16 सितंबर 2026
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बिहार में बाढ़-सुखाड़ की दोहरी मार, जदयू सांसद देवेश चंद्र ठाकुर ने माँगा किसानों की क्षति का आकलन

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बिहार में बाढ़-सुखाड़ की दोहरी मार, जदयू सांसद देवेश चंद्र ठाकुर ने माँगा किसानों की क्षति का आकलन

सारांश

बिहार में एक ओर बाढ़ है, दूसरी ओर उत्तर बिहार सूखे की मार झेल रहा है। जदयू सांसद देवेश चंद्र ठाकुर ने केंद्र से माँग की है कि दोनों परिस्थितियों का समग्र आकलन हो और किसानों को समय पर राहत मिले — केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के बिहार दौरे के बीच यह माँग और अहम हो जाती है।

मुख्य बातें

जदयू सांसद देवेश चंद्र ठाकुर ने 16 सितंबर 2026 को कहा कि बिहार में बाढ़ और सुखाड़ दोनों की समस्या एक साथ है।
उत्तर बिहार के कई क्षेत्रों में पर्याप्त बारिश न होने से सुखाड़ जैसी स्थिति, जबकि दक्षिण बिहार में बाढ़ का प्रकोप।
ठाकुर ने माँग की कि केंद्र सरकार केवल बाढ़ नहीं, बल्कि सुखाड़ प्रभावित किसानों की क्षति का भी आकलन करे।
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के PM मोदी को लिखे पत्र पर ठाकुर ने कहा — जवाब निश्चित आएगा, PM व्यस्त हैं।
यूसीसी पर जदयू का रुख स्पष्ट करने से ठाकुर ने परहेज किया, कहा — अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व करेगा।

जनता दल (यूनाइटेड) के सांसद देवेश चंद्र ठाकुर ने 16 सितंबर 2026 को कहा कि बिहार में एक साथ बाढ़ और सुखाड़ की दोहरी आपदा ने किसानों को बुरी तरह प्रभावित किया है, और सरकार को दोनों परिस्थितियों का समग्र आकलन करना चाहिए। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लेने बिहार पहुँचने के अवसर पर ठाकुर ने यह बात कही।

बाढ़ और सुखाड़ की दोहरी चुनौती

ठाकुर ने स्पष्ट किया कि दक्षिण बिहार में जहाँ इस मौसम में पर्याप्त बारिश हुई है, वहीं उत्तर बिहार के कई क्षेत्रों में बारिश की कमी के कारण सुखाड़ जैसी गंभीर स्थिति बनी हुई है। उनके अनुसार राज्य में मौसम की स्थिति एकसमान नहीं है — कुछ इलाके बाढ़ की विभीषिका झेल रहे हैं, तो कुछ सूखे की मार से कराह रहे हैं। उन्होंने कहा कि केवल बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन पर्याप्त नहीं होगा; जहाँ बारिश की कमी के कारण किसानों को नुकसान हुआ है, उन इलाकों की स्थिति को भी प्राथमिकता के साथ देखा जाना चाहिए।

ठाकुर ने यह भी कहा कि शिवराज सिंह चौहान का बिहार आना सरकार की संवेदनशीलता और सजगता को दर्शाता है। उनके अनुसार संबंधित इलाकों में किसानों और आम लोगों को हुई क्षति का व्यापक सर्वेक्षण किया जाए, ताकि राहत और मुआवजा समय पर और सही तरीके से पहुँच सके।

तेजस्वी यादव के पत्र पर ठाकुर की प्रतिक्रिया

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों को लेकर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखे जाने और जवाब न मिलने के आरोप पर ठाकुर ने कहा कि तेजस्वी यादव को धैर्य रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री अत्यंत व्यस्त रहते हैं और प्रधानमंत्री कार्यालय में भी इस समय कार्यभार अधिक हो सकता है। उनके अनुसार पत्र का जवाब निश्चित रूप से आएगा, क्योंकि प्रधानमंत्री बाढ़ जैसे संवेदनशील मामलों में सचेत रहते हैं और सरकार की नज़र प्रभावित क्षेत्रों पर बनी हुई है।

