16 सितंबर 2026
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जातीय जनगणना में OBC के लिए अलग कॉलम की मांग: रांची में कांग्रेस का लोकभवन मार्च, राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन

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जातीय जनगणना में OBC के लिए अलग कॉलम की मांग: रांची में कांग्रेस का लोकभवन मार्च, राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन

सारांश

जातीय जनगणना में OBC के लिए अलग कॉलम की मांग को लेकर झारखंड कांग्रेस ने रांची में लोकभवन मार्च निकाला। बापू वाटिका से शुरू हुए इस मार्च में वरिष्ठ मंत्री और नेता शामिल हुए, और राज्यपाल को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा गया — यह कदम OBC के प्रामाणिक आंकड़ों की माँग पर राष्ट्रीय बहस को और तेज करता है।

मुख्य बातें

झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने 16 सितंबर को रांची में लोकभवन मार्च निकाला।
मांग: आगामी जातीय जनगणना में OBC के लिए अलग कॉलम और समुदाय की वास्तविक संख्या दर्ज करना।
मार्च का नेतृत्व OBC विभाग अध्यक्ष निशांत जायसवाल ने किया; प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश सहित कई मंत्री और नेता शामिल हुए।
प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर केंद्र सरकार से माँग पूरी करने का आग्रह किया।
पार्टी ने चेतावनी दी कि मांग न मानने पर आंदोलन और तेज किया जाएगा।

झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने 16 सितंबर 2026 को राजधानी रांची में लोकभवन मार्च निकाला, जिसमें आगामी जातीय जनगणना में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए अलग कॉलम शामिल करने की मांग की गई। बापू वाटिका से आरंभ हुए इस मार्च में पार्टी के वरिष्ठ नेता, कार्यकर्ता और झारखंड के विभिन्न जिलों से आए OBC प्रतिनिधि शामिल हुए। मार्च के समापन पर कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर केंद्र सरकार तक यह मांग पहुँचाने का आग्रह किया।

मार्च का नेतृत्व और भागीदारी

मार्च का नेतृत्व झारखंड प्रदेश कांग्रेस OBC विभाग के अध्यक्ष निशांत जायसवाल ने किया। उनके साथ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश, ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी, कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव, पूर्व सांसद धीरज प्रसाद साहू और पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश ठाकुर भी उपस्थित रहे।

नेताओं ने क्या कहा

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने कहा कि जातीय जनगणना को केवल आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, OBC की वास्तविक आबादी और सामाजिक-आर्थिक स्थिति के प्रामाणिक आंकड़े उपलब्ध होने से नीतियों और कल्याणकारी योजनाओं के निर्माण में सहायता मिल सकती है।

ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि OBC की यह मांग सामाजिक न्याय और समान अवसर से सीधे जुड़ी है। उन्होंने जोर दिया कि शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और आर्थिक अवसरों से संबंधित नीतियाँ तभी प्रभावी होंगी जब उनका आधार व्यापक और विश्वसनीय आंकड़े हों।

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि जातीय जनगणना में OBC की स्पष्ट गणना से समुदाय की वास्तविक संख्या सामने आएगी, जिससे लक्षित योजनाएं बनाना संभव होगा। कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने OBC के लिए अलग कॉलम की मांग को नीतिगत प्रतिनिधित्व से जुड़ा अहम विषय बताया।

ज्ञापन में उठाई गई प्रमुख मांगें

राज्यपाल को सौंपे गए ज्ञापन में कांग्रेस ने केंद्र सरकार से आगामी जातीय जनगणना में OBC के लिए अलग कॉलम शामिल करने और समुदाय की वास्तविक संख्या दर्ज करने की माँग की। पार्टी का तर्क है कि बिना प्रामाणिक आंकड़ों के OBC के लिए कल्याणकारी नीतियाँ अधूरी रहती हैं।

