ईपीएफओ वेतन सीमा ₹15,000 से बढ़कर ₹25,000: 51 लाख से अधिक कर्मचारियों को मिलेगा सामाजिक सुरक्षा कवच
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार, 16 सितंबर को कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के अंतर्गत अनिवार्य कवरेज की वेतन सीमा ₹15,000 प्रति माह से बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह करने की मंजूरी दे दी। इस ऐतिहासिक फैसले से 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारियों को भविष्य निधि, पेंशन और बीमा जैसी सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं का लाभ मिलने की उम्मीद है। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया।
मुख्य घटनाक्रम
केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'श्रमेव जयते! माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का हृदय से आभार। आज उनके नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ईपीएफओ की वेतन सीमा को ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 प्रतिमाह करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।' उन्होंने यह भी बताया कि यह निर्णय विश्वकर्मा जयंती एवं सेवा दिवस के अवसर पर लागू होगा।
गौरतलब है कि ईपीएफओ की वेतन सीमा वर्ष 2004 से 2014 तक पूरे 10 वर्षों तक अपरिवर्तित रही थी। इसके बाद सितंबर 2014 में इसे ₹10,000 से बढ़ाकर ₹15,000 किया गया था। अब लगभग 12 वर्षों के अंतराल के बाद यह दूसरा बड़ा संशोधन किया गया है।
किन कर्मचारियों पर पड़ेगा असर
अब तक यदि कोई नया कर्मचारी ₹15,000 से अधिक मासिक वेतन पर नौकरी शुरू करता था, तो वह स्वतः ईपीएफ ढाँचे के दायरे में नहीं आता था। इसके कारण ₹15,000 से ₹25,000 के बीच वेतन पाने वाले बड़ी संख्या में कर्मचारी भविष्य निधि, पेंशन और बीमा जैसी सुविधाओं से वंचित रहते थे।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद इस वेतन वर्ग के कर्मचारी अनिवार्य रूप से ईपीएफओ के दायरे में आएँगे। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में कई राज्यों में न्यूनतम मजदूरी दरें भी मौजूदा ₹15,000 की सीमा के करीब पहुँच चुकी थीं, जिससे ईपीएफओ ढाँचे को अद्यतन करना अपरिहार्य हो गया था।
कर्मचारियों को मिलने वाले तीन प्रमुख लाभ
सरकारी बयान के अनुसार, वेतन सीमा बढ़ने से कर्मचारियों को तीन स्तरों पर लाभ मिलेगा। पहला, कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) के तहत नियमित बचत का अवसर मिलेगा। दूसरा, कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) के माध्यम से सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन सुरक्षा सुनिश्चित होगी। तीसरा, कर्मचारी जमा-संबद्ध बीमा योजना (ईडीएलआई) के अंतर्गत बीमा कवच भी उपलब्ध होगा।
इसके साथ ही पेंशन योग्य वेतन और वैधानिक अंशदान व्यवस्था भी वर्तमान वेतन स्तरों के अनुरूप हो जाएगी, जिससे दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा और मजबूत होगी।
औपचारिक रोजगार पर संभावित प्रभाव
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अनुसार, इस फैसले से औपचारिक रोजगार को नई गति मिलेगी। अधिक कर्मचारियों के संगठित सामाजिक सुरक्षा ढाँचे में शामिल होने से नौकरी की स्थिरता बढ़ेगी और कर्मचारी दीर्घकाल तक एक ही संगठन से जुड़े रहने के लिए प्रोत्साहित होंगे।
यह ऐसे समय में आया है जब सरकार असंगठित क्षेत्र को औपचारिक अर्थव्यवस्था में लाने के लिए कई नीतिगत कदम उठा रही है। 51 लाख से अधिक नए लाभार्थियों के जुड़ने से ईपीएफओ की सदस्य संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है।
आगे की राह
यह निर्णय विश्वकर्मा जयंती के शुभ अवसर से लागू होने की घोषणा की गई है। सरकार के अनुसार, इससे देश में रोजगार की औपचारिकता की प्रक्रिया को और बल मिलेगा तथा करोड़ों श्रमिकों की दीर्घकालिक आर्थिक सुरक्षा सुदृढ़ होगी।