17 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

म्यांमार में शांति प्रक्रिया को भारत का पूर्ण समर्थन: PM मोदी और राष्ट्रपति ह्लाइंग की नई दिल्ली में व्यापक वार्ता

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
म्यांमार में शांति प्रक्रिया को भारत का पूर्ण समर्थन: PM मोदी और राष्ट्रपति ह्लाइंग की नई दिल्ली में व्यापक वार्ता

सारांश

म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग की भारत की पहली आधिकारिक यात्रा के दौरान PM मोदी ने शांति प्रक्रिया में पूर्ण सहयोग का भरोसा दिया। हैदराबाद हाउस में हुई वार्ता में व्यापार, सुरक्षा और कनेक्टिविटी पर सहमति बनी — यह 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति की व्यावहारिक अभिव्यक्ति है।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग से हैदराबाद हाउस में विस्तृत द्विपक्षीय वार्ता की।
भारत ने म्यांमार में शांति और संवाद की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में हर संभव सहयोग देने की प्रतिबद्धता जताई।
दोनों देशों ने व्यापार, निवेश, कनेक्टिविटी, सुरक्षा और सीमा प्रबंधन में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।
यह म्यांमार राष्ट्रपति की भारत की पहली आधिकारिक यात्रा है; उनके साथ उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल आया है।
यात्रा से पहले 30 मई को विदेश मंत्री एस.
जयशंकर और NSA अजीत डोभाल ने भी राष्ट्रपति ह्लाइंग से मुलाकात की थी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 जून 2025 को स्पष्ट किया कि भारत, म्यांमार में शांति और संवाद की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए हर संभव सहयोग देने को तैयार है। नई दिल्ली स्थित हैदराबाद हाउस में म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग के साथ हुई विस्तृत द्विपक्षीय बैठक में दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश, संपर्क, विकास साझेदारी, क्षमता निर्माण, सुरक्षा और सीमा प्रबंधन सहित कई क्षेत्रों में सहयोग गहरा करने पर सहमति जताई।

बैठक में क्या हुआ

सोमवार को हैदराबाद हाउस में हुई इस बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने म्यांमार के साथ संघीय शासन व्यवस्था और आर्थिक विकास के अनुभव साझा करने की बात कही। उन्होंने कहा कि भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट', 'एक्ट ईस्ट' और 'महासागर' नीतियों के अनुरूप म्यांमार हमेशा भारत की प्राथमिकता में रहेगा। दोनों देशों ने शांति, प्रगति और समृद्धि के लिए साझेदारी को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि दोनों नेताओं के बीच बातचीत 'व्यापक' रही। उन्होंने कहा कि भारत, म्यांमार के लिए एक भरोसेमंद पड़ोसी और संकट के समय में पहला सहयोगी है। विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि यह यात्रा दोनों देशों के बीच बहुआयामी संबंधों को और गहराई देगी।

यात्रा का व्यापक कार्यक्रम

राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग की यह भारत की पहली आधिकारिक यात्रा है। उनके साथ मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों और व्यापारिक प्रतिनिधियों का उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी आया है। उनका राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से राष्ट्रपति भवन में मुलाकात का कार्यक्रम भी रहा। इसके अलावा, वे राजधानी में 'द लाइट एंड द लोटस: रेलिक्स ऑफ द अवेकेंड वन' नामक सांस्कृतिक प्रदर्शनी का दौरा करने के साथ ही मुंबई में व्यापारिक बैठकों में भी शामिल होंगे।

यात्रा की पृष्ठभूमि

राष्ट्रपति ह्लाइंग ने अपनी भारत यात्रा की शुरुआत बिहार के बोधगया स्थित महाबोधि मंदिर में पूजा-अर्चना से की थी। इससे पहले रविवार को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने उनसे मुलाकात की थी, जबकि 30 मई को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी उनसे बातचीत कर द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने की बात कही थी। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब म्यांमार में आंतरिक संघर्ष और मानवीय संकट को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंताएँ बनी हुई हैं।

आगे की राह

इस यात्रा से भारत-म्यांमार संबंधों में नई गति आने की उम्मीद है। दोनों देशों के बीच व्यापार और कनेक्टिविटी परियोजनाओं पर ठोस प्रगति के लिए आने वाले हफ्तों में उच्चस्तरीय अनुवर्ती बैठकें अपेक्षित हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

दूसरी तरफ पश्चिमी देशों की आलोचना कि भारत म्यांमार में मानवाधिकार उल्लंघनों को नजरअंदाज कर रहा है। शांति और संवाद के लिए 'हर तरह की मदद' का आश्वासन तब तक अधूरा है जब तक उसकी ठोस शर्तें सार्वजनिक न हों। गौरतलब है कि भारत-म्यांमार सीमा पर विद्रोही गतिविधियाँ और शरणार्थी दबाव भारत के लिए भी सुरक्षा चुनौती बने हुए हैं — इसलिए यह यात्रा महज कूटनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि भारत की पूर्वोत्तर सुरक्षा रणनीति का भी हिस्सा है।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM मोदी और म्यांमार राष्ट्रपति की बैठक में क्या तय हुआ?
दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश, कनेक्टिविटी, सुरक्षा और सीमा प्रबंधन में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। PM मोदी ने म्यांमार में शांति और संवाद की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में भारत की ओर से पूर्ण सहयोग का भरोसा दिया।
म्यांमार राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग की भारत यात्रा क्यों महत्वपूर्ण है?
यह म्यांमार राष्ट्रपति की भारत की पहली आधिकारिक यात्रा है, जो दोनों देशों के बीच बहुआयामी संबंधों को नई गहराई देने के लिहाज से महत्वपूर्ण है। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब म्यांमार में आंतरिक संघर्ष और भारत-म्यांमार सीमा पर सुरक्षा चुनौतियाँ बनी हुई हैं।
भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति का म्यांमार से क्या संबंध है?
भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट', 'एक्ट ईस्ट' और 'महासागर' नीतियों के तहत म्यांमार एक प्रमुख पड़ोसी देश है। PM मोदी ने स्पष्ट किया कि इन नीतियों के अनुरूप भारत हमेशा म्यांमार का सहयोग करता रहेगा और संकट के समय में पहला सहयोगी बना रहेगा।
राष्ट्रपति ह्लाइंग की भारत यात्रा का कार्यक्रम क्या रहा?
राष्ट्रपति ह्लाइंग ने यात्रा की शुरुआत बोधगया के महाबोधि मंदिर से की, फिर नई दिल्ली में PM मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। वे 'द लाइट एंड द लोटस' सांस्कृतिक प्रदर्शनी का दौरा करने के साथ ही मुंबई में व्यापारिक बैठकों में भी शामिल होने वाले हैं।
इस यात्रा से पहले भारत और म्यांमार के बीच क्या तैयारी हुई?
यात्रा से पहले 30 मई को विदेश मंत्री एस. जयशंकर और रविवार को NSA अजीत डोभाल ने राष्ट्रपति ह्लाइंग से अलग-अलग मुलाकात कर द्विपक्षीय एजेंडा तय किया। इससे स्पष्ट है कि भारत ने इस यात्रा को कूटनीतिक दृष्टि से उच्च प्राथमिकता दी।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 10 महीने पहले