क्या मोहन भागवत का भोपाल दौरा महत्वपूर्ण है?
सारांश
Key Takeaways
- मोहन भागवत का दौरा सामाजिक एकता को बढ़ावा देगा।
- कार्यक्रमों में विभिन्न समुदायों के नेता शामिल होंगे।
- यह दौरा पिछले 10 महीनों में उनका 5वां दौरा है।
- भागवत ने सामाजिक सद्भाव की आवश्यकता पर जोर दिया है।
- यह दौरा युवाओं को प्रेरित करने का प्रयास है।
भोपाल, 2 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत शुक्रवार से दो दिन के लिए भोपाल में रहेंगे। इस दौरान वह कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर और रवींद्र भवन में आयोजित कार्यक्रमों में भाग लेंगे।
मोहन भागवत 2 और 3 जनवरी को विभिन्न सत्रों में सामाजिक और धार्मिक नेताओं, युवाओं और महिलाओं की सभा को संबोधित करेंगे।
संघ प्रमुख शुक्रवार को 'युवा संवाद' और 'प्रमुखजन गोष्ठी' का आयोजन करेंगे। इसके बाद, शनिवार को 'सामाजिक सद्भाव बैठक' और 'शक्ति संवाद'
भोपाल में आरएसएस के एक सीनियर पदाधिकारी के अनुसार, 'प्रांत' के सभी 31 जिलों (प्रशासनिक ढांचे के अनुसार 16 जिले) के युवा, जिन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया है, इस कार्यक्रम में शामिल होंगे।
पदाधिकारी ने बताया कि रवींद्र भवन के एक ऑडिटोरियम में प्रमुख नागरिकों के साथ संवाद होगा, जिसमें भोपाल डिवीजन के विभिन्न क्षेत्रों से जानी-मानी हस्तियों को आमंत्रित किया गया है।
मोहन भागवत शनिवार को कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर में होने वाली 'सामाजिक सद्भाव बैठक' को भी संबोधित करेंगे, जिसमें विभिन्न समुदायों के प्रमुख सदस्य शामिल होंगे।
आरएसएस कार्यालय द्वारा हाल ही में जारी एक बयान के अनुसार, पिछले 10 महीनों में यह भागवत का मध्य प्रदेश का 5वां दौरा होगा। एक खास बात यह है कि बुधवार को भागवत ने नागरिकों से जाति, धन और भाषा के भेदभाव से ऊपर उठने और सभी को अपना मानने का आग्रह किया था।
यह टिप्पणियां तब महत्वपूर्ण हो जाती हैं जब देहरादून में कथित नस्लीय दुर्व्यवहार के बाद त्रिपुरा के एक छात्र एंजेल चकमा की हत्या को लेकर गुस्सा बढ़ रहा था। भागवत ने सामाजिक एकता और समानता की आवश्यकता को दोहराते हुए कहा कि पूरा देश सबका है और सद्भाव भारत की पहचान का मुख्य हिस्सा है।