पीएमके अध्यक्ष अंबुमणि रामदास ने PM मोदी को लिखा पत्र, 2009 के बाद जन्मे युवाओं के लिए तंबाकू बैन की मांग
सारांश
Key Takeaways
पट्टाली मक्कल काची (PMK) के अध्यक्ष अंबुमणि रामदास ने 2 मई 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को पत्र लिखकर केंद्र सरकार से एक ऐतिहासिक कानून बनाने का आग्रह किया है। इस प्रस्तावित कानून के तहत 2009 या उसके बाद जन्मे व्यक्तियों के लिए तंबाकू उत्पादों की बिक्री और सेवन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है, जिसका लक्ष्य भारत में एक 'धूम्रपान मुक्त पीढ़ी' का निर्माण करना है। यह पत्र ऐसे समय में आया है जब भारत में तंबाकू से संबंधित बीमारियाँ सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही हैं।
पत्र में क्या है मांग
अंबुमणि ने अपने पत्र में तर्क दिया कि पीढ़ी दर पीढ़ी लागू होने वाला यह प्रतिबंध देशभर में व्यसन और बीमारियों के बोझ को कम करने में एक क्रांतिकारी कदम साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में लगभग 26.7 करोड़ भारतीय किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन करते हैं, जिससे भारत विश्व के सबसे बड़े तंबाकू उपभोक्ता देशों में शामिल हो गया है।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि तंबाकू से संबंधित बीमारियों के कारण देश में प्रतिवर्ष 13 लाख से अधिक मौतें होती हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवा प्रणाली और अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव पड़ता है।
अंतर्राष्ट्रीय उदाहरण का हवाला
अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों से तुलना करते हुए अंबुमणि ने यूनाइटेड किंगडम के प्रस्तावित तंबाकू और वेप्स विधेयक का उल्लेख किया, जिसका उद्देश्य तंबाकू खरीदने की कानूनी आयु को धीरे-धीरे बढ़ाना है, जिससे युवा पीढ़ी में धूम्रपान को प्रभावी रूप से समाप्त किया जा सके। उन्होंने भारत से आग्रह किया कि वह अपनी जनसांख्यिकीय और सार्वजनिक स्वास्थ्य आवश्यकताओं के अनुरूप इसी तरह का विधायी ढाँचा अपनाए।
कैंसर और गैर-संक्रामक रोगों पर असर
अंबुमणि ने बताया कि भारत में तंबाकू कैंसर और गैर-संक्रामक रोगों के प्रमुख कारणों में से एक है, जो लगभग 40 से 50 प्रतिशत कैंसर मामलों के लिए जिम्मेदार है। उन्होंने निर्णायक नीतिगत हस्तक्षेप की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया।
अंबुमणि का अनुभव और पूर्व उपाय
2004 से 2009 तक केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री रहे अंबुमणि ने उस दौरान शुरू किए गए तंबाकू-विरोधी उपायों का उल्लेख किया, जिनमें सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान पर राष्ट्रव्यापी प्रतिबंध और तंबाकू पैकेजिंग पर स्वास्थ्य चेतावनी चित्र लगाना शामिल हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि इन कदमों से जागरूकता में वृद्धि हुई, लेकिन अब और अधिक सशक्त एवं दूरदर्शी नीतियों की आवश्यकता है। गौरतलब है कि यह प्रस्ताव भारत में तंबाकू नियंत्रण की दिशा में अब तक की सबसे महत्त्वाकांक्षी विधायी पहल हो सकती है।