विदेश मंत्री जयशंकर 2 से 10 मई तक जमैका, सूरीनाम और त्रिनिदाद-टोबैगो दौरे पर, गिरमिटिया विरासत और द्विपक्षीय संबंध होंगे केंद्र में
सारांश
Key Takeaways
विदेश मंत्री एस. जयशंकर 2 मई से 10 मई 2026 तक जमैका, सूरीनाम और त्रिनिदाद एवं टोबैगो की आधिकारिक यात्रा पर रवाना हुए हैं। विदेश मंत्रालय ने शनिवार को यह जानकारी देते हुए बताया कि इन तीनों देशों का भारत से एक विशेष ऐतिहासिक संबंध है, क्योंकि यहाँ बड़ी संख्या में गिरमिटिया समुदाय के वंशज निवास करते हैं।
गिरमिटिया विरासत: भारत और कैरेबियाई देशों के बीच ऐतिहासिक कड़ी
गिरमिटिया वे भारतीय मजदूर थे, जो 19वीं सदी के मध्य और अंत में ब्रिटिश औपनिवेशिक काल के दौरान रोजगार के लिए भारत से विभिन्न देशों में भेजे गए थे। इनमें से अनेक लोग बाद में वहीं बस गए और आज उनके वंशज इन देशों की सांस्कृतिक एवं सामाजिक बुनावट का अहम हिस्सा हैं। उल्लेखनीय है कि 'गिरमिट' शब्द अंग्रेजी के 'एग्रीमेंट' (Agreement) का अपभ्रंश है, जो उन मजदूरों के काम के अनुबंध के लिए प्रचलित हो गया था।
यात्रा के मुख्य उद्देश्य और एजेंडा
विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस दौरे के दौरान जयशंकर तीनों देशों के शीर्ष नेताओं से मुलाकात करेंगे और अपने समकक्ष मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय संबंधों, क्षेत्रीय मुद्दों तथा वैश्विक विषयों पर विस्तृत चर्चा करेंगे। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यह यात्रा भारत और इन देशों के बीच राजनीतिक रिश्तों को मजबूती देगी, दीर्घकालिक मित्रता को आगे बढ़ाएगी और दक्षिण-दक्षिण सहयोग को नई गति प्रदान करेगी।
व्यापार जगत और भारतीय समुदाय से संवाद
विदेश मंत्री इन तीनों देशों में स्थानीय व्यापार जगत के प्रमुख प्रतिनिधियों तथा भारतीय समुदाय के सदस्यों से भी भेंट करेंगे। यह संवाद भारत के प्रवासी कूटनीति के व्यापक ढाँचे का हिस्सा है, जो व्यापारिक और सांस्कृतिक सेतु को और सुदृढ़ करने पर केंद्रित रहता है।
कैरिकॉम और व्यापक कैरेबियाई संदर्भ
गौरतलब है कि जमैका, सूरीनाम और त्रिनिदाद एवं टोबैगो तीनों कैरिबियन समुदाय (CARICOM) के सदस्य देश हैं। पिछले महीने जयशंकर ने सेंट किट्स और नेविस के भारत में उच्चायोग के उद्घाटन का स्वागत किया था और दोनों देशों के बीच दक्षिण-दक्षिण सहयोग की सराहना की थी। उन्होंने इंटरनेशनल सोलर अलायंस में सेंट किट्स की सक्रिय भागीदारी की भी प्रशंसा की थी। इसी क्रम में उन्होंने जनवरी 2026 में सेंट किट्स और नेविस को CARICOM की अध्यक्षता संभालने पर बधाई दी थी और भारत-CARICOM संबंधों को महत्वपूर्ण बताया था।
आगे की राह
यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत अपनी वैश्विक दक्षिण कूटनीति को विस्तार दे रहा है और कैरेबियाई क्षेत्र में अपनी उपस्थिति को और प्रभावी बनाने की दिशा में सक्रिय है। विशेषज्ञों का मानना है कि गिरमिटिया विरासत की साझा स्मृति इन देशों के साथ भारत के संबंधों को एक भावनात्मक और सांस्कृतिक आधार देती है, जो विशुद्ध कूटनीतिक या व्यापारिक रिश्तों से परे है।