CEC ज्ञानेश कुमार को हटाओ, SIR रोको: पिनाराई विजयन की एक्स पर माँग, INDIA ब्लॉक नया नोटिस लाएगा
सारांश
मुख्य बातें
केरल के पूर्व मुख्यमंत्री एवं विधानसभा में विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन ने 25 सितंबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर पोस्ट कर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तत्काल पद से हटाने, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया पर रोक लगाने और मतदाता सूची से ग़लत तरीके से हटाए गए नागरिकों के मताधिकार बहाल करने की माँग की। यह बयान ऐसे समय आया है जब चुनाव आयोग के दोनों सहयोगी आयुक्तों ने आरोप लगाया है कि उनसे बिना परामर्श या सहमति के कई अहम फ़ैसले लिए गए।
विजयन ने एक्स पर क्या कहा
विजयन ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'वोटर रजिस्ट्रेशन, नाम हटाने और SIR से जुड़े फ़ैसलों पर दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों के खुलासे चुनाव आयोग के कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाया जाना चाहिए, SIR को रोका जाना चाहिए, ग़लत तरीके से हटाए गए लोगों के वोटिंग अधिकार बहाल किए जाने चाहिए और चुनाव आयोग की आज़ादी तथा विश्वसनीयता की रक्षा की जानी चाहिए।' उन्होंने यह भी जोड़ा, 'वोट देने का अधिकार भारत के लोगों का है। इसे भारतीय जनता पार्टी (BJP) और संघ परिवार के राजनीतिक हितों को साधने के लिए बदला या इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।'
INDIA ब्लॉक का संशोधित नोटिस अभियान
विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए राज्यसभा में नए सिरे से संशोधित नोटिस लाने की तैयारी में है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) की पहल पर विपक्षी दलों ने इस पर सहमति बनाई है। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, अगले दो सप्ताह के भीतर यह नोटिस सौंपा जाएगा, जिसमें हालिया घटनाक्रमों और नए तथ्यों को शामिल किया जाएगा।
गौरतलब है कि इस मुद्दे पर कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की बैठक में पहले ही चर्चा हो चुकी है। इसके बाद INDIA गठबंधन के नेताओं के हस्ताक्षर जुटाकर संशोधित नोटिस दिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि नोटिस देने के लिए संसद का सत्र चलना अनिवार्य नहीं होता।
पिछला नोटिस और उसकी स्थिति
विपक्ष ने इससे पहले 24 अप्रैल को राज्यसभा में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए नोटिस दिया था। उस नोटिस पर विपक्ष के 73 सांसदों के हस्ताक्षर थे और वह अभी भी लंबित है। हालाँकि, बाद में उस नोटिस पर हस्ताक्षर करने वाले सात सांसद पाला बदल चुके हैं। इसी वजह से विपक्ष अब नए सिरे से समर्थन जुटाकर संशोधित नोटिस लाने की तैयारी कर रहा है।
विवाद की जड़: दो आयुक्तों की आपत्तियाँ
यह ऐसे समय में आया है जब चुनाव आयोग के दोनों सहयोगी चुनाव आयुक्तों ने कथित तौर पर आरोप लगाए हैं कि मतदाता सूची से नाम हटाने और SIR से संबंधित कई निर्णय उनकी सहमति या जानकारी के बिना लिए गए। आलोचकों का कहना है कि यह स्थिति संस्था की आंतरिक संरचना और स्वायत्तता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है। यह भारत की सबसे महत्त्वपूर्ण संवैधानिक संस्थाओं में से एक की विश्वसनीयता को लेकर एक व्यापक बहस को जन्म दे रहा है।
आगे क्या होगा
आने वाले दिनों में INDIA ब्लॉक के नए नोटिस और उस पर सरकार की प्रतिक्रिया राजनीतिक तापमान को और बढ़ा सकती है। चुनाव आयोग की स्वायत्तता और SIR प्रक्रिया की वैधता पर यह बहस निकट भविष्य में और तेज़ होने के संकेत हैं।