पुलिस के अनुसार, गिरोह के अन्य आरोपियों की तलाश अभी भी जारी है और प्रकरण में और अधिक वाहनों की बरामदगी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। दोनों थानों में अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के संगठित गिरोह ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय जागरूकता की कमी का फायदा उठाते हैं।