31 अक्टूबर 2026
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सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इंडिया ब्लॉक का 'जन-महाभियोग', विपक्ष बोला — वोट चोरों को देश से हटाना होगा

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सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इंडिया ब्लॉक का 'जन-महाभियोग', विपक्ष बोला — वोट चोरों को देश से हटाना होगा

सारांश

इंडिया ब्लॉक ने नई दिल्ली में सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 'जन-महाभियोग' आयोजित किया। विपक्ष का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के ज़रिए करोड़ों वैध मतदाताओं के नाम काटे जा रहे हैं। संसद में महाभियोग प्रस्ताव दबाए जाने के बाद विपक्ष अब सड़क पर उतरा है और सीईसी के इस्तीफे की माँग पर अड़ा है।

मुख्य बातें

इंडिया ब्लॉक ने 31 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 'जन-महाभियोग' कार्यक्रम आयोजित किया।
विपक्षी सांसदों ने आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया के तहत करोड़ों वैध मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा रहे हैं।
कथित तौर पर राज्यसभा में 50 और लोकसभा में 150 से अधिक सांसदों ने महाभियोग प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए थे, जिसे विपक्ष के अनुसार दबा दिया गया।
JMM सांसद महुआ माजी , कांग्रेस सांसद कुलदीप इंदौरा , कीर्ति आजाद , रेणुका चौधरी और RSP सांसद एनके प्रेमचंद्रन समेत कई नेताओं ने सीईसी के तत्काल इस्तीफे की माँग की।
इंडिया ब्लॉक ने घोषणा की कि जब तक सीईसी इस्तीफा नहीं देते, देशभर में विरोध-कार्यक्रम जारी रहेंगे।

इंडिया ब्लॉक ने 31 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के विरुद्ध 'जन-महाभियोग' कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें विपक्ष के कई सांसदों ने केंद्र सरकार और भारत निर्वाचन आयोग पर सीधे निशाना साधा। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि विशेष सारांश पुनरीक्षण (SIR) की आड़ में करोड़ों वैध मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं, जो उनके अनुसार लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा है।

जन-महाभियोग कार्यक्रम का मुख्य घटनाक्रम

झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की सांसद महुआ माजी, कांग्रेस सांसद कुलदीप इंदौरा, कीर्ति आजाद, रेणुका चौधरी, गुरजीत सिंह औजला, इमरान प्रतापगढ़ी, मनोज कुमार तथा रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (RSP) के सांसद एनके प्रेमचंद्रन समेत कई नेताओं ने इस कार्यक्रम में भाग लिया। नेताओं ने एकसुर में कहा कि संसद में उनकी आवाज़ दबाए जाने के बाद वे अब सीधे जनता के बीच जाकर इस मुद्दे को उठा रहे हैं।

गौरतलब है कि इससे पहले इंडिया ब्लॉक के सांसदों ने राष्ट्रपति से अपील की थी और मामले को सर्वोच्च न्यायालय तक ले जाया था। कथित तौर पर राज्यसभा में कम से कम 50 और लोकसभा में 150 से अधिक सांसदों ने महाभियोग प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए थे, लेकिन विपक्ष का आरोप है कि उस प्रस्ताव को दबा दिया गया।

नेताओं के प्रमुख बयान

सांसद महुआ माजी ने कहा, 'SIR को लेकर लगातार लोगों के साथ अन्याय हो रहा है, वोटर लिस्ट से करोड़ों नाम काटे जा रहे हैं। इंडिया ब्लॉक लगातार जनता के साथ खड़ा है ताकि असली मतदाताओं के नाम न हटाए जाएं। राष्ट्रपति ने भी कहा था कि सबूत चाहिए — आज जो पीड़ित मतदाता अपने अनुभव साझा करते हैं, वह भी देश के सामने सबूत के तौर पर होगा।'

कांग्रेस सांसद कुलदीप इंदौरा ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा उठाए गए वोट चोरी के मुद्दे पर सीईसी ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देना चाहिए। उनके अनुसार SIR प्रक्रिया में हुई कथित गड़बड़ियाँ और सत्ता हथियाने के कथित प्रयास अब उजागर हो चुके हैं।

लोकसभा सांसद कीर्ति आजाद ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार ने सांसदों के लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन किया है। उन्होंने कहा, 'जब संसद में हमारी आवाज़ दबाई जाती है, तो हम जनता के बीच जाते हैं — यह हमारा कर्तव्य है।'

कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी ने तीखे अंदाज में कहा कि ज्ञानेश कुमार का 'जन-महाभियोग' तो उसी दिन हो गया था जब उन्होंने कथित तौर पर लाखों-करोड़ों मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए। RSP सांसद एनके प्रेमचंद्रन ने कहा कि सीईसी के पास पद पर बने रहने का कोई नैतिक या कानूनी अधिकार नहीं है और उन्हें तत्काल इस्तीफा देना चाहिए।

