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मिन आंग ह्लाइंग का भारत दौरा 30 मई से: PM मोदी से मुलाकात, सभ्यतागत व आर्थिक संबंध मजबूत करने पर जोर

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मिन आंग ह्लाइंग का भारत दौरा 30 मई से: PM मोदी से मुलाकात, सभ्यतागत व आर्थिक संबंध मजबूत करने पर जोर

सारांश

म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग 30 मई से 2 जून तक भारत के आधिकारिक दौरे पर हैं। 1 जून को PM मोदी से होने वाली बातचीत में सभ्यतागत संबंध, सीमा सुरक्षा, कनेक्टिविटी और आर्थिक सहयोग केंद्र में रहेंगे — यह दौरा भारत की नेबरहुड फर्स्ट और एक्ट ईस्ट नीति की अहम कड़ी है।

मुख्य बातें

म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग 30 मई को भारत पहुँचेंगे और 2 जून तक रहेंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ह्लाइंग के बीच 1 जून को द्विपक्षीय वार्ता निर्धारित।
दौरे में दिल्ली , बोधगया और मुंबई शामिल; मुंबई में 2 जून को व्यापारिक बैठकें।
विदेश मंत्रालय ने कहा — सभ्यतागत, मैत्रीपूर्ण संबंधों को आगे बढ़ाना प्राथमिकता।
म्यांमार भारत की नेबरहुड फर्स्ट , एक्ट ईस्ट और महासागर नीति के संगम पर है।
अप्रैल में विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ह्लाइंग के शपथ ग्रहण में शामिल हुए थे।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार, 29 मई को नई दिल्ली में साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में पुष्टि की कि म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग आधिकारिक दौरे पर 30 मई को भारत पहुँचेंगे और 2 जून तक यहाँ रहेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ह्लाइंग के बीच 1 जून को द्विपक्षीय वार्ता निर्धारित है, जिसमें दोनों देशों के सभ्यतागत, मैत्रीपूर्ण और आर्थिक संबंधों को और प्रगाढ़ करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

दौरे का कार्यक्रम और मुख्य बिंदु

जायसवाल ने बताया कि राष्ट्रपति ह्लाइंग दिल्ली के अलावा बोधगया और मुंबई भी जाएंगे। 2 जून को मुंबई में वे उद्योग-व्यापार जगत के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे और साइट दौरे में भाग लेंगे। उनके साथ एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल होगा, जिसमें कई कैबिनेट मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और व्यापार जगत के नेता शामिल हैं।

प्रवक्ता ने कहा, 'यह आधिकारिक दौरा है और हम म्यांमार के राष्ट्रपति का स्वागत करने के लिए उत्सुक हैं। दौरे का एक व्यापारिक पहलू भी है, जहाँ इस बात पर जोर दिया जाएगा कि दोनों देश मिलकर अपने आर्थिक संबंधों को कैसे मजबूत कर सकते हैं।'

सीमा सुरक्षा और कनेक्टिविटी पर चर्चा

जब पूछा गया कि सीमा सुरक्षा और कनेक्टिविटी परियोजनाओं पर कितनी बातचीत होगी, तो जायसवाल ने कहा, 'म्यांमार और भारत के बीच संबंधों से जुड़े सभी मुद्दों पर बातचीत होगी और हमारा विचार यह होगा कि हम म्यांमार के साथ अपने सभ्यता से जुड़े, दोस्ताना संबंधों को कैसे आगे बढ़ाएं।' यह टिप्पणी उन अटकलों के बीच आई है जिनमें भारत-म्यांमार सीमा पर सुरक्षा स्थिति और कालादान मल्टी-मोडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट परियोजना जैसे कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स की प्रगति पर ध्यान केंद्रित था।

नीतिगत संदर्भ: नेबरहुड फर्स्ट और एक्ट ईस्ट

विदेश मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में रेखांकित किया कि 'म्यांमार भारत की नेबरहुड फर्स्ट, एक्ट ईस्ट और महासागर नीति के संगम पर स्थित है।' यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब म्यांमार में राजनीतिक परिवर्तन के बाद भारत अपने पड़ोसी देश के साथ संबंधों को नए सिरे से परिभाषित कर रहा है। गौरतलब है कि अप्रैल में विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह राष्ट्रपति के रूप में ह्लाइंग के शपथ ग्रहण समारोह में भाग लेने के लिए म्यांमार गए थे।

10 अप्रैल को एमओएस सिंह ने ह्लाइंग से मुलाकात कर उन्हें PM मोदी का बधाई पत्र सौंपा था और भारत की तीनों नीतियों — नेबरहुड फर्स्ट, एक्ट ईस्ट और महासागर — के तहत सहयोग मजबूत करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की थी।

आगे क्या

यह दौरा भारत-म्यांमार संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच व्यापार, कनेक्टिविटी, सीमा प्रबंधन और सांस्कृतिक सहयोग पर ठोस परिणाम अपेक्षित हैं। मुंबई में व्यापारिक बैठकें दोनों देशों के निजी क्षेत्र के बीच निवेश और वाणिज्यिक साझेदारी की संभावनाओं को भी तलाशेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

कालादान जैसी कनेक्टिविटी परियोजनाएं और चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करना नई दिल्ली की प्राथमिकता है। हालांकि, सवाल यह है कि क्या आर्थिक और सभ्यतागत संबंधों की भाषा म्यांमार के भीतर जारी संघर्ष और मानवीय संकट पर पर्याप्त ध्यान देती है — जो दीर्घकालिक स्थिरता के लिए अनिवार्य है।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग का भारत दौरा कब है?
यू मिन आंग ह्लाइंग 30 मई 2025 को भारत पहुँचेंगे और 2 जून तक रहेंगे। इस दौरान वे दिल्ली, बोधगया और मुंबई का दौरा करेंगे।
PM मोदी और म्यांमार के राष्ट्रपति के बीच बातचीत कब होगी?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग के बीच 1 जून 2025 को द्विपक्षीय वार्ता निर्धारित है। इसमें दोनों देशों के सभ्यतागत, मैत्रीपूर्ण और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा होगी।
इस दौरे में कौन-कौन से मुद्दे उठाए जाएंगे?
विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत-म्यांमार संबंधों से जुड़े सभी मुद्दों पर बातचीत होगी — जिसमें सीमा सुरक्षा, कनेक्टिविटी परियोजनाएं और आर्थिक सहयोग शामिल हैं। दौरे का एक अलग व्यापारिक खंड भी है।
भारत की नेबरहुड फर्स्ट नीति में म्यांमार का क्या स्थान है?
विदेश मंत्रालय के अनुसार, म्यांमार भारत की नेबरहुड फर्स्ट, एक्ट ईस्ट और महासागर नीति के संगम पर स्थित है। इसलिए यह दौरा भारत की क्षेत्रीय कूटनीति के लिए विशेष महत्व रखता है।
इस दौरे की पृष्ठभूमि क्या है?
अप्रैल 2025 में विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह यू मिन आंग ह्लाइंग के राष्ट्रपति पद के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए थे और 10 अप्रैल को उन्हें PM मोदी का बधाई पत्र सौंपा था। यह दौरा उसी कूटनीतिक संवाद की अगली कड़ी है।
राष्ट्र प्रेस
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