ईपीएफओ का 74वां स्थापना दिवस: ऑटो-सेटलमेंट और WhatsApp सेवाओं समेत कई नई पहलों का आगाज़
सारांश
मुख्य बातें
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) रविवार, 2 नवंबर 2026 को अपना 74वां स्थापना दिवस मनाएगा, जिसमें केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया कई महत्वपूर्ण नागरिक-सुविधा पहलों की शुरुआत करेंगे। इनमें ₹1,000 तक की शेष राशि वाले पात्र निष्क्रिय ईपीएफ खातों का स्वचालित (ऑटोमैटिक) निपटारा और WhatsApp के ज़रिए ईपीएफओ की सेवाएं उपलब्ध कराना प्रमुख हैं। यह ऐसे समय में आया है जब संगठन के अंशदायी सदस्यों की संख्या पिछले एक दशक में लगभग दोगुनी हो चुकी है।
मुख्य घटनाक्रम
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, डॉ. मांडविया कार्यक्रम स्थल पर लगी प्रदर्शनी के स्टॉल का निरीक्षण करेंगे और ज्ञान सृजन, संस्थागत सीख, कानूनी जागरूकता तथा संवेदनशील प्रशासन से संबंधित कई प्रकाशनों का विमोचन भी करेंगे। इसके अलावा, समारोह में क्षेत्रीय कार्यालयों, ज़ोनल कार्यालयों, व्यक्तिगत अधिकारियों और कर्मचारियों के उत्कृष्ट योगदान के सम्मान में 'भविष्य निधि पुरस्कार 2026' प्रदान किए जाएंगे।
समारोह में मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, केंद्रीय न्यासी बोर्ड के सदस्य, ईपीएफओ के अधिकारी-कर्मचारी, नियोक्ता, श्रमिक प्रतिनिधि तथा अन्य हितधारक शामिल होंगे।
सामाजिक सुरक्षा कवरेज में उल्लेखनीय विस्तार
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारत में सामाजिक सुरक्षा कवरेज 2015 में 19% से बढ़कर 2026 में 68.4% हो गया है, जिसके दायरे में अब 1 अरब से अधिक लोग आ चुके हैं। गौरतलब है कि ईपीएफओ के अंशदायी सदस्यों की संख्या वित्त वर्ष 2014-15 में 3.49 करोड़ थी, जो 16 सितंबर 2026 तक बढ़कर लगभग 7.98 करोड़ हो गई — अर्थात इस अवधि में करीब 4.49 करोड़ नए अंशदायी सदस्य जुड़े। सितंबर 2026 तक 7.68 लाख प्रतिष्ठान ईपीएफओ में अंशदान कर रहे हैं।
नई तकनीकी पहलें: आम कर्मचारियों पर असर
निष्क्रिय खातों के ऑटोमैटिक सेटलमेंट की सुविधा उन लाखों कर्मचारियों के लिए राहत लेकर आएगी, जिनके छोटी राशि वाले ईपीएफ खाते नौकरी बदलने या संस्था बंद होने के कारण निष्क्रिय पड़े हैं। WhatsApp-आधारित सेवाओं की शुरुआत से विशेष रूप से असंगठित क्षेत्र के वे कर्मचारी लाभान्वित होंगे जो डिजिटल पोर्टल का नियमित उपयोग नहीं कर पाते।
आधिकारिक बयान के अनुसार, 'ईपीएफओ का 74वां स्थापना दिवस केवल संस्थागत विकास की कहानी नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करने की निरंतर प्रतिबद्धता को दोहराने का अवसर है कि किसी कर्मचारी के वर्षों के श्रम का लाभ उसे और उसके परिवार को सुरक्षा, सम्मान और मानसिक शांति के रूप में मिले।'
क्या होगा आगे
इन पहलों के लागू होने के बाद ईपीएफओ की सेवा वितरण प्रक्रिया में उल्लेखनीय बदलाव की उम्मीद है। संगठन की बढ़ती सदस्यता और डिजिटलीकरण की दिशा में उठाए जा रहे ये कदम भविष्य में और अधिक स्वचालन की संभावनाएं खोलते हैं।