यूसीसी और अन्य मुद्दों पर विपक्ष की प्रतिक्रिया

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उत्तर प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने संबंधी बयान पर कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा कि गृह मंत्री को उत्तर प्रदेश जाने से पहले MLC चुनाव के नतीजे देख लेने चाहिए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार संविधान का सम्मान नहीं करती।

कांग्रेस सांसद गुरजीत सिंह औजला ने कहा कि 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव और राहुल गांधी की आगामी पंजाब रैली की तैयारियाँ चल रही हैं, और हो सकता है कि इस मुद्दे पर भी चर्चा हुई हो।

आम जनता पर असर और व्यापक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब SIR प्रक्रिया को लेकर देशभर में विपक्षी दलों में गहरी बेचैनी है। विपक्ष का कहना है कि इस प्रक्रिया के ज़रिए अल्पसंख्यक, प्रवासी मज़दूर और हाशिये पर रहने वाले समुदायों के मतदाता सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। चुनाव आयोग ने इन आरोपों को अब तक सार्वजनिक रूप से खारिज किया है और कहा है कि SIR एक नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया है।

कांग्रेस सांसद मनोज कुमार ने इस कार्यक्रम को 'ज्ञानेश कुमार का विदाई कार्यक्रम' करार देते हुए देशभर की जनता से आह्वान किया कि वे अपने-अपने गाँव और शहर में वोट चोरी के खिलाफ आवाज़ उठाएँ।

क्या होगा आगे

इंडिया ब्लॉक ने स्पष्ट किया है कि जब तक सीईसी ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते, उनका विरोध-आंदोलन जारी रहेगा। विपक्ष के अनुसार आने वाले दिनों में देश के विभिन्न हिस्सों में ऐसे और कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। यह देखना होगा कि सर्वोच्च न्यायालय में लंबित मामले और राष्ट्रपति को सौंपी गई अपील का क्या परिणाम निकलता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी संवैधानिक सीमाएँ स्पष्ट हैं — सीईसी को हटाने का अधिकार केवल संसदीय महाभियोग प्रक्रिया के ज़रिए है, न कि सड़क पर आयोजित किसी कार्यक्रम से। असली सवाल यह है कि SIR प्रक्रिया में हुई कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जाँच क्यों नहीं हो रही — यह वह बिंदु है जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नज़रअंदाज़ करती है। विपक्ष के पास संख्या-बल है, लेकिन उसके पास अदालत में टिकने लायक ठोस दस्तावेज़ी साक्ष्य कितने हैं, यह अभी सार्वजनिक नहीं है। जब तक यह आंदोलन केवल बयानबाज़ी तक सीमित रहेगा, सरकार के लिए इसे नज़रअंदाज़ करना आसान होगा।
RashtraPress
31 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इंडिया ब्लॉक का 'जन-महाभियोग' क्या है?
'जन-महाभियोग' इंडिया ब्लॉक द्वारा आयोजित एक विरोध-कार्यक्रम है जिसमें विपक्षी सांसदों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग की। यह कार्यक्रम 31 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित हुआ और इसमें कई दलों के सांसदों ने भाग लिया।
विपक्ष SIR प्रक्रिया पर आपत्ति क्यों जता रहा है?
विपक्षी दलों का आरोप है कि विशेष सारांश पुनरीक्षण (SIR) की आड़ में करोड़ों वैध मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं। उनका कहना है कि इससे अल्पसंख्यक और हाशिये पर रहने वाले समुदाय सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं, जबकि चुनाव आयोग ने इसे नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया बताया है।
क्या संसद में सीईसी के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाया गया था?
विपक्ष के अनुसार राज्यसभा में कम से कम 50 और लोकसभा में 150 से अधिक सांसदों ने महाभियोग प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए थे। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रस्ताव को संसद में आगे नहीं बढ़ने दिया गया।
इंडिया ब्लॉक ने अब तक क्या-क्या कदम उठाए हैं?
इंडिया ब्लॉक ने राष्ट्रपति से अपील की, मामले को सर्वोच्च न्यायालय तक ले गया, संसद में महाभियोग प्रस्ताव पेश करने की कोशिश की और अब सड़क पर 'जन-महाभियोग' कार्यक्रम आयोजित किया। नेताओं ने कहा कि जब तक सीईसी इस्तीफा नहीं देते, विरोध जारी रहेगा।
सीईसी ज्ञानेश कुमार को कैसे हटाया जा सकता है?
संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार मुख्य चुनाव आयुक्त को केवल संसद में महाभियोग की प्रक्रिया के ज़रिए हटाया जा सकता है, जिसके लिए दोनों सदनों में विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है। 'जन-महाभियोग' एक राजनीतिक दबाव का प्रतीकात्मक माध्यम है, न कि कोई संवैधानिक प्रक्रिया।
राष्ट्र प्रेस
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