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जोहान्सबर्ग में 7 महिलाओं के शव मिले, फेमिसाइड पर दक्षिण अफ्रीका में उबाल

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जोहान्सबर्ग में 7 महिलाओं के शव मिले, फेमिसाइड पर दक्षिण अफ्रीका में उबाल

सारांश

जोहान्सबर्ग हवाईअड्डे के आसपास सात महिलाओं के शव — जिनमें पाँच महज एक हफ्ते में — ने दक्षिण अफ्रीका की फेमिसाइड समस्या को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है। 2025 में राष्ट्रीय संकट की घोषणा के बावजूद ज़मीनी बदलाव न आने से आम नागरिकों और महिला संगठनों का गुस्सा चरम पर है।

मुख्य बातें

जोहान्सबर्ग के अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के आसपास पिछले कुछ महीनों में 7 महिलाओं के शव बरामद हुए, जिनमें से 5 शव एक सप्ताह के भीतर मिले।
38 वर्षीया एलिजाबेथ 'त्सोंत्सो' मोसेलाकगोमो 9 सितंबर को दौड़ने निकली थीं और वापस नहीं लौटीं; शव शनिवार को मिला।
उप-राष्ट्रपति पॉल माशातिले और राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने हत्याओं की निंदा की और जाँच को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया।
पुलिस के आँकड़ों के अनुसार 31 मार्च 2024 तक के एक साल में दक्षिण अफ्रीका में 27,600 से अधिक हत्याएँ , जिनमें 5,578 पीड़ित महिलाएँ थीं।
पुलिस ने सीरियल किलर की संभावना से इनकार किया; जुलाई की पहली हत्या में मृत महिला के प्रेमी को हिरासत में लिया गया।
महिला संगठन विमेन फॉर चेंज ने पुलिस की 'अकेले न निकलें' अपील पर कड़ी आपत्ति जताई।

दक्षिण अफ्रीका के प्रमुख शहर जोहान्सबर्ग में पिछले कुछ महीनों के दौरान अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के आसपास सात महिलाओं के शव बरामद किए गए हैं, जिनमें से पाँच शव महज एक सप्ताह के भीतर मिले। इन घटनाओं ने पूरे दक्षिण अफ्रीका में महिला सुरक्षा और फेमिसाइड को लेकर व्यापक आक्रोश पैदा कर दिया है। देश के उप-राष्ट्रपति पॉल माशातिले ने बुधवार, 17 सितंबर 2026 को एक आधिकारिक बयान जारी कर इन हत्याओं की कड़ी निंदा की।

मुख्य घटनाक्रम

पुलिस के अनुसार 15 जुलाई के बाद से केम्पटन पार्क इलाके में चार महिलाओं के शव बरामद हुए। इन शवों पर चोट के निशान थे और महिलाएँ बेहद कम कपड़ों में मिलीं। इसके बाद सोमवार और मंगलवार को ओलिफैंट्सफोंटेन इलाके में दो और महिलाओं के शव मिले। मंगलवार को केम्पटन पार्क से करीब 25 मील दक्षिण-पूर्व में एक अन्य महिला का शव नग्न अवस्था में और काफी सड़ी हुई स्थिति में बरामद किया गया।

मृतकों में 38 वर्षीया एलिजाबेथ 'त्सोंत्सो' मोसेलाकगोमो भी शामिल हैं, जो 9 सितंबर को दौड़ने के लिए घर से निकली थीं लेकिन वापस नहीं लौटीं। उनके आठ वर्षीय बच्चे ने परिजनों को यह सूचना दी, जिसके बाद तलाश शुरू हुई। उनका शव शनिवार को मिला और सोमवार को परिवार ने उनकी पहचान की।

सरकार की प्रतिक्रिया

उप-राष्ट्रपति माशातिले, जो जस्टिस, क्राइम प्रिवेंशन एंड सिक्योरिटी (जेसीपीएस) क्लस्टर कैबिनेट कमेटी के प्रमुख भी हैं, ने कहा: 'मैं राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा और सभी दक्षिण अफ्रीकी लोगों के साथ मिलकर उन महिलाओं के परिवारों और करीबियों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता हूँ, जिनकी इन भयानक हालात में जान चली गई है।' उन्होंने यह भी कहा: 'हमारे समुदायों में जेंडर-बेस्ड वायलेंस के लिए कोई जगह नहीं है, और सभी पुरुषों को ऐसी हिंसा की निंदा करने और महिलाओं की सुरक्षा करने में सबसे आगे रहना चाहिए।'

राष्ट्रपति रामाफोसा ने मंगलवार को कहा: 'मैंने पुलिस अधिकारियों को इन हत्याओं की जाँच को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया है।' गौरतलब है कि 2025 में व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बाद रामाफोसा ने जेंडर आधारित हिंसा को राष्ट्रीय संकट घोषित किया था।

