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राष्ट्रपति मुर्मु की दक्षिण अफ्रीकी उपराष्ट्रपति माशातिले से मुलाकात, द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने पर ज़ोर

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राष्ट्रपति मुर्मु की दक्षिण अफ्रीकी उपराष्ट्रपति माशातिले से मुलाकात, द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने पर ज़ोर

सारांश

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रपति भवन में दक्षिण अफ्रीका के उपराष्ट्रपति शिपोकोसा पॉलस माशातिले से मुलाकात कर तकनीक, फार्मा, ऊर्जा, MSME और स्किलिंग में जुड़ाव बढ़ाने पर ज़ोर दिया। यह मुलाकात माशातिले की छह दिवसीय भारत यात्रा का हिस्सा है, जिसमें ब्रिक्स और ग्लोबल साउथ के एजेंडे पर साझा रणनीति को नई धार मिली।

मुख्य बातें

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 2 जून को राष्ट्रपति भवन में दक्षिण अफ्रीकी उपराष्ट्रपति शिपोकोसा पॉलस माशातिले से मुलाकात की।
दोनों नेताओं ने तकनीक, फार्मास्यूटिकल्स, ऊर्जा, एमएसएमई और स्किलिंग में सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी माशातिले से मिलकर व्यापार, निवेश, डिजिटल और अवसंरचना पर चर्चा की।
माशातिले 29 मई को नई दिल्ली पहुंचे थे; यात्रा 3 जून को समाप्त होगी।
दोनों देशों ने ब्रिक्स और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर समन्वय बढ़ाने पर सहमति जताई।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 2 जून को राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली में दक्षिण अफ्रीका के उपराष्ट्रपति शिपोकोसा पॉलस माशातिले से मुलाकात की और दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को और बढ़ाने का आह्वान किया। यह बैठक माशातिले की छह दिवसीय भारत यात्रा का हिस्सा रही, जो 29 मई को शुरू हुई और 3 जून को समाप्त होगी।

मुख्य घटनाक्रम

मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने तकनीक, फार्मास्यूटिकल्स, ऊर्जा, स्किलिंग और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) जैसे क्षेत्रों में आपसी जुड़ाव बढ़ाने की अपील की। राष्ट्रपति सचिवालय ने एक्स पर पोस्ट में कहा कि भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच ‘एक खास दोस्ती है जो ऐतिहासिक और समकालीन दोनों है’, और दोनों देश ग्लोबल साउथ की प्रमुख आवाज़ें हैं।

जयशंकर–माशातिले बैठक

इससे पहले विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने मंगलवार को राष्ट्रीय राजधानी में माशातिले से मुलाकात की और व्यापार, निवेश, एमएसएमई, डिजिटल तथा अवसंरचना क्षेत्रों में सहयोग के अवसरों पर चर्चा की। जयशंकर ने एक्स पर लिखा, ‘मैं दीर्घकालिक साझेदारी संबंधों को और गहरा करने की उनकी प्रतिबद्धता की सराहना करता हूं… हम भारत और दक्षिण अफ्रीका को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मिलकर काम करने पर सहमत हुए।’

क्यों मायने रखती है यह यात्रा

यह जुड़ाव ऐसे समय में आया है जब दोनों देश ब्रिक्स के सदस्य के रूप में बहुपक्षीय मंचों पर साझा एजेंडा आगे बढ़ा रहे हैं। दोनों पक्षों ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर समन्वय बढ़ाने पर भी सहमति जताई, जो साझा इतिहास और ग्लोबल साउथ में उनकी भूमिका पर आधारित है। गौरतलब है कि दक्षिण अफ्रीका इस वर्ष G20 की अध्यक्षता कर रहा है, जिसकी कमान पिछले वर्ष भारत के पास थी।

दक्षिण अफ्रीका का दृष्टिकोण

बैठक के बाद माशातिले ने सोशल मीडिया पर लिखा कि दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए कि संबंधों का विस्तार ‘अन्य क्षेत्रों में, खासतौर से आर्थिक संबंधों में’ किया जाना चाहिए। एक अन्य पोस्ट में उन्होंने कहा कि भारत–दक्षिण अफ्रीका संबंध ‘पारस्परिक समृद्धि प्राप्त करने के साथ ही गरीबी, बेरोजगारी और असमानता जैसी चुनौतियों से निपटने की कुंजी हैं’।

आगे क्या

माशातिले की यात्रा 3 जून को समाप्त होगी। दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी के अगले चरण में आर्थिक सहयोग और बहुपक्षीय समन्वय पर ठोस कदम अपेक्षित हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

और MSME व फार्मा पर ज़ोर इस अंतर को पाटने का प्रयास दिखाता है। असली परीक्षा यह है कि क्या ‘रणनीतिक साझेदारी’ की शब्दावली ठोस बाज़ार पहुँच और निवेश प्रवाह में बदलती है, या पिछली कई द्विपक्षीय घोषणाओं की तरह संयुक्त वक्तव्यों तक सीमित रह जाती है।
RashtraPress
18 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राष्ट्रपति मुर्मु और दक्षिण अफ्रीकी उपराष्ट्रपति माशातिले की मुलाकात में क्या हुआ?
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 2 जून को राष्ट्रपति भवन में दक्षिण अफ्रीका के उपराष्ट्रपति शिपोकोसा पॉलस माशातिले से मुलाकात की और द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने पर ज़ोर दिया। दोनों नेताओं ने तकनीक, फार्मास्यूटिकल्स, ऊर्जा, MSME और स्किलिंग जैसे क्षेत्रों में सहयोग गहरा करने का आह्वान किया।
माशातिले की भारत यात्रा कब तक है?
दक्षिण अफ्रीका के उपराष्ट्रपति माशातिले 29 मई को छह दिवसीय यात्रा पर नई दिल्ली पहुंचे थे, जो 3 जून को समाप्त होगी। इस दौरान वह राष्ट्रपति मुर्मु और विदेश मंत्री एस जयशंकर सहित कई शीर्ष नेताओं से मिले।
जयशंकर और माशातिले के बीच किन मुद्दों पर चर्चा हुई?
विदेश मंत्री एस जयशंकर और माशातिले ने व्यापार, निवेश, एमएसएमई, डिजिटल और अवसंरचना क्षेत्रों में सहयोग के अवसरों पर चर्चा की। दोनों पक्षों ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मिलकर काम करने पर सहमति व्यक्त की।
भारत और दक्षिण अफ्रीका के संबंध क्यों अहम हैं?
भारत और दक्षिण अफ्रीका दोनों ब्रिक्स के सदस्य हैं और ग्लोबल साउथ की प्रमुख आवाज़ों के रूप में देखे जाते हैं। दोनों देशों का साझा ऐतिहासिक संघर्ष-काल का जुड़ाव है, और बहुपक्षीय संस्थानों में उनका समन्वय विकासशील देशों के एजेंडे को आगे बढ़ाने में निर्णायक माना जाता है।
दोनों देशों के बीच किन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी?
मुलाकातों में तकनीक, फार्मास्यूटिकल्स, ऊर्जा, स्किलिंग, MSME, डिजिटल और अवसंरचना क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। माशातिले ने आर्थिक संबंधों के विस्तार को विशेष प्राथमिकता बताया।
राष्ट्र प्रेस
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