31 अक्टूबर 2026
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आरएसएस की दैनिक शाखाएँ शताब्दी वर्ष में 1,01,151 के पार, 1,10,849 स्थानों तक पहुँची गतिविधियाँ

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आरएसएस की दैनिक शाखाएँ शताब्दी वर्ष में 1,01,151 के पार, 1,10,849 स्थानों तक पहुँची गतिविधियाँ

सारांश

शताब्दी वर्ष में आरएसएस ने संगठनात्मक विस्तार का नया रिकॉर्ड बनाया — दैनिक शाखाएँ 1,01,151 और कुल गतिविधि-स्थल 1,10,849। इंदौर में 2 से 4 नवंबर तक होने वाली वार्षिक बैठक में मोहन भागवत की अगुवाई में इस विस्तार की समीक्षा और अगले चरण की कार्ययोजना तय होगी।

मुख्य बातें

आरएसएस की दैनिक शाखाओं की संख्या शताब्दी वर्ष में बढ़कर 1,01,151 हो गई है।
साप्ताहिक शाखाओं और मासिक मिलन सहित संघ की गतिविधियाँ देशभर के 1,10,849 स्थानों तक पहुँच चुकी हैं।
यह जानकारी अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने 31 अक्टूबर 2026 को इंदौर में दी।
वार्षिक अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल बैठक 2 से 4 नवंबर तक इंदौर के डेली कॉलेज में होगी, जिसमें मोहन भागवत और दत्तात्रेय होसबाले शामिल होंगे।
बैठक के एजेंडे में नशा, बाहरी हस्तक्षेप, नए मीडिया की चुनौतियाँ और वैश्विक परिस्थितियाँ प्रमुख विषय हैं।
आरएसएस की स्थापना 1925 में केशव बलिराम हेडगेवार ने नागपुर में की थी; संगठन 100 वर्ष पूरे होने का उत्सव मना रहा है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने अपने शताब्दी वर्ष में संगठनात्मक विस्तार का नया मील का पत्थर हासिल किया है — देशभर में दैनिक शाखाओं की संख्या बढ़कर 1,01,151 हो गई है, जबकि साप्ताहिक शाखाओं और मासिक मिलन को मिलाकर संघ की गतिविधियाँ 1,10,849 स्थानों तक पहुँच चुकी हैं। यह जानकारी संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने 31 अक्टूबर 2026 को इंदौर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी।

मुख्य घटनाक्रम

आरएसएस की वार्षिक अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक से ठीक पहले इंदौर में आयोजित प्रेस वार्ता में आंबेकर ने संगठन के ताज़ा आंकड़े सार्वजनिक किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि बैठक के अंतिम दिन शताब्दी वर्ष के विस्तार का विस्तृत आकलन भी साझा किया जाएगा।

आंबेकर के अनुसार, 'देशभर में आरएसएस की दैनिक शाखाओं की संख्या अब बढ़कर 1,01,151 हो गई है। साप्ताहिक शाखाओं और मासिक मिलन को मिलाकर संघ की गतिविधियाँ देशभर के लगभग 1,10,849 स्थानों तक पहुँच गई हैं।'

बैठक का एजेंडा और प्रतिभागी

संघ की यह वार्षिक बैठक 2 से 4 नवंबर 2026 तक इंदौर के डेली कॉलेज में आयोजित होगी। बैठक में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले, सभी छह सह-सरकार्यवाह, वरिष्ठ पदाधिकारी और संगठन के 46 प्रांतों तथा 11 क्षेत्रों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे।

बैठक में शताब्दी वर्ष के दौरान आयोजित कार्यक्रमों की समीक्षा की जाएगी। हाल ही में संपन्न विजयादशमी उत्सव के साथ शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों का एक महत्वपूर्ण चरण पूरा हुआ है। साथ ही, विजयादशमी पर भागवत के संबोधन में उठाए गए मुद्दों पर आगे की कार्ययोजना पर भी चर्चा होगी।

प्रमुख चर्चा विषय

बैठक के एजेंडे में कई अहम सामाजिक और राष्ट्रीय चुनौतियाँ शामिल हैं — नए मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर उपलब्ध सामग्री से जुड़े खतरे, नशे की बढ़ती समस्या, भारत के आंतरिक मामलों में बाहरी हस्तक्षेप और बदलती वैश्विक परिस्थितियाँ। ये विषय संगठन की व्यापक सामाजिक चिंताओं को दर्शाते हैं।