जाँच की स्थिति

पुलिस ने इन हत्याओं की जाँच के लिए विशेष अधिकारियों को तैनात किया है। जाँचकर्ताओं ने शुरुआत में सीरियल किलर की संभावना भी खंगाली, लेकिन पुलिस प्रवक्ता एथलेंडा माथे ने स्पष्ट किया कि फिलहाल ऐसा कोई ठोस संकेत नहीं है। जुलाई में हुई पहली हत्या के मामले में मृत महिला के प्रेमी को हिरासत में लिया गया है। अन्य मामलों में संदिग्धों की पहचान या लिंग की पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।

आम जनता और महिला संगठनों का आक्रोश

महिला अधिकार समूहों और आम नागरिकों ने पुलिस की उस अपील पर कड़ी आपत्ति जताई है, जिसमें महिलाओं को अकेले न चलने या दौड़ने की सलाह दी गई। महिला अधिकार संगठन विमेन फॉर चेंज ने कहा कि महिलाओं को अपनी सुरक्षा के लिए पहले से ही सावधान रहना पड़ता है। संगठन ने यह भी सवाल उठाया कि महिलाओं के लापता होने और समुदायों द्वारा खोज शुरू करने के बाद ही किसी इलाके में व्यापक तलाशी क्यों होती है।

यह ऐसे समय में आया है जब द गार्डियन के अनुसार दक्षिण अफ्रीका में महिलाओं की हत्या की दर दुनिया में सर्वाधिक दरों में शामिल है। दक्षिण अफ्रीका पुलिस के नवीनतम उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार, 31 मार्च 2024 को समाप्त वर्ष में 27,600 से अधिक हत्याएँ दर्ज की गईं, जिनमें 5,578 पीड़ित महिलाएँ थीं।

मोसेलाकगोमो की विरासत और समुदाय का शोक

मोसेलाकगोमो की असामयिक मृत्यु ने उनके मित्रों और स्थानीय रनिंग क्लबों को गहरे सदमे में डाल दिया है। उनकी स्मृति में दक्षिण अफ्रीका के कई हिस्सों में रनिंग कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उनके मित्रों का कहना है कि वह अपनी बेटी के प्रति बेहद समर्पित थीं और उनकी हत्या ने पूरे समुदाय को झकझोर कर रख दिया है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि 2025 की घोषणा के बावजूद ज़मीन पर प्रभावी कार्रवाई और महिलाओं की सुरक्षा के लिए ठोस उपायों की कमी बनी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि अपराधियों को रोकना। 2024 के आँकड़े — एक साल में 5,578 महिला हत्याएँ — महज संख्या नहीं, बल्कि नीतिगत जवाबदेही की माँग हैं जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नज़रअंदाज़ करती है।
RashtraPress
16 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जोहान्सबर्ग में कितनी महिलाओं के शव मिले और कहाँ मिले?
पिछले कुछ महीनों में जोहान्सबर्ग के अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के आसपास कुल सात महिलाओं के शव बरामद हुए हैं। इनमें केम्पटन पार्क इलाके में चार, ओलिफैंट्सफोंटेन में दो और केम्पटन पार्क से करीब 25 मील दक्षिण-पूर्व में एक शव मिला।
एलिजाबेथ मोसेलाकगोमो कौन थीं और उनके साथ क्या हुआ?
38 वर्षीया एलिजाबेथ 'त्सोंत्सो' मोसेलाकगोमो 9 सितंबर को दौड़ने के लिए घर से निकली थीं लेकिन वापस नहीं लौटीं। उनके आठ वर्षीय बच्चे ने परिजनों को सूचित किया, तलाश के बाद शनिवार को उनका शव मिला और सोमवार को परिवार ने उनकी पहचान की।
क्या पुलिस को इन हत्याओं में कोई सीरियल किलर नज़र आ रहा है?
पुलिस प्रवक्ता एथलेंडा माथे के अनुसार, फिलहाल ऐसा कोई ठोस संकेत नहीं है कि इन हत्याओं के पीछे कोई सीरियल किलर है। जुलाई में हुई पहली हत्या के मामले में मृत महिला के प्रेमी को हिरासत में लिया गया है, जबकि अन्य मामलों में संदिग्धों की पहचान की पुष्टि अभी बाकी है।
दक्षिण अफ्रीका में फेमिसाइड की स्थिति कितनी गंभीर है?
दक्षिण अफ्रीका पुलिस के नवीनतम उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार, 31 मार्च 2024 को समाप्त वर्ष में देश में 27,600 से अधिक हत्याएँ दर्ज की गईं, जिनमें 5,578 पीड़ित महिलाएँ थीं। देश में महिलाओं की हत्या की दर दुनिया में सर्वाधिक दरों में शामिल बताई जाती है।
सरकार ने इन हत्याओं पर क्या कार्रवाई की है?
राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने पुलिस को जाँच को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया है और उप-राष्ट्रपति पॉल माशातिले ने आधिकारिक बयान जारी कर घटनाओं की निंदा की है। हालाँकि सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि 2025 में जेंडर आधारित हिंसा को राष्ट्रीय संकट घोषित करने के बावजूद ज़मीन पर ठोस बदलाव नहीं आया है।
राष्ट्र प्रेस
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