ईपीएफओ वेतन सीमा ₹25,000 प्रति माह: कैबिनेट की मंजूरी, 51 लाख कर्मचारियों को मिलेगा सामाजिक सुरक्षा लाभ
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 16 सितंबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के अंतर्गत अनिवार्य कवरेज की वेतन सीमा को ₹15,000 प्रति माह से बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह करने की स्वीकृति दे दी। सरकारी बयान के अनुसार, इस निर्णय से 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारियों को भविष्य निधि, पेंशन और बीमा सुरक्षा का लाभ मिलने की उम्मीद है।
क्या है नया फैसला और इसका दायरा
अब तक जो कर्मचारी ₹15,000 प्रति माह से अधिक वेतन पर नौकरी शुरू करते थे, वे स्वतः ईपीएफओ के अनिवार्य दायरे से बाहर हो जाते थे। नई व्यवस्था के तहत ₹15,000 से ₹25,000 के बीच मासिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों का बड़ा वर्ग भी अनिवार्य रूप से इस सामाजिक सुरक्षा ढाँचे में शामिल हो जाएगा।
इस निर्णय के तहत कर्मचारियों को तीन प्रमुख योजनाओं का लाभ मिलेगा — कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) के अंतर्गत नियमित बचत, कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) के ज़रिए सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन, और कर्मचारी जमा-संबद्ध बीमा योजना (ईडीएलआई) के माध्यम से बीमा सुरक्षा।
ऐतिहासिक संदर्भ: 12 साल बाद हुआ बदलाव
गौरतलब है कि ईपीएफओ की वेतन सीमा 2004 से 2014 तक पूरे 10 वर्षों तक ₹10,000 प्रति माह पर अपरिवर्तित रही थी। इसके बाद सितंबर 2014 में इसे बढ़ाकर ₹15,000 किया गया था। अब लगभग 12 वर्षों के अंतराल के बाद यह संशोधन किया जा रहा है। श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय के अनुसार, इस दौरान देश में वेतन स्तर, आय और औपचारिक रोज़गार में लगातार वृद्धि हुई है तथा कई राज्यों में न्यूनतम मज़दूरी भी मौजूदा सीमा के करीब पहुँच चुकी है।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत औपचारिक क्षेत्र के विस्तार पर ज़ोर दे रहा है और असंगठित कार्यबल को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने की कोशिशें तेज़ हो रही हैं।
वित्तीय प्रभाव और सरकारी व्यय
सरकार के अनुसार, इस फैसले के चलते वार्षिक सरकारी व्यय बढ़कर लगभग ₹11,339 करोड़ हो जाएगा, जबकि वर्तमान बजटीय सहायता करीब ₹10,250 करोड़ है। अगले पाँच वर्षों में इस निर्णय पर लगभग ₹56,696 करोड़ खर्च होने का अनुमान है।
इस प्रस्ताव पर विभिन्न मंत्रालयों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श किया गया था और 16 जून 2026 को व्यय वित्त समिति ने इसकी सिफारिश की थी।
आम कर्मचारियों और नियोक्ताओं पर असर
वर्तमान में ईपीएफओ दुनिया की सबसे बड़ी सामाजिक सुरक्षा प्रणालियों में से एक का संचालन करता है। ताज़ा आँकड़ों के अनुसार, इसके तहत लगभग 7.98 करोड़ अंशदाता सदस्य और 7.68 लाख से अधिक प्रतिष्ठान जुड़े हुए हैं, जबकि कर्मचारी पेंशन योजना के तहत करीब 82 लाख पेंशनभोगियों को लाभ मिल रहा है।
श्रम मंत्रालय का मानना है कि व्यापक सामाजिक सुरक्षा कवरेज से कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा, प्रतिभाशाली कर्मचारियों को बनाए रखने में मदद मिलेगी और नियोक्ताओं व कर्मचारियों के बीच विश्वास मज़बूत होगा। साथ ही, पेंशन योग्य वेतन और वैधानिक अंशदान व्यवस्था भी वर्तमान वेतन स्तरों के अधिक अनुरूप हो जाएगी।
आगे की राह: औपचारिक रोज़गार को बढ़ावा
सरकार का कहना है कि औपचारिक रोज़गार केवल वेतन तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसके साथ सुनिश्चित और पोर्टेबल सामाजिक सुरक्षा भी जुड़ी होनी चाहिए। इस फैसले को 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।
अधिक कर्मचारियों के सामाजिक सुरक्षा ढाँचे में शामिल होने से नौकरी की स्थिरता बढ़ने और कर्मचारियों के दीर्घकालिक वित्तीय हित सुरक्षित होने की उम्मीद जताई जा रही है।