10 अगस्त 2026
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आरडीएसएस के तहत ₹1.53 लाख करोड़ की स्वीकृति, 19.79 करोड़ उपभोक्ताओं को मिलेंगे स्मार्ट मीटर

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आरडीएसएस के तहत ₹1.53 लाख करोड़ की स्वीकृति, 19.79 करोड़ उपभोक्ताओं को मिलेंगे स्मार्ट मीटर

सारांश

संसद में पेश आँकड़ों के अनुसार, आरडीएसएस के तहत ₹1.53 लाख करोड़ बुनियादी ढाँचे और ₹1.31 लाख करोड़ स्मार्ट मीटरिंग के लिए स्वीकृत हैं — 19.79 करोड़ उपभोक्ताओं तक डिजिटल बिजली व्यवस्था पहुँचाने का सबसे बड़ा प्रयास।

मुख्य बातें

विद्युत राज्य मंत्री श्रीपद नाइक ने 10 अगस्त 2026 को राज्यसभा में आरडीएसएस के आँकड़े प्रस्तुत किए।
हानि कम करने वाले बुनियादी ढाँचागत कार्यों के लिए ₹1.53 लाख करोड़ और स्मार्ट मीटरिंग के लिए ₹1.31 लाख करोड़ स्वीकृत।
स्मार्ट मीटर कार्य 19.79 करोड़ उपभोक्ताओं , 2.05 लाख फीडरों और 52.53 लाख वितरण ट्रांसफार्मरों को कवर करेंगे।
वित्त वर्ष 2023 से अब तक कुल ₹47,124 करोड़ जारी; स्मार्ट मीटरिंग के लिए ₹2,733 करोड़ शामिल।
14,853 डिस्कॉम कर्मियों को जुलाई 2026 तक प्रशिक्षित किया गया; ₹23.36 करोड़ खर्च।
इंडिया एनर्जी स्टैक (आईईएस) के ज़रिए विद्युत क्षेत्र में सार्वभौमिक डिजिटल डेटा प्रणाली विकसित की जा रही है।

पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना (आरडीएसएस) के तहत हानि कम करने वाले बुनियादी ढाँचागत कार्यों के लिए ₹1.53 लाख करोड़ की वित्तीय सहायता स्वीकृत की गई है। 10 अगस्त 2026 को राज्यसभा में यह जानकारी विद्युत राज्य मंत्री श्रीपद नाइक ने दी। इस योजना के अंतर्गत स्मार्ट मीटरिंग कार्यों के लिए अलग से ₹1.31 लाख करोड़ की वित्तीय सहायता भी स्वीकृत की गई है।

योजना का दायरा और लाभार्थी

विद्युत मंत्रालय के अनुसार, आरडीएसएस के तहत स्वीकृत कार्यों में वितरण इकाइयों के व्यापक डिजिटलीकरण की रूपरेखा तैयार की गई है। इसमें 19.79 करोड़ उपभोक्ताओं, 2.05 लाख फीडरों और 52.53 लाख वितरण ट्रांसफार्मरों (डीटी) के लिए स्मार्ट मीटर लगाने का कार्य शामिल है। यह देश के विद्युत वितरण तंत्र के अब तक के सबसे बड़े डिजिटल रूपांतरण प्रयासों में से एक है।

शहरी अवसंरचना और प्रौद्योगिकी निवेश

एससीएडीए (पर्यवेक्षी नियंत्रण और डेटा अधिग्रहण) तथा डीएमएस (वितरण प्रबंधन प्रणाली) कार्यों के लिए 394 शहरों में ₹2,627 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई है। इसके अतिरिक्त, एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग, यूनिफाइड बिलिंग, जीआईएस और रियल-टाइम डेटा एक्विजिशन सिस्टम जैसे आईटी/ओटी कार्यों पर ₹3,999 करोड़ व्यय का प्रावधान है।

सात शहरों के लिए ₹8,608 करोड़ की स्मार्ट डिस्ट्रीब्यूशन परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इनमें जीआईएस सबस्टेशन, वितरण ट्रांसफार्मर हेल्थ मैनेजमेंट, एचटी/एलटी लाइनों का भूमिगतकरण और सिस्टम संवर्धन-आधुनिकीकरण कार्य सम्मिलित हैं।

अब तक जारी धनराशि और प्रशिक्षण

वित्त वर्ष 2023 से अब तक आरडीएसएस के तहत कुल ₹47,124 करोड़ की धनराशि जारी की जा चुकी है, जिसमें स्मार्ट मीटरिंग कार्यों के लिए ₹2,733 करोड़ शामिल हैं। डिस्कॉम कर्मियों के प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के लिए ₹100.9 करोड़ आवंटित किए गए थे, जिसमें से जुलाई 2026 तक ₹23.36 करोड़ का उपयोग हो चुका है और 14,853 कर्मियों को प्रशिक्षित किया जा चुका है।

