म्यांमार भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' और 'एक्ट ईस्ट' नीति का अहम स्तंभ: PM मोदी की राष्ट्रपति ह्लाइंग से वार्ता
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार, 2 जून 2025 को नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग के साथ विस्तृत द्विपक्षीय वार्ता की। बैठक के बाद मोदी ने स्पष्ट किया कि म्यांमार भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट', 'एक्ट ईस्ट' और हिंद-प्रशांत नीति का एक अनिवार्य हिस्सा है। दोनों देशों ने समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और कई अन्य क्षेत्रों में संयुक्त सहयोग पर सहमति जताई।
राष्ट्रपति ह्लाइंग की पहली विदेश यात्रा — भारत का सम्मान
उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग ने राष्ट्रपति पद संभालने के बाद अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए भारत को चुना। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "हम भारत में इस बात से सम्मानित महसूस कर रहे हैं कि उन्होंने प्रेसिडेंट के तौर पर अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए भारत को चुना। उतनी ही खुशी की बात यह है कि उन्होंने भगवान बुद्ध के आशीर्वाद के साथ बोधगया से अपनी यात्रा शुरू की।" यह चुनाव भारत-म्यांमार संबंधों की रणनीतिक गहराई को रेखांकित करता है।
वार्ता के प्रमुख बिंदु
हैदराबाद हाउस में हुई इस बैठक में दोनों नेताओं ने व्यापार, रेयर अर्थ्स, हेल्थकेयर, कनेक्टिविटी, हेरिटेज रेस्टोरेशन और कैपेसिटी बिल्डिंग में सहयोग को और गहरा करने के तरीकों पर चर्चा की। मोदी ने एक्स पर लिखा, "हम समुद्री सुरक्षा, साइबर सिक्योरिटी और दूसरे क्षेत्र में मिलकर काम करने पर भी सहमत हुए।" रेयर अर्थ्स का उल्लेख विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि म्यांमार इस क्षेत्र में दुनिया के प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में से एक है और भारत की तकनीकी आपूर्ति श्रृंखला के लिए यह सामरिक दृष्टि से अत्यंत प्रासंगिक है।
शांति प्रक्रिया में भारत की भूमिका
बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि म्यांमार में शांति और संवाद की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए भारत हर तरह की सहायता देने को तैयार है। उन्होंने संघीय शासन व्यवस्था और आर्थिक विकास के क्षेत्र में भारत के अनुभव साझा करने की भी बात कही। यह ऐसे समय में आया है जब म्यांमार आंतरिक संघर्ष और मानवीय संकट से जूझ रहा है, और भारत की यह पहल अपने पड़ोसी के साथ संलग्नता की नीति को दर्शाती है।
विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया
विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक्स पर कहा कि दोनों नेताओं की बातचीत व्यापक रही और दोनों देशों ने शांति, प्रगति और समृद्धि के लिए साझेदारी को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। जायसवाल ने यह भी कहा कि भारत म्यांमार के लिए एक भरोसेमंद पड़ोसी और संकट के समय में पहला सहयोगी है।
आगे की राह
प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत की नेबरहुड फर्स्ट, एक्ट ईस्ट और महासागर नीतियों के अनुरूप भारत हमेशा म्यांमार का सहयोग करता रहेगा। गौरतलब है कि यह वार्ता ऐसे भू-राजनीतिक परिदृश्य में हुई है जब दक्षिण-पूर्व एशिया में चीन का प्रभाव बढ़ रहा है और भारत अपनी पूर्वी सीमाओं पर रणनीतिक संबंधों को मज़बूत करने में जुटा है। दोनों देशों के बीच इस उच्च-स्तरीय जुड़ाव से आने वाले महीनों में ठोस सहयोग समझौतों की उम्मीद है।