14 जुलाई 2026
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ओडिशा पाठ्यपुस्तक घोटाला: क्राइम ब्रांच ने केस नंबर 08/2026 दर्ज किया, कक्षा 1–8 की किताबों में अनियमितताओं की जांच शुरू

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ओडिशा पाठ्यपुस्तक घोटाला: क्राइम ब्रांच ने केस नंबर 08/2026 दर्ज किया, कक्षा 1–8 की किताबों में अनियमितताओं की जांच शुरू

सारांश

ओडिशा में स्कूली किताबों की गड़बड़ी अब सिर्फ प्रशासनिक मामला नहीं रही — मुख्यमंत्री माझी के आदेश पर क्राइम ब्रांच ने आपराधिक केस दर्ज कर लिया है। SCERT के पूर्व निदेशक समेत चार अधिकारी निलंबित, छह पर विभागीय कार्रवाई — और अब बहु-टीम आपराधिक जांच।

मुख्य बातें

ओडिशा क्राइम ब्रांच ने 13 जुलाई 2026 को केस नंबर 08/2026 दर्ज कर कक्षा 1–8 की पाठ्यपुस्तक अनियमितताओं की जांच अपने हाथ में ली।
मामला भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धाराओं 316(5), 201, 3(5) और 61(2) के तहत दर्ज।
शिकायत SCERT निदेशक मधुस्मिता साहू की लिखित शिकायत पर आधारित; डीएसपी नरेंद्र कुमार बेहरा जांच अधिकारी।
SCERT के पूर्व निदेशक और 3 सहायक निदेशक निलंबित; 6 अन्य सहायक निदेशकों पर विभागीय कार्रवाई के आदेश।
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने 11 जुलाई को आपराधिक जांच का आदेश दिया था; पाठ्यपुस्तकों में सैकड़ों त्रुटियाँ मिली थीं।

ओडिशा पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 13 जुलाई 2026 को राज्य के सरकारी स्कूलों में कक्षा 1 से 8 तक की पाठ्यपुस्तकों की तैयारी, मंजूरी और प्रकाशन में कथित अनियमितताओं की जांच आधिकारिक रूप से अपने हाथ में ले ली। केस नंबर 08/2026 दर्ज करते हुए जांच एजेंसी ने स्पष्ट किया कि यह मामला भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धाराओं 316(5), 201, 3(5) और 61(2) के तहत दर्ज किया गया है।

मामला कैसे पहुँचा क्राइम ब्रांच तक

क्राइम ब्रांच के एक आधिकारिक बयान के अनुसार, शिक्षक शिक्षा एवं राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (SCERT) की निदेशक मधुस्मिता साहू की लिखित शिकायत के आधार पर यह केस दर्ज किया गया। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने 11 जुलाई 2026 को SCERT निदेशक को क्राइम ब्रांच के पुलिस अधीक्षक के पास एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए थे। इससे पहले उन्होंने किताबों में गड़बड़ियों के कारणों का पता लगाने के लिए विकास आयुक्त की अध्यक्षता में एक जांच समिति का गठन किया था।

जांच की संरचना और टीमें

मामले की जांच सीआईडी क्राइम ब्रांच के डीएसपी नरेंद्र कुमार बेहरा कर रहे हैं। समग्र निगरानी एसपी, सीआईडी क्राइम ब्रांच के नेतृत्व में की जा रही है। पाठ्यपुस्तकों की तैयारी, मंजूरी, प्रक्रिया और प्रकाशन के विभिन्न पहलुओं की जांच के लिए कई विशेष टीमें गठित की गई हैं।

पहले की कार्रवाई: निलंबन और विभागीय जांच

विकास आयुक्त की समिति की रिपोर्ट के आधार पर SCERT के पूर्व निदेशक और तीन सहायक निदेशकों को निलंबित किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त छह अन्य सहायक निदेशकों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब नई प्रकाशित पाठ्यपुस्तकों में सैकड़ों त्रुटियाँ सामने आने के बाद राज्य सरकार को व्यापक आलोचना का सामना करना पड़ा था।

राजनीतिक प्रतिक्रिया और आगे की राह

विपक्षी दलों ने पाठ्यपुस्तकों में बड़े पैमाने पर गलतियाँ मिलने पर सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठाए थे। आलोचकों का कहना है कि यह चूक पाठ्यपुस्तक तैयार करने की प्रक्रिया में गहरी प्रशासनिक खामियों को उजागर करती है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री माझी ने स्वयं आपराधिक जांच का आदेश देकर यह संकेत दिया है कि मामले को महज प्रशासनिक चूक नहीं माना जाएगा। क्राइम ब्रांच की जांच के नतीजे तय करेंगे कि इस मामले में और कितने अधिकारी जिम्मेदारी के दायरे में आते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन जब तक जांच प्रकाशन प्रक्रिया की संरचनात्मक खामियों को नहीं पकड़ती, भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति से इनकार नहीं किया जा सकता।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओडिशा पाठ्यपुस्तक मामले में क्राइम ब्रांच ने कौन-सा केस दर्ज किया है?
क्राइम ब्रांच ने 13 जुलाई 2026 को केस नंबर 08/2026 दर्ज किया है, जो कक्षा 1 से 8 तक की स्कूली पाठ्यपुस्तकों की तैयारी, मंजूरी और प्रकाशन में कथित अनियमितताओं से संबंधित है। यह मामला भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धाराओं 316(5), 201, 3(5) और 61(2) के तहत दर्ज है।
ओडिशा की स्कूली किताबों में क्या गड़बड़ी मिली थी?
नई प्रकाशित पाठ्यपुस्तकों में सैकड़ों तथ्यात्मक और अन्य त्रुटियाँ सामने आई थीं, जिसके बाद विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधा और राज्य सरकार को भारी आलोचना का सामना करना पड़ा। इसी के बाद मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने पहले जांच समिति और फिर आपराधिक जांच का आदेश दिया।
इस मामले में अब तक किन अधिकारियों पर कार्रवाई हुई है?
विकास आयुक्त की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट के आधार पर SCERT के पूर्व निदेशक और तीन सहायक निदेशकों को निलंबित किया गया है। इसके अलावा छह अन्य सहायक निदेशकों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं।
क्राइम ब्रांच की जांच कौन कर रहा है?
मामले की जांच सीआईडी क्राइम ब्रांच के डीएसपी नरेंद्र कुमार बेहरा कर रहे हैं और समग्र निगरानी एसपी, सीआईडी क्राइम ब्रांच के नेतृत्व में हो रही है। पाठ्यपुस्तक प्रक्रिया के विभिन्न पहलुओं की जांच के लिए कई विशेष टीमें गठित की गई हैं।
मुख्यमंत्री माझी ने इस मामले में क्या कदम उठाए?
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने 11 जुलाई 2026 को पाठ्यपुस्तकों की तैयारी, मंजूरी और प्रकाशन की पूरी प्रक्रिया की आपराधिक जांच कराने के निर्देश दिए। उन्होंने SCERT निदेशक को क्राइम ब्रांच के एसपी के पास एफआईआर दर्ज कराने को कहा और इससे पहले विकास आयुक्त की अध्यक्षता में जांच समिति भी गठित की थी।
राष्ट्र प्रेस
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