मणिपुर: कांग्रेस ने CM खेमचंद पर साधा निशाना, NRC-जनगणना को जोड़ना बताया भ्रामक
सारांश
मुख्य बातें
मणिपुर की राजधानी इंफाल में सोमवार, 27 अप्रैल को विपक्षी कांग्रेस पार्टी ने मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह के उस बयान की तीखी आलोचना की, जिसमें उन्होंने राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) की प्रक्रिया को जनगणना से जोड़ा था। कांग्रेस का कहना है कि इस तरह के बयानों से आम जनता में गंभीर भ्रम की स्थिति उत्पन्न होती है और संवैधानिक पदों पर बैठे नेताओं को इससे बचना चाहिए।
मुख्य घटनाक्रम: क्या बोले कांग्रेस नेता?
मणिपुर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष हरेश्वर गोस्वामी ने इंफाल स्थित कांग्रेस भवन में मीडिया को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री के हालिया बयानों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि एनआरसी को नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत अपडेट किया जाता है, जबकि जनगणना को जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत संचालित किया जाता है। उनके अनुसार, ये दोनों प्रक्रियाएं पूरी तरह अलग-अलग कानूनी ढांचों और अलग-अलग प्राधिकरणों के अंतर्गत आती हैं, इसलिए इन्हें एक-दूसरे पर निर्भर बताना तथ्यात्मक रूप से गलत है।
गोस्वामी ने असम का उदाहरण देते हुए समझाया कि वहां एनआरसी को 1951 की जनगणना तथा अन्य दस्तावेजों के आधार पर अपडेट किया गया था — किसी नई जनगणना की प्रतीक्षा नहीं की गई थी। यह तथ्य इस बात को पुष्ट करता है कि जनगणना, एनआरसी अपडेट के लिए अनिवार्य शर्त नहीं है।
भाजपा के भीतर विरोधाभास पर सवाल
कांग्रेस नेता ने भाजपा के भीतर एनआरसी मुद्दे पर स्पष्ट विरोधाभास की ओर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि नवंबर 2019 में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में घोषणा की थी कि एनआरसी पूरे देश में लागू किया जाएगा, लेकिन महज एक महीने बाद दिसंबर 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में कहा कि देशव्यापी एनआरसी पर कोई चर्चा ही नहीं हुई। यह ऐसे समय में आया है जब मणिपुर में एनआरसी का मुद्दा पहले से ही राजनीतिक रूप से संवेदनशील बना हुआ है।
गोस्वामी ने यह भी याद दिलाया कि फरवरी 2019 में तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने विधानसभा में कहा था कि एनआरसी अपडेट की सिफारिश केंद्र सरकार को भेज दी गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि उस समय जनगणना और एनआरसी के संबंध पर कोई आपत्ति क्यों नहीं जताई गई, जबकि राज्य में वर्तमान और पूर्व दोनों नेतृत्व एक ही पार्टी — भाजपा — से जुड़े हैं।
जनगणना स्थगित करने की मांग
गौरतलब है कि मणिपुर कांग्रेस ने राज्य में प्रस्तावित आगामी जनगणना को फिलहाल टालने की भी मांग की है। पार्टी का तर्क है कि जब तक राज्य में पूर्ण शांति बहाल नहीं होती और जातीय हिंसा से विस्थापित सभी आंतरिक रूप से विस्थापित व्यक्ति (आईडीपी) अपने घर नहीं लौट जाते, तब तक जनगणना की प्रक्रिया शुरू करना उचित नहीं होगा।
यह मणिपुर में जातीय संघर्ष की उस व्यापक पृष्ठभूमि से जुड़ा है, जो मई 2023 से जारी है और जिसमें हजारों परिवार अभी भी राहत शिविरों में रह रहे हैं।
राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन
मणिपुर कांग्रेस ने राज्यपाल अजय कुमार भल्ला को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर राज्य में कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति पर गहरी चिंता जताई। पार्टी ने राज्यपाल से हस्तक्षेप करने और विस्थापित नागरिकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने की मांग की।
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह इन आरोपों का जवाब किस रूप में देते हैं और क्या केंद्र सरकार मणिपुर में एनआरसी अपडेट की प्रक्रिया पर कोई स्पष्ट रुख अपनाती है।