प्रदेश कांग्रेस OBC विभाग के प्रभारी योगेंद्र योगी ने स्पष्ट किया कि पार्टी इस मांग को लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीकों से आगे भी उठाती रहेगी। पूर्व सांसद धीरज प्रसाद साहू और पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने भी OBC की सामाजिक-आर्थिक स्थिति के प्रामाणिक आंकड़े उपलब्ध कराने की मांग का समर्थन किया।

व्यापक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब जातीय जनगणना का मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में केंद्रीय बहस का विषय बना हुआ है। गौरतलब है कि कांग्रेस इससे पहले भी आगामी जनगणना में OBC के लिए अलग कोड और स्पष्ट पहचान की मांग उठा चुकी है। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में OBC की आबादी का कोई अद्यतन राष्ट्रीय डेटा उपलब्ध नहीं है, क्योंकि स्वतंत्रता के बाद से जाति-आधारित जनगणना नहीं हुई है।

आगे की राह

कांग्रेस ने संकेत दिया है कि यदि केंद्र सरकार इस मांग पर सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं देती, तो पार्टी आंदोलन को और तेज करेगी। झारखंड में यह मार्च OBC अधिकारों पर व्यापक राष्ट्रीय अभियान का हिस्सा माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके पीछे गहरी राजनीतिक और नीतिगत परतें हैं। दशकों से OBC की सटीक आबादी का राष्ट्रीय डेटा अनुपलब्ध है, जो आरक्षण और कल्याण योजनाओं की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करता है। कांग्रेस का यह मार्च झारखंड तक सीमित नहीं — यह उस व्यापक राष्ट्रीय कथा का हिस्सा है जिसे विपक्ष 2024 के बाद से OBC अधिकारों पर केंद्रित कर रहा है। असली सवाल यह है कि क्या केंद्र सरकार डेटा संग्रह की इस माँग को राजनीतिक दबाव के रूप में देखती है या नीतिगत आवश्यकता के रूप में।
RashtraPress
16 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जातीय जनगणना में OBC के लिए अलग कॉलम की मांग क्या है?
कांग्रेस की मांग है कि आगामी जातीय जनगणना में OBC समुदाय के लिए एक अलग कॉलम शामिल किया जाए, ताकि उनकी वास्तविक आबादी और सामाजिक-आर्थिक स्थिति के प्रामाणिक आंकड़े दर्ज हो सकें। पार्टी का तर्क है कि इन आंकड़ों के बिना कल्याणकारी नीतियाँ और आरक्षण व्यवस्था प्रभावी नहीं हो सकती।
16 सितंबर को रांची में कांग्रेस का मार्च क्यों निकाला गया?
झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने 16 सितंबर को रांची में लोकभवन मार्च निकाला, जिसका उद्देश्य जातीय जनगणना में OBC के लिए अलग कॉलम की मांग को केंद्र सरकार तक पहुँचाना था। मार्च के बाद राज्यपाल को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा गया।
इस मार्च में कौन-कौन से नेता शामिल हुए?
मार्च में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश, ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी, विधायक दल नेता प्रदीप यादव, पूर्व सांसद धीरज प्रसाद साहू और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर शामिल हुए। नेतृत्व OBC विभाग अध्यक्ष निशांत जायसवाल ने किया।
OBC जनगणना डेटा से क्या फर्क पड़ेगा?
प्रामाणिक OBC आंकड़े उपलब्ध होने से शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और आर्थिक अवसरों से संबंधित नीतियाँ अधिक लक्षित और प्रभावी बन सकती हैं। नेताओं के अनुसार, वर्तमान में OBC की सटीक राष्ट्रीय जनसंख्या का कोई अद्यतन डेटा उपलब्ध नहीं है।
कांग्रेस आगे क्या करेगी यदि मांग नहीं मानी गई?
प्रदेश कांग्रेस OBC विभाग के प्रभारी योगेंद्र योगी ने कहा है कि पार्टी इस मांग को लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीकों से आगे भी उठाती रहेगी। पार्टी ने संकेत दिया है कि केंद्र की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया न मिलने पर आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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