ओडिशा पाठ्यपुस्तकों में 1,678 त्रुटियां: CM माझी ने 7 दिन में रिपोर्ट माँगी, दोषियों पर कार्रवाई तय
सारांश
मुख्य बातें
ओडिशा सरकार की स्कूली पाठ्यपुस्तकों में 1,678 त्रुटियां उजागर होने के बाद मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने 17 जून 2025 को भुवनेश्वर के लोक सेवा भवन में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक बुलाई और तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने के साथ-साथ जाँच समिति गठित करने के आदेश दिए। मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) द्वारा जारी बयान के अनुसार, यह बैठक ओडिशा पाठ्यक्रम-2025 के तहत SCERT द्वारा तैयार नई पुस्तकों में पाई गई व्यापक अशुद्धियों के मद्देनज़र बुलाई गई थी।
बैठक में कौन-कौन शामिल हुए
समीक्षा बैठक में स्कूल एवं जन शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड, मुख्य सचिव अनु गर्ग तथा विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी वर्चुअल माध्यम से उपस्थित रहे। बैठक में मुख्यमंत्री ने पाठ्यपुस्तकों में चिन्हित सभी गलतियों को बिना किसी देरी के सुधारने का निर्देश दिया।
उच्चस्तरीय जाँच समिति का गठन
मुख्यमंत्री माझी ने विकास आयुक्त की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति गठित करने का आदेश दिया है। यह समिति इस लापरवाही की जड़ तक जाएगी और त्रुटियों के लिए ज़िम्मेदार अधिकारियों या एजेंसियों की पहचान करेगी। समिति को सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है, जिसके आधार पर दोषी अधिकारियों या संस्थाओं के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
किन कक्षाओं में कितनी त्रुटियां
रिपोर्टों के अनुसार, ओडिशा पाठ्यक्रम-2025 के तहत SCERT द्वारा कक्षा 1 से 8 तक के लिए तैयार नई पाठ्यपुस्तकों में कुल 1,678 त्रुटियां पाई गई हैं। इनमें सर्वाधिक 705 गलतियां अकेले कक्षा 8 की पुस्तकों में दर्ज की गई हैं। कक्षा 8 की 'जिज्ञासा' पुस्तक में 294, संस्कृत में 114, सामाजिक विज्ञान में 25, साहित्य में 31 तथा अंग्रेज़ी और गणित की पुस्तकों में भी कई गंभीर अशुद्धियाँ पाई गई हैं। गौरतलब है कि ये पुस्तकें इसी शैक्षणिक सत्र में लाखों विद्यार्थियों के हाथों में पहुँच चुकी हैं।
विपक्ष की तीखी प्रतिक्रिया
इस मुद्दे पर बीजू जनता दल (BJD) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) ने राज्य की भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर तीखा हमला बोला है। विपक्ष का आरोप है कि नई ओड़िया पाठ्यपुस्तकों में इतनी बड़ी संख्या में हुई गलतियाँ राज्य की शिक्षा व्यवस्था के गिरते स्तर को उजागर करती हैं। दोनों दलों ने स्कूल एवं जन शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड के इस्तीफे की माँग करते हुए सरकार से सार्वजनिक रूप से माफ़ी माँगने की भी अपील की है।
आगे क्या होगा
मुख्यमंत्री माझी ने स्पष्ट किया है कि शैक्षणिक सामग्री में उच्च स्तर की शुद्धता और गुणवत्ता बनाए रखना अनिवार्य है। जाँच समिति की रिपोर्ट आने के बाद दोषी पक्षों के विरुद्ध कार्रवाई की रूपरेखा स्पष्ट होगी। यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि क्या सरकार SCERT की कार्यप्रणाली में दीर्घकालिक सुधार के लिए कोई संस्थागत ढाँचा भी प्रस्तावित करती है।