राष्ट्रपति मुर्मु ने ह्लाइंग को बताया 'अहम साझेदार', भारत-म्यांमार संबंधों को नई दिशा
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 2 जून 2025 को राष्ट्रपति भवन में म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग से मुलाकात की और दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं रणनीतिक संबंधों को और प्रगाढ़ करने पर बल दिया। पाँच दिवसीय भारत यात्रा पर आए ह्लाइंग का यह दौरा द्विपक्षीय सहयोग को नई गति देने की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मुलाकात में क्या बोलीं राष्ट्रपति मुर्मु
राष्ट्रपति मुर्मु ने बैठक के दौरान कहा कि भारत और म्यांमार के बीच साझा बौद्ध विरासत और सदियों पुराने लोगों से लोगों के जुड़ाव (पीपल-टू-पीपल कनेक्ट) ने दोनों देशों की मित्रता को विशेष ऊष्मा दी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, "म्यांमार भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और इसे भारत का दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए प्रवेश द्वार माना जाता है।" राष्ट्रपति के आधिकारिक एक्स हैंडल से भी इस मुलाकात की जानकारी साझा की गई।
PM मोदी से भी हुई अहम बैठक
इससे पहले, राष्ट्रपति ह्लाइंग ने हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि भारत अपने पड़ोसी देशों के साथ सहयोग और साझेदारी को मजबूत करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने रेखांकित किया कि भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' और 'एक्ट ईस्ट' नीति में म्यांमार की विशेष एवं केंद्रीय भूमिका है।
प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि भारत म्यांमार में शांति और संवाद की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में हर संभव सहायता देने को तैयार है। दोनों नेताओं के बीच संघीय शासन व्यवस्था के अनुभव साझा करने और आर्थिक विकास में सहयोग के विषय पर भी चर्चा हुई।
किन क्षेत्रों में हो रही है प्रगति
दोनों देशों के बीच व्यापार, संपर्क (कनेक्टिविटी), क्षमता निर्माण, सुरक्षा सहयोग और विकास परियोजनाओं के क्षेत्र में लगातार प्रगति हो रही है। यह ऐसे समय में आया है जब म्यांमार में आंतरिक संघर्ष की स्थिति के बीच भारत अपनी कूटनीतिक सक्रियता बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। गौरतलब है कि म्यांमार भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के साथ लंबी सीमा साझा करता है, जिससे सुरक्षा और व्यापार दोनों दृष्टि से यह संबंध अत्यंत संवेदनशील है।
यात्रा का रणनीतिक महत्व
विश्लेषकों के अनुसार, ह्लाइंग की यह यात्रा भारत की उस व्यापक कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा है जिसमें वह म्यांमार को चीन के बढ़ते प्रभाव के मद्देनजर अपने करीब रखना चाहता है। यह यात्रा क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। आने वाले दिनों में द्विपक्षीय सहयोग के नए अध्याय खुलने की उम्मीद है।