8 अक्टूबर 2026
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मोहन भागवत का बर्दवान दौरा: पश्चिम बंगाल में आरएसएस विस्तार की होगी समीक्षा

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मोहन भागवत का बर्दवान दौरा: पश्चिम बंगाल में आरएसएस विस्तार की होगी समीक्षा

सारांश

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का बर्दवान दौरा महज़ औपचारिकता नहीं — यह विधानसभा चुनावों के बाद पहली बार बंगाल में संगठन की ज़मीनी पकड़ की परीक्षा है। एक वर्षीय जनसंपर्क अभियान के नतीजे आज सामने आएँगे।

मुख्य बातें

आरएसएस सरसंघचालक मोहन भागवत ने 8 अक्टूबर 2026 को पश्चिम बंगाल के बर्दवान में संगठनात्मक बैठक की।
बैठक में राज्य की तीन क्षेत्रीय इकाइयों — उत्तरी, मध्य और दक्षिणी — के पदाधिकारी शामिल हुए।
करीब एक वर्ष से चले जनसंपर्क अभियान और शाखाओं की बढ़ोतरी पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी।
यह विधानसभा चुनावों के बाद नई सरकार के गठन के बाद भागवत का बंगाल का पहला दौरा है।
बैठक के बाद स्वयंसेवकों का 'एकीकरण' कार्यक्रम और अगले वर्ष की कार्ययोजना पर भी चर्चा होगी।
यह दौरा आरएसएस के 102वें स्थापना दिवस समारोह के बीच हुआ।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 को पश्चिम बंगाल के पूर्वी बर्दवान जिले के बर्दवान शहर में एक महत्वपूर्ण संगठनात्मक बैठक की। इस बैठक में राज्य में पिछले करीब एक वर्ष से चले आ रहे जनसंपर्क अभियान और संगठन के विस्तार की प्रगति का आकलन किया जाएगा। संगठन के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार यह विधानसभा चुनावों के बाद नई सरकार के गठन के बाद भागवत का पश्चिम बंगाल का पहला दौरा है।

बैठक का स्वरूप और भागीदारी

सूत्रों ने बताया कि इस बैठक में आरएसएस की तीन मुख्य क्षेत्रीय इकाइयों — राज्य के उत्तरी, मध्य और दक्षिणी भागों — के वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल हुए। यह बैठक संगठन के 102वें स्थापना दिवस समारोह के बीच आयोजित की गई, जिससे इसका प्रतीकात्मक महत्व और बढ़ जाता है।

आरएसएस के राज्य इकाई के सूत्रों ने बताया कि समाज के विभिन्न वर्गों के साथ संगठन के संबंध मज़बूत करने के लिए लगभग एक वर्ष से एक जोरदार जनसंपर्क अभियान चलाया जा रहा था।

विस्तार रिपोर्ट और शाखाओं की बढ़ोतरी

संगठन के सूत्रों ने कहा, 'अब हमारे राष्ट्रीय प्रमुख के लिए उस साल भर चले जोरदार जनसंपर्क अभियान के नतीजों का जायजा लेने का समय आ गया है और यह काम आज बाद में बर्धमान शहर में होने वाली बैठक में किया जाएगा।' इसके साथ ही पश्चिम बंगाल में आरएसएस शाखाओं की संख्या में हुई बढ़ोतरी पर भी एक विस्तृत रिपोर्ट भागवत की उपस्थिति में प्रस्तुत की जाएगी।

अंदरूनी सूत्रों के अनुसार बैठक में संगठन के ढाँचे, उसके विस्तार और आने वाले वर्षों में सामाजिक कार्यक्रमों की कार्यप्रणाली पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।

एकीकरण कार्यक्रम भी होगा आयोजित

बैठक के बाद स्वयंसेवकों का एक 'एकीकरण' कार्यक्रम भी आयोजित होने की जानकारी मिली है। इस कार्यक्रम में नई खुली शाखाओं, मौजूदा संगठनात्मक ढाँचे और अगले वर्ष के लिए प्रस्तावित कार्यक्रमों पर चर्चा की जाएगी।

राजनीतिक पृष्ठभूमि और संदर्भ

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल राजनीतिक रूप से संवेदनशील राज्य रहा है, जहाँ तृणमूल कांग्रेस (TMC) का दीर्घकालिक वर्चस्व रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) और आरएसएस राज्य में अपनी जड़ें मज़बूत करने के प्रयास लंबे समय से कर रहे हैं। विधानसभा चुनावों के बाद भागवत का यह पहला दौरा संगठनात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

यह दौरा आरएसएस के उस व्यापक रणनीतिक प्रयास का हिस्सा माना जा रहा है जिसमें पूर्वी भारत — विशेषकर बंगाल — में संगठन की उपस्थिति और स्वीकार्यता बढ़ाने पर ज़ोर दिया जा रहा है। क्या इस विस्तार अभियान के परिणाम अपेक्षाओं के अनुरूप हैं, यह बैठक के बाद स्पष्ट होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो रणनीति पर पुनर्विचार अनिवार्य हो जाएगा। विधानसभा चुनावों के बाद का यह पहला दौरा यह भी संकेत देता है कि संगठन भविष्य की चुनावी राजनीति के लिए ज़मीन तैयार कर रहा है — भले ही सार्वजनिक बयानबाज़ी सामाजिक कार्यों पर केंद्रित हो।
RashtraPress
8 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मोहन भागवत का बर्दवान दौरा किसलिए हो रहा है?
भागवत पश्चिम बंगाल के बर्दवान में आरएसएस के पिछले एक वर्ष के जनसंपर्क अभियान और संगठनात्मक विस्तार की समीक्षा करने आए हैं। इस बैठक में शाखाओं की बढ़ोतरी और अगले वर्ष की कार्ययोजना पर भी चर्चा होगी।
इस बैठक में कौन-कौन शामिल हुए?
बैठक में पश्चिम बंगाल की तीन मुख्य क्षेत्रीय संगठनात्मक इकाइयों — उत्तरी, मध्य और दक्षिणी क्षेत्र — के वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल हुए। बैठक की अध्यक्षता स्वयं सरसंघचालक मोहन भागवत ने की।
क्या पश्चिम बंगाल में आरएसएस का विस्तार हो रहा है?
आरएसएस के राज्य सूत्रों के अनुसार पिछले एक वर्ष से समाज के विभिन्न वर्गों के साथ संबंध बढ़ाने के लिए जोरदार जनसंपर्क अभियान चलाया गया है। शाखाओं की संख्या में वृद्धि पर विस्तृत रिपोर्ट भागवत के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी।
भागवत का यह दौरा राजनीतिक रूप से क्यों महत्वपूर्ण है?
यह विधानसभा चुनावों के बाद नई सरकार के गठन के बाद भागवत का पश्चिम बंगाल का पहला दौरा है। पश्चिम बंगाल TMC के दीर्घकालिक प्रभाव वाला राज्य है, जहाँ आरएसएस और BJP लंबे समय से अपनी संगठनात्मक उपस्थिति मज़बूत करने में लगे हैं।
बैठक के बाद क्या 'एकीकरण' कार्यक्रम भी होगा?
हाँ, बैठक के बाद स्वयंसेवकों का एक एकीकरण कार्यक्रम आयोजित होने की जानकारी है। इसमें नई खुली शाखाओं, मौजूदा ढाँचे और अगले वर्ष के प्रस्तावित कार्यक्रमों पर चर्चा होगी।
राष्ट्र प्रेस
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