मध्य प्रदेश से संघ का ऐतिहासिक जुड़ाव

आंबेकर ने मध्य प्रदेश के साथ संघ के ऐतिहासिक सम्बन्ध का उल्लेख करते हुए कहा कि नागपुर में स्थापना के बाद महाराष्ट्र से बाहर मध्य प्रदेश पहला क्षेत्र था, जहाँ संघ ने अपनी गतिविधियाँ प्रारंभ की थीं। उनके अनुसार, 'यहाँ के लोगों का लगातार सहयोग और समर्थन मिलता रहा है।'

गौरतलब है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना 1925 में केशव बलिराम हेडगेवार ने नागपुर में की थी। संगठन अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने पर देशभर में विभिन्न कार्यक्रमों और जनसंपर्क गतिविधियों का आयोजन कर रहा है।

आगे क्या

बैठक के अंतिम दिन — 4 नवंबर को — शताब्दी वर्ष के विस्तार का विस्तृत आकलन सार्वजनिक किए जाने की संभावना है, जो संगठन के दूसरे शताब्दी चरण की दिशा तय करेगा। आंबेकर ने संकेत दिया कि संघ मीडिया के साथ अपने सहयोग को आगे भी जारी रखने का इच्छुक है।

संपादकीय दृष्टिकोण

01,151 दैनिक शाखाओं का यह आँकड़ा महज संगठनात्मक संख्या नहीं — यह आरएसएस की ज़मीनी पैठ का बैरोमीटर है, जिसे कोई भी राजनीतिक दल अनदेखा नहीं कर सकता। लेकिन मुख्यधारा की कवरेज अक्सर यह सवाल चूक जाती है कि 'शाखा' की गुणवत्ता और नियमितता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि कैसे होती है। संख्या-विस्तार के साथ-साथ बैठक का एजेंडा — नशा, बाहरी हस्तक्षेप, नए मीडिया — दर्शाता है कि संघ खुद को केवल सांस्कृतिक संगठन तक सीमित नहीं रख रहा, बल्कि समकालीन नीतिगत विमर्श में सक्रिय भूमिका निभाने की स्थिति में है। दूसरे शताब्दी वर्ष की असली परीक्षा यही होगी कि क्या यह विस्तार संख्यात्मक है या वैचारिक गहराई में भी बढ़ रहा है।
RashtraPress
31 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आरएसएस की दैनिक शाखाओं की वर्तमान संख्या कितनी है?
आरएसएस की दैनिक शाखाओं की संख्या शताब्दी वर्ष में बढ़कर 1,01,151 हो गई है। साप्ताहिक शाखाओं और मासिक मिलन को मिलाकर संघ की गतिविधियाँ देशभर के 1,10,849 स्थानों तक पहुँच चुकी हैं।
आरएसएस की इंदौर बैठक कब और कहाँ होगी?
आरएसएस की वार्षिक अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल बैठक 2 से 4 नवंबर 2026 तक इंदौर के डेली कॉलेज में आयोजित होगी। इसमें आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले और 46 प्रांतों व 11 क्षेत्रों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
इंदौर बैठक में किन विषयों पर चर्चा होगी?
बैठक में शताब्दी वर्ष की गतिविधियों की समीक्षा के साथ-साथ नए मीडिया प्लेटफ़ॉर्म की चुनौतियाँ, नशे की बढ़ती समस्या, भारत के आंतरिक मामलों में बाहरी हस्तक्षेप और बदलती वैश्विक परिस्थितियाँ एजेंडे पर हैं। विजयादशमी पर भागवत के संबोधन में उठाए गए मुद्दों पर भी आगे की कार्ययोजना बनेगी।
आरएसएस का शताब्दी वर्ष क्यों मनाया जा रहा है?
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना 1925 में केशव बलिराम हेडगेवार ने नागपुर में की थी। संगठन 2025 में अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर देशभर में विविध कार्यक्रमों और जनसंपर्क गतिविधियों का आयोजन कर रहा है।
मध्य प्रदेश और आरएसएस का ऐतिहासिक संबंध क्या है?
आरएसएस के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर के अनुसार, नागपुर में स्थापना के बाद महाराष्ट्र के बाहर मध्य प्रदेश पहला क्षेत्र था जहाँ संघ ने अपनी गतिविधियाँ शुरू की थीं। यही कारण है कि इंदौर इस वर्ष की महत्वपूर्ण बैठक की मेज़बानी कर रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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