CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध पर BJP का पलटवार: 'कांग्रेस भ्रामक प्रचार से देश को अस्थिर करना चाहती है'
सारांश
मुख्य बातें
बिहार भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने 3 अक्टूबर 2026 को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के विरोध प्रदर्शन की कड़ी आलोचना की। नेताओं का आरोप है कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) चुनाव आयोग के विरुद्ध भ्रामक प्रचार फैलाकर देश में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर रही है। यह प्रतिक्रिया उस समय आई है जब विपक्षी दल चुनाव आयोग की मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया (SIR) पर सवाल उठा रहे हैं।
मंत्री दिलीप जायसवाल का आरोप
बिहार के मंत्री दिलीप जायसवाल ने नई दिल्ली में कहा, 'कांग्रेस सत्ता के लिए बेचैन हो गई है। चुनाव आयोग के खिलाफ भ्रामक प्रचार फैलाकर पूरे देश को अस्थिर करना चाहती है। सत्ता के लिए पागलपन और देश विरोधी ताकतों तक से हाथ मिला लेना, यह अब कांग्रेस का चरित्र हो गया है।' उन्होंने यह भी कहा कि सत्ता से दूर रहने के कारण विपक्षी नेता देश में भ्रामक अफवाहें फैलाने का काम कर रहे हैं।
दिलीप घोष के तीखे सवाल
भाजपा नेता दिलीप घोष ने SIR प्रक्रिया का बचाव करते हुए कहा, 'देश की जनता समझ रही है कि चुनाव आयोग ने अगर किसी ऐसे व्यक्ति का नाम SIR के दौरान हटाया, जिसकी मृत्यु हो गई, क्या यह सही नहीं है। किसी व्यक्ति के नाम पर दो वोटर आईडी हैं, तो क्या एक जगह से नाम नहीं हटना चाहिए।' उन्होंने पता बदलने वाले मतदाताओं की सूची से नाम हटाए जाने को भी तार्किक बताते हुए कांग्रेस पर संविधान की अवज्ञा का आरोप लगाया।
घोष ने कहा कि 140 करोड़ की आबादी यह समझ रही है कि कांग्रेस महज 'नौटंकी' कर रही है और यह सब सत्ता पाने की बेचैनी के कारण हो रहा है।
पूर्व विधायक हरिभूषण ठाकुर बचौल का बयान
बिहार के पूर्व भाजपा विधायक हरिभूषण ठाकुर बचौल ने CEC को हटाने की माँग को बेबुनियाद बताया। उन्होंने कहा, 'ज्ञानेश कुमार को कैसे हटा देगा कोई? वे मुख्य चुनाव आयुक्त हैं। वो परचून की दुकान नहीं चलाते हैं, जो उनको हटा देंगे।' उन्होंने राजस्थान का उदाहरण देते हुए कहा कि वोट कटने के आरोपों की जाँच करने पर विपक्ष एक भी जीवित प्रभावित व्यक्ति नहीं पेश कर पाया।
'इंडिया' गठबंधन पर निशाना
ठाकुर बचौल ने 'इंडिया' गठबंधन की बैठकों को भी निरर्थक करार दिया। उनके अनुसार, 'इंडी' अलायंस अब 'हताश, निराश और चुनाव में हारे लोगों का गठबंधन' बन चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह गठबंधन भारतीय जनता पार्टी (BJP) का विरोध करते-करते अब देश के विरोध पर भी उतारू हो गया है।
विवाद की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि यह विवाद चुनाव आयोग की मतदाता सूची विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने के बाद उभरा है। विपक्षी दलों का कथित तौर पर आरोप है कि इस प्रक्रिया में लक्षित तरीके से मतदाताओं के नाम काटे गए, जबकि भाजपा नेता इसे नियमित और संवैधानिक प्रक्रिया बता रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब देश में आगामी चुनावों की तैयारियाँ चल रही हैं और मतदाता सूचियों की शुद्धता एक अहम राजनीतिक मुद्दा बन गई है।