अनिल विज का विपक्ष पर पलटवार: CEC ज्ञानेश कुमार फर्जी वोट हटा रहे हैं, इसमें गलत क्या?
सारांश
मुख्य बातें
हरियाणा के वरिष्ठ मंत्री अनिल विज ने 27 सितंबर 2026 को अंबाला में विपक्ष के उन हमलों का कड़ा जवाब दिया, जिनमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और चुनाव आयोग की मतदाता सूची सत्यापन मुहिम — विशेष सारांश पुनरीक्षण (SIR) — को रोकने की माँग की जा रही है। विज ने सवाल उठाया कि जब लक्ष्य महज इतना है कि मतदाता सूची से फर्जी, मृत और अयोग्य नाम हटें और वास्तविक पात्र नागरिकों को उनका अधिकार मिले, तो इस अभियान पर आपत्ति क्यों?
मंत्री विज का विपक्ष पर सीधा सवाल
विज ने विपक्ष की आलोचना को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अपने संवैधानिक दायित्व के तहत काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'ज्ञानेश कुमार यह सुनिश्चित करने के लिए अभियान चला रहे हैं कि वोटर लिस्ट सही हो, कोई भी अयोग्य व्यक्ति शामिल न हो और जो लोग लिस्ट में शामिल होने के हकदार हैं, उन्हें उनकी सही जगह मिले। इसमें गलत क्या है?' विज ने कहा कि किसी भी लोकतंत्र में स्वच्छ मतदाता सूची बुनियादी आवश्यकता है।
CJP की भूमिका पर आपत्ति
SIR मुहिम पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री विज ने कहा कि जहाँ भी यह संगठन गया है, वहाँ के लोगों ने उन्हें वापस लौटा दिया है। उन्होंने बताया, 'मैंने कई स्कूलों से रिपोर्ट देखी हैं, जहाँ लोग उन्हें अंदर नहीं आने दे रहे। अगर उनके पास कोई सुझाव है तो उचित माध्यम से देना चाहिए — स्कूलों में जाकर इंस्पेक्शन करना और तमाशा करना उचित नहीं है।'
विपक्ष की 'चुनिंदा आपत्ति' पर तंज
विज ने विपक्ष की 'चुनिंदा आलोचना' को उजागर करते हुए कहा कि जिन राज्यों — हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक — में विपक्षी दल जीते, वहाँ की मतदाता सूचियाँ भी ज्ञानेश कुमार की देखरेख में ही तैयार हुई थीं। उन्होंने कहा, 'तब आपने कभी उनका विरोध नहीं किया। आपने हिमाचल प्रदेश का विरोध नहीं किया, कर्नाटक का विरोध नहीं किया।' यह टिप्पणी इस संदर्भ में महत्वपूर्ण है कि विपक्ष की आलोचना को राजनीति-प्रेरित बताया जा रहा है।
SIR अभियान की ज़रूरत पर जोर
SIR विवाद पर सीधी बात करते हुए विज ने कहा, 'अगर कोई अयोग्य वोट है — कोई व्यक्ति अब वहाँ नहीं रहता, कहीं और चला गया है या उसकी मौत हो गई है — तो उस वोट को हटा देना चाहिए। अगर ऐसे वोट पहले नहीं हटाए जा रहे थे, तो यह गलत था।' उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार ने लंबे समय से चली आ रही गड़बड़ी को दुरुस्त करने का जरूरी काम किया है।
आगे की राजनीतिक तस्वीर
यह ऐसे समय में आया है जब SIR मुहिम को लेकर देशभर में राजनीतिक बहस तेज हो गई है और कई विपक्षी दल इसे मतदाताओं के नाम काटने का हथियार बता रहे हैं। गौरतलब है कि चुनाव आयोग के अनुसार यह अभियान नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है। विज जैसे सत्तारूढ़ दल के नेताओं की यह प्रतिक्रिया संकेत देती है कि सरकार इस मुद्दे पर आक्रामक बचाव की रणनीति अपना रही है। बहस अब मतदाता सूची की शुद्धता बनाम समावेशिता के व्यापक सवाल पर केंद्रित हो गई है, जो आने वाले चुनावों में एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकती है।