इंडिया एनर्जी स्टैक और डिजिटल एकीकरण

सरकार ने इंडिया एनर्जी स्टैक (आईईएस) की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य विद्युत क्षेत्र में डेटा आदान-प्रदान के लिए एक सार्वभौमिक डिजिटल प्रणाली विकसित करना है। यह पहल देशभर में वितरण उपयोगिताओं के बीच डिजिटल एकरूपता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

राज्यों की भूमिका और आगे की राह

मंत्री श्रीपद नाइक ने स्पष्ट किया कि विद्युत एक समवर्ती विषय होने के कारण उपभोक्ताओं को वितरण संबंधी कार्य संबंधित राज्य सरकार और राज्य विद्युत नियामक आयोग के दायरे में आता है। इसका अर्थ यह है कि केंद्रीय वित्त पोषण का वास्तविक क्रियान्वयन राज्यों की डिस्कॉम इकाइयों पर निर्भर करेगा। आँकड़ों के अनुसार, आरडीएसएस की सफलता केंद्र-राज्य समन्वय की गुणवत्ता पर काफी हद तक टिकी होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी वितरण की गति है — वित्त वर्ष 2023 से अब तक स्वीकृत ₹1.31 लाख करोड़ में से स्मार्ट मीटरिंग के लिए मात्र ₹2,733 करोड़ जारी हुए हैं, यानी दो प्रतिशत से भी कम। यह अंतर बताता है कि केंद्रीय आवंटन और ज़मीनी क्रियान्वयन के बीच की खाई अभी पाटी नहीं गई है। चूँकि विद्युत समवर्ती सूची का विषय है, राज्य डिस्कॉम की वित्तीय सेहत और प्रशासनिक क्षमता निर्णायक भूमिका निभाएगी — और यही वह बिंदु है जिस पर मुख्यधारा की कवरेज अक्सर चुप रह जाती है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आरडीएसएस योजना क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?
पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना (आरडीएसएस) केंद्र सरकार की एक प्रमुख विद्युत क्षेत्र योजना है जिसका लक्ष्य वितरण नेटवर्क में तकनीकी और वाणिज्यिक हानियाँ कम करना और स्मार्ट मीटरिंग के ज़रिए डिजिटलीकरण को बढ़ावा देना है। इसके तहत बुनियादी ढाँचे और स्मार्ट मीटरिंग मिलाकर कुल ₹2.84 लाख करोड़ से अधिक की वित्तीय सहायता स्वीकृत की गई है।
आरडीएसएस के तहत स्मार्ट मीटर कितने उपभोक्ताओं को मिलेंगे?
योजना के अंतर्गत 19.79 करोड़ उपभोक्ताओं के लिए स्मार्ट मीटर लगाने का कार्य स्वीकृत किया गया है। इसके साथ 2.05 लाख फीडरों और 52.53 लाख वितरण ट्रांसफार्मरों पर भी स्मार्ट मीटरिंग की जाएगी।
अब तक आरडीएसएस के तहत कितनी धनराशि जारी की गई है?
वित्त वर्ष 2023 से जुलाई 2026 तक कुल ₹47,124 करोड़ जारी किए गए हैं, जिनमें स्मार्ट मीटरिंग कार्यों के लिए ₹2,733 करोड़ शामिल हैं। प्रशिक्षण मद में ₹100.9 करोड़ आवंटित थे, जिसमें से ₹23.36 करोड़ का उपयोग हो चुका है।
इंडिया एनर्जी स्टैक क्या है?
इंडिया एनर्जी स्टैक (आईईएस) सरकार की एक डिजिटल पहल है जिसका उद्देश्य विद्युत क्षेत्र में डेटा आदान-प्रदान के लिए एक सार्वभौमिक और एकीकृत डिजिटल प्रणाली विकसित करना है। यह देशभर की वितरण उपयोगिताओं के बीच डिजिटल एकरूपता सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है।
आरडीएसएस में राज्यों की क्या भूमिका है?
विद्युत राज्य मंत्री श्रीपद नाइक के अनुसार, विद्युत समवर्ती सूची का विषय होने के कारण उपभोक्ताओं को वितरण का कार्य संबंधित राज्य सरकार और राज्य विद्युत नियामक आयोग के अधीन आता है। इसलिए योजना का वास्तविक क्रियान्वयन राज्यों की वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) पर निर्भर करता है।
राष्ट्र प्रेस
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