सूरत वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस: ₹3.53 लाख करोड़ के 2,792 एमओयू, 2.82 लाख युवाओं को मिलेगा रोज़गार
सारांश
Key Takeaways
सूरत के ऑरो विश्वविद्यालय में 1 और 2 मई 2026 को आयोजित दो दिवसीय वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस-दक्षिण गुजरात का शनिवार को समापन हुआ। गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने घोषणा की कि इस कॉन्फ्रेंस के दौरान ₹3.53 लाख करोड़ के 2,792 एमओयू हस्ताक्षरित हुए, जिनसे आगामी तीन वर्षों में दक्षिण गुजरात के 2.82 लाख से अधिक युवाओं को प्रत्यक्ष रोज़गार मिलने का अनुमान है।
कॉन्फ्रेंस की मुख्य उपलब्धियाँ
समापन सत्र में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि इस कॉन्फ्रेंस ने दक्षिण गुजरात के विकास की जो नींव रखी है, उससे यह परिक्षेत्र बड़ी आर्थिक छलांग लगाने को तैयार हुआ है। उन्होंने गुजरात की आर्थिक शक्ति का उल्लेख करते हुए बताया कि गुजरात का देश की कुल जीडीपी में 8 प्रतिशत, मैन्युफैक्चरिंग में 17 प्रतिशत, मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट में 27 प्रतिशत तथा कार्गो हैंडलिंग में 40 प्रतिशत हिस्सा है।
नड्डा ने कहा कि वर्ष 2003 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वाइब्रेंट गुजरात की शुरुआत कर उद्योगपतियों के साथ संवाद एवं सहयोग की जो संस्कृति विकसित की, वह आज देश के अन्य राज्यों के लिए भी अनुकरणीय मॉडल बनी है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयासों के कारण ही आज भारत विश्व में निवेश के लिए सबसे विश्वसनीय स्थान बना है।
दक्षिण गुजरात की औद्योगिक शक्ति
नड्डा ने दक्षिण गुजरात की क्षेत्रीय विशेषज्ञता का उल्लेख करते हुए कहा कि सूरत के डायमंड एवं टेक्सटाइल उद्योग से लेकर भरूच-दहेज-अंकलेश्वर के केमिकल तथा फर्टिलाइजर उद्योग वैश्विक हब बने हैं। उन्होंने कहा कि अब टेक्सटाइल के साथ गारमेंटिंग उद्योग को जोड़कर विकास के नए द्वार खोले जा रहे हैं।
वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच आत्मनिर्भरता पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि स्टैच्यू ऑफ यूनिटी, गिफ्ट सिटी तथा हाईस्पीड रेल जैसे प्रोजेक्ट्स विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में आधारभूत बनेंगे।
उपमुख्यमंत्री की नई पहल और आश्वासन
उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने बताया कि वर्ष 2003 में जब वाइब्रेंट गुजरात की शुरुआत हुई थी, तब राज्य की जीडीपी ₹1.29 लाख करोड़ थी, जो आज बढ़कर ₹27.09 लाख करोड़ तक पहुँच गई है। उन्होंने कहा कि पिछले 24 वर्षों की इस दृढ़ विकास यात्रा में टीम गुजरात तथा राज्य के व्यापारी अनेक मुश्किलों के बावजूद कभी पीछे नहीं हटे।
संघवी ने एक नई पहल की घोषणा करते हुए कहा कि अब रीजनल कॉन्फ्रेंस में केवल नए निवेशकों के लिए ही नहीं, बल्कि वर्तमान उद्योगकारों की समस्याओं के स्थल पर ही निवारण के लिए ओपन डोर मीटिंग का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि इंसेंटिव क्लियरेंस की प्रक्रिया में गति लाई जा रही है — पूर्व में प्रतिदिन 199 आवेदन क्लियर होते थे, जो अब दुगुने हो गए हैं और आगामी समय में यह आँकड़ा 500 के पार जाएगा।
आदिजाति क्षेत्रों में रोज़गार और महिला सशक्तिकरण
संघवी ने बताया कि डांग, तापी, वलसाड तथा नवसारी जैसे आदिजाति क्षेत्रों में नॉन-पॉल्यूटिंग इंडस्ट्रीज एवं गारमेंट सेक्टर को प्रोत्साहन दिया जा रहा है, जिससे इन क्षेत्रों की 25,000 से अधिक महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोज़गार के अवसर मिलेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की प्राथमिकता केवल प्रथम पंक्ति के उद्योगपतियों तक सीमित नहीं है, बल्कि अंतिम पंक्ति में बैठे छोटे व्यापारियों के सपने साकार करने की भी है।
अन्य वक्ता और समापन समारोह
गुजरात प्रदेश संगठन अध्यक्ष जगदीशभाई विश्वकर्मा ने कहा कि 2003 से शुरू हुई वाइब्रेंट समिट की यह यात्रा आज 2026 में टैलेंट, टेक्नोलॉजी तथा ट्रांसपरेंसी की पर्याय बनी है। उद्योग एवं खान विभाग की अपर मुख्य सचिव ममता वर्मा ने स्वागत संबोधन में कहा कि पिछले दो दिनों में स्केल एवं स्किल के समन्वय के साथ उद्यमियों को मज़बूत प्लेटफॉर्म प्रदान किया गया।
समापन समारोह में कृषि मंत्री जीतूभाई वाघाणी, जलापूर्ति मंत्री कुंवरजीभाई बावलिया, ऑरो विश्वविद्यालय के संस्थापक हसमुख रामा, लैब-ग्रोन उद्योगकार स्मित पटेल सहित व्यापार-उद्योग जगत के प्रतिनिधि, चैम्बर ऑफ कॉमर्स के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे। कॉन्फ्रेंस से जुड़ी प्रदर्शनी 5 मई 2026 तक जारी रहेगी।