27 सितंबर 2026
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अनिल विज का विपक्ष पर पलटवार: CEC ज्ञानेश कुमार फर्जी वोट हटा रहे हैं, इसमें गलत क्या?

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अनिल विज का विपक्ष पर पलटवार: CEC ज्ञानेश कुमार फर्जी वोट हटा रहे हैं, इसमें गलत क्या?

सारांश

हरियाणा मंत्री अनिल विज ने CEC ज्ञानेश कुमार का खुलकर बचाव किया — पूछा कि मृत और अयोग्य वोट हटाना गलत कैसे? विपक्ष पर 'चुनिंदा आलोचना' का आरोप लगाते हुए याद दिलाया कि हिमाचल-कर्नाटक की जीत भी उन्हीं की बनाई सूचियों पर हुई।

मुख्य बातें

हरियाणा मंत्री अनिल विज ने 27 सितंबर 2026 को अंबाला में CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की विपक्षी माँग को खारिज किया।
विज ने कहा कि SIR मुहिम संवैधानिक दायित्व के तहत चलाई जा रही है — मृत, स्थानांतरित और अयोग्य वोट हटाना लोकतंत्र की जरूरत है।
विज ने विपक्ष की 'चुनिंदा आलोचना' को उजागर किया — कहा कि हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक में जीत भी ज्ञानेश कुमार की बनाई सूचियों पर हुई, तब कोई आपत्ति नहीं थी।
CJP के स्कूल निरीक्षण अभियान पर विज ने कहा — 'तमाशा करना उचित नहीं', स्थानीय लोग उन्हें अंदर नहीं आने दे रहे।
SIR विवाद अब देशभर में मतदाता सूची की शुद्धता बनाम समावेशिता की बड़ी राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।

हरियाणा के वरिष्ठ मंत्री अनिल विज ने 27 सितंबर 2026 को अंबाला में विपक्ष के उन हमलों का कड़ा जवाब दिया, जिनमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और चुनाव आयोग की मतदाता सूची सत्यापन मुहिम — विशेष सारांश पुनरीक्षण (SIR) — को रोकने की माँग की जा रही है। विज ने सवाल उठाया कि जब लक्ष्य महज इतना है कि मतदाता सूची से फर्जी, मृत और अयोग्य नाम हटें और वास्तविक पात्र नागरिकों को उनका अधिकार मिले, तो इस अभियान पर आपत्ति क्यों?

मंत्री विज का विपक्ष पर सीधा सवाल

विज ने विपक्ष की आलोचना को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अपने संवैधानिक दायित्व के तहत काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'ज्ञानेश कुमार यह सुनिश्चित करने के लिए अभियान चला रहे हैं कि वोटर लिस्ट सही हो, कोई भी अयोग्य व्यक्ति शामिल न हो और जो लोग लिस्ट में शामिल होने के हकदार हैं, उन्हें उनकी सही जगह मिले। इसमें गलत क्या है?' विज ने कहा कि किसी भी लोकतंत्र में स्वच्छ मतदाता सूची बुनियादी आवश्यकता है।

CJP की भूमिका पर आपत्ति

SIR मुहिम पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री विज ने कहा कि जहाँ भी यह संगठन गया है, वहाँ के लोगों ने उन्हें वापस लौटा दिया है। उन्होंने बताया, 'मैंने कई स्कूलों से रिपोर्ट देखी हैं, जहाँ लोग उन्हें अंदर नहीं आने दे रहे। अगर उनके पास कोई सुझाव है तो उचित माध्यम से देना चाहिए — स्कूलों में जाकर इंस्पेक्शन करना और तमाशा करना उचित नहीं है।'

विपक्ष की 'चुनिंदा आपत्ति' पर तंज

विज ने विपक्ष की 'चुनिंदा आलोचना' को उजागर करते हुए कहा कि जिन राज्यों — हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक — में विपक्षी दल जीते, वहाँ की मतदाता सूचियाँ भी ज्ञानेश कुमार की देखरेख में ही तैयार हुई थीं। उन्होंने कहा, 'तब आपने कभी उनका विरोध नहीं किया। आपने हिमाचल प्रदेश का विरोध नहीं किया, कर्नाटक का विरोध नहीं किया।' यह टिप्पणी इस संदर्भ में महत्वपूर्ण है कि विपक्ष की आलोचना को राजनीति-प्रेरित बताया जा रहा है।

