ओडिशा पाठ्यपुस्तक विवाद: मुख्यमंत्री माझी ने क्राइम ब्रांच जांच के दिए आदेश, SCERT निदेशक समेत 4 निलंबित
सारांश
मुख्य बातें
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने 11 जुलाई 2025 को राज्य की कक्षा 1 से 8 तक की स्कूली पाठ्यपुस्तकों में पाई गई गंभीर त्रुटियों के मामले में क्राइम ब्रांच से आपराधिक जांच कराने के आदेश दिए हैं। सरकार का कहना है कि इन गलतियों का सीधा असर लाखों विद्यार्थियों की शैक्षणिक गुणवत्ता पर पड़ सकता है, इसलिए दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
एफआईआर और आपराधिक जांच का आदेश
मुख्यमंत्री माझी ने स्टेट काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (SCERT) के निदेशक को निर्देश दिया है कि वे क्राइम ब्रांच के पुलिस अधीक्षक (SP) के समक्ष औपचारिक प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज कराएं। इसके बाद क्राइम ब्रांच पाठ्यपुस्तकों की तैयारी, संपादन, प्रूफरीडिंग और प्रकाशन की पूरी प्रक्रिया की विस्तृत आपराधिक जांच करेगी।
अधिकारियों के अनुसार, जांच के दौरान संबंधित दस्तावेज़ों, निर्णय-प्रक्रिया और अधिकारियों की व्यक्तिगत भूमिका का परीक्षण किया जाएगा। यदि जानबूझकर लापरवाही, कर्तव्य में गंभीर चूक या अन्य अनियमितताएं सामने आती हैं, तो कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई होगी।
उच्चस्तरीय समिति की रिपोर्ट और प्रशासनिक कार्रवाई
इससे पहले मुख्यमंत्री ने मामले की प्रारंभिक जांच के लिए विकास आयुक्त (Development Commissioner) की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित की थी। समिति को यह जिम्मेदारी दी गई थी कि वह पाठ्यपुस्तक निर्माण की हर कड़ी में हुई लापरवाही और जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान करे।
समिति की रिपोर्ट सामने आने के बाद सरकार ने तत्काल प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए SCERT के पूर्व निदेशक और तीन सहायक निदेशकों को निलंबित कर दिया। इसके अतिरिक्त, छह अन्य सहायक निदेशकों के विरुद्ध कथित भूमिका के आधार पर विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने के आदेश जारी किए गए हैं।
आम विद्यार्थियों पर असर
राज्य सरकार के अनुसार, पाठ्यपुस्तकों में हुई त्रुटियों का सीधा प्रभाव कक्षा 1 से 8 तक पढ़ने वाले लाखों बच्चों की शिक्षा पर पड़ सकता है। गौरतलब है कि प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर पाठ्यपुस्तकें बच्चों की बुनियादी अवधारणाओं को आकार देती हैं, इसलिए उनमें तथ्यात्मक या भाषाई गलतियाँ दीर्घकालिक शैक्षणिक नुकसान का कारण बन सकती हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में स्कूली पाठ्यक्रम की गुणवत्ता को लेकर बहस तेज है और राज्य सरकारें शिक्षा के मानकों पर अधिक जवाबदेही की दिशा में कदम उठा रही हैं।
सरकार का रुख और आगे की राह
ओडिशा सरकार ने स्पष्ट किया है कि शिक्षा की गुणवत्ता और विद्यार्थियों के हितों से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा। अब मामला केवल विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा — आपराधिक जांच का आदेश यह संकेत देता है कि सरकार इसे प्रशासनिक चूक से आगे बढ़कर संभावित आपराधिक लापरवाही के रूप में देख रही है। क्राइम ब्रांच की जांच पूरी होने के बाद दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की दिशा तय होगी।