यूसीसी पर जदयू का रुख

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान पर, जिसमें उन्होंने कहा था कि 2029 से पहले एनडीए शासित सभी राज्यों में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू की जाएगी, देवेश चंद्र ठाकुर ने जदयू का रुख स्पष्ट करने से बचते हुए कहा कि इस विषय पर अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व करेगा। उन्होंने कहा कि वे पार्टी के सिपाही हैं और पार्टी जो भी फैसला लेगी, वे उसके साथ खड़े रहेंगे। गौरतलब है कि यूसीसी का मुद्दा एनडीए के भीतर घटक दलों के बीच संवेदनशील रहा है।

सेवा संकल्प अभियान पर सकारात्मक रुख

प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन के अवसर पर चलाए जा रहे सेवा संकल्प अभियान पर भी ठाकुर ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी देश के लोकप्रिय नेता हैं और उनके जन्मदिन पर लोग अपनी भावनाएँ अलग-अलग तरीकों से व्यक्त कर रहे हैं। सेवा कार्यक्रमों के ज़रिये जन्मदिन मनाया जाना एक सराहनीय पहल है।

आगे की राह

बिहार में बाढ़ और सुखाड़ की दोहरी समस्या राज्य के कृषि क्षेत्र के लिए इस खरीफ सीजन में गंभीर चुनौती बनी हुई है। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के दौरे से उम्मीद है कि प्रभावित किसानों के लिए केंद्रीय सहायता का मार्ग प्रशस्त होगा। राज्य सरकार और केंद्र सरकार दोनों के समन्वित प्रयास ही किसानों को समय पर राहत दिला सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी केंद्र और राज्य की राहत मशीनरी अधिकतर बाढ़ पर ही केंद्रित रहती है। ठाकुर की माँग तार्किक है, लेकिन सवाल यह है कि क्या सुखाड़ प्रभावित इलाकों का व्यापक सर्वेक्षण वास्तव में होगा या यह भी दौरों और बयानों तक सीमित रह जाएगा। यूसीसी पर जदयू की 'पार्टी नेतृत्व तय करेगा' वाली भाषा एनडीए के भीतर की असहजता को उजागर करती है — सहयोगी दल सार्वजनिक रूप से न हाँ कह पा रहे हैं, न ना। बिहार जैसे कृषि-प्रधान राज्य में दोहरी आपदा का समय पर व्यापक आकलन न होना किसानों के लिए अगले रबी सीजन को भी जोखिम में डाल सकता है।
RashtraPress
16 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार में बाढ़ और सुखाड़ एक साथ कैसे?
बिहार में मौसम की स्थिति एकसमान नहीं है — दक्षिण बिहार में अत्यधिक बारिश से बाढ़ है, जबकि उत्तर बिहार के कई क्षेत्रों में पर्याप्त वर्षा नहीं हुई, जिससे सुखाड़ जैसी स्थिति बन गई है। जदयू सांसद देवेश चंद्र ठाकुर ने 16 सितंबर 2026 को इस दोहरी चुनौती पर ध्यान दिलाया।
शिवराज सिंह चौहान बिहार क्यों आए?
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा लेने बिहार पहुँचे। जदयू सांसद देवेश चंद्र ठाकुर ने इसे सरकार की संवेदनशीलता और सजगता का संकेत बताया।
तेजस्वी यादव ने PM मोदी को पत्र क्यों लिखा?
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने बिहार के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा था। उन्होंने आरोप लगाया कि पत्र का जवाब नहीं मिला, जिस पर ठाकुर ने कहा कि PM व्यस्त हैं और जवाब निश्चित रूप से आएगा।
यूसीसी पर जदयू का क्या रुख है?
जदयू सांसद देवेश चंद्र ठाकुर ने कहा कि समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पर अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व करेगा और वे पार्टी के फैसले के साथ खड़े रहेंगे। उन्होंने व्यक्तिगत रूप से कोई स्पष्ट समर्थन या विरोध व्यक्त नहीं किया।
किसान क्षति आकलन की माँग क्यों ज़रूरी है?
देवेश चंद्र ठाकुर के अनुसार, यदि केवल बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन हो और सुखाड़ प्रभावित किसानों की अनदेखी हो, तो उत्तर बिहार के किसान राहत से वंचित रह जाएँगे। दोनों परिस्थितियों का समग्र सर्वेक्षण किसानों को समय पर और न्यायसंगत सहायता दिलाने के लिए आवश्यक है।
राष्ट्र प्रेस
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