रामफोसा की अफ्रीकी देशों से अपील: कानूनी प्रवास को बढ़ावा दें, विदेशी नागरिकों पर हिंसा बर्दाश्त नहीं
सारांश
मुख्य बातें
दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा ने 28 जुलाई 2026 को जोहान्सबर्ग में अफ्रीकी देशों से एकजुट होकर काम करने की अपील की — ताकि महाद्वीप में लोगों का आवागमन कानूनी, व्यवस्थित और मानवीय गरिमा के अनुरूप हो। उन्होंने यह बात पैन-अफ्रीकी संसद के सातवें कार्यकाल के पहले नियमित सत्र के उद्घाटन के अवसर पर कही। यह बयान ऐसे समय आया है जब दक्षिण अफ्रीका में विदेशी नागरिकों पर हमलों की घटनाओं को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है।
मुख्य घटनाक्रम
रामफोसा ने अपने संबोधन में देश में विदेशी नागरिकों के साथ हुई बदसलूकी और हत्या की घटनाओं पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसी हिंसा के पीछे गलत जानकारी और समाज में फैली भ्रामक धारणाएं भी बड़ी भूमिका निभाती हैं। साथ ही उन्होंने स्वीकार किया कि दक्षिण अफ्रीका के नागरिकों में अवैध प्रवास के सामाजिक और आर्थिक प्रभावों को लेकर वैध चिंताएं हैं।
राष्ट्रपति ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'दक्षिण अफ्रीकी सरकार के तौर पर हमने साफ कहा है कि विदेशी नागरिकों को डराने, कानून अपने हाथ में लेने या उनके खिलाफ किसी भी तरह की हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।' उन्होंने कहा कि आव्रजन व्यवस्था सख्त, निष्पक्ष और प्रभावी होनी चाहिए, लेकिन हर इंसान की गरिमा और कानून का सम्मान भी अनिवार्य है।
प्रवास के मूल कारणों पर जोर
रामफोसा ने अफ्रीकी देशों से उन मूलभूत कारणों को समाप्त करने का आग्रह किया जिनके चलते लोग अपना देश छोड़ने पर मजबूर होते हैं। इनमें संघर्ष, राजनीतिक अस्थिरता, कमजोर शासन व्यवस्था, गरीबी और सामाजिक तनाव प्रमुख हैं। उनका कहना था कि अफ्रीका को हिंसा समाप्त करने, समावेशी सरकारें मजबूत करने और रोजगार व आर्थिक अवसरों का विस्तार करने पर ध्यान केंद्रित करना होगा।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि लोगों का एक देश से दूसरे देश जाना ऐसे तरीके से होना चाहिए जिसमें सभी के अधिकारों और सम्मान की रक्षा हो, अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन हो और सामाजिक सद्भाव बना रहे।
संयुक्त राष्ट्र की प्रतिक्रिया
दक्षिण अफ्रीका में संयुक्त राष्ट्र के रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर नेल्सन मफ्फुह ने कहा कि प्रवास अफ्रीका के इतिहास और विकास का सदियों पुराना हिस्सा रहा है। उन्होंने कहा, 'प्रवास और विस्थापन से जुड़ी चुनौतियों का समाधान लोगों को बदनाम करके, उन्हें अलग-थलग करके या कानून अपने हाथ में लेकर नहीं किया जा सकता। इसके लिए सुदृढ़ सरकारी नीतियां, क्षेत्रीय सहयोग और विधि के शासन का पालन जरूरी है।'
बढ़ती हिंसा की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि पिछले कुछ महीनों में दक्षिण अफ्रीका में विदेशी नागरिकों पर हमलों की घटनाएं बढ़ी हैं। कुछ स्थानों पर प्रवासियों के व्यापारिक प्रतिष्ठानों को जबरन बंद कराया गया, जबकि हिंसा की इन घटनाओं में कई लोगों की जान भी गई। यह स्थिति ऐसे समय में और गंभीर हो गई है जब महाद्वीप में आर्थिक असमानता और बेरोजगारी की समस्याएं गहरी हैं।
आगे की राह
पैन-अफ्रीकी संसद के इस सत्र में उठाए गए मुद्दे महाद्वीपीय स्तर पर प्रवास नीति को नई दिशा देने की कोशिश का हिस्सा हैं। रामफोसा की अपील संकेत देती है कि दक्षिण अफ्रीका आंतरिक कानून प्रवर्तन और क्षेत्रीय कूटनीति — दोनों मोर्चों पर एक साथ काम करने का इरादा रखता है।