SIR अभियान की ज़रूरत पर जोर

SIR विवाद पर सीधी बात करते हुए विज ने कहा, 'अगर कोई अयोग्य वोट है — कोई व्यक्ति अब वहाँ नहीं रहता, कहीं और चला गया है या उसकी मौत हो गई है — तो उस वोट को हटा देना चाहिए। अगर ऐसे वोट पहले नहीं हटाए जा रहे थे, तो यह गलत था।' उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार ने लंबे समय से चली आ रही गड़बड़ी को दुरुस्त करने का जरूरी काम किया है।

आगे की राजनीतिक तस्वीर

यह ऐसे समय में आया है जब SIR मुहिम को लेकर देशभर में राजनीतिक बहस तेज हो गई है और कई विपक्षी दल इसे मतदाताओं के नाम काटने का हथियार बता रहे हैं। गौरतलब है कि चुनाव आयोग के अनुसार यह अभियान नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है। विज जैसे सत्तारूढ़ दल के नेताओं की यह प्रतिक्रिया संकेत देती है कि सरकार इस मुद्दे पर आक्रामक बचाव की रणनीति अपना रही है। बहस अब मतदाता सूची की शुद्धता बनाम समावेशिता के व्यापक सवाल पर केंद्रित हो गई है, जो आने वाले चुनावों में एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वही सूचियाँ थीं' वाला तर्क विपक्ष को रक्षात्मक स्थिति में धकेलता है। लेकिन असली सवाल यह नहीं कि SIR का मकसद सही है या नहीं — वह है जिसे लगभग सभी मानते हैं — बल्कि यह है कि क्रियान्वयन में पात्र मतदाताओं के नाम गलती से हट तो नहीं रहे। विपक्ष की आलोचना में अतिरेक हो सकता है, पर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाना जवाबदेही की माँग है, विरोध नहीं। जब तक स्वतंत्र सत्यापन नहीं होगा कि हटाए गए नाम वाकई अयोग्य थे, यह बहस खत्म नहीं होगी।
RashtraPress
27 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

SIR मुहिम क्या है और इसे लेकर विवाद क्यों है?
SIR यानी विशेष सारांश पुनरीक्षण चुनाव आयोग का वह अभियान है जिसमें मतदाता सूची से मृत, स्थानांतरित या अयोग्य नाम हटाए जाते हैं और नए पात्र मतदाता जोड़े जाते हैं। विवाद इसलिए है क्योंकि विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया में पात्र मतदाताओं के नाम भी गलती से हटाए जा रहे हैं।
अनिल विज ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग पर क्या कहा?
हरियाणा मंत्री अनिल विज ने इस माँग को खारिज करते हुए कहा कि ज्ञानेश कुमार अपने संवैधानिक दायित्व के तहत काम कर रहे हैं और मतदाता सूची को सही करना किसी भी लोकतंत्र के लिए आवश्यक है। उन्होंने पूछा कि इसमें आपत्ति किस बात की है।
विज ने विपक्ष की 'चुनिंदा आलोचना' का क्या तर्क दिया?
विज ने याद दिलाया कि हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक में विपक्षी दलों की जीत भी ज्ञानेश कुमार की देखरेख में तैयार मतदाता सूचियों पर हुई थी, तब किसी ने आपत्ति नहीं जताई। इससे उनका तर्क था कि आलोचना राजनीति-प्रेरित है, न कि सैद्धांतिक।
CJP के स्कूल निरीक्षण अभियान पर विज की क्या प्रतिक्रिया रही?
विज ने कहा कि CJP जहाँ भी गई, लोगों ने उन्हें वापस लौटा दिया और स्कूलों में जाकर 'तमाशा करना' उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर कोई सुझाव है तो उचित माध्यम से दिया जाए।
इस विवाद का आने वाले चुनावों पर क्या असर हो सकता है?
SIR को लेकर चल रही बहस मतदाता सूची की शुद्धता बनाम समावेशिता के व्यापक सवाल पर केंद्रित हो गई है। आगामी विधानसभा चुनावों में यह मुद्दा सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के बीच बड़ा राजनीतिक हथियार बन सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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