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ओडिशा स्कूली किताबों में 1,678 गलतियाँ: CM माझी ने बनाई उच्चस्तरीय जाँच समिति, 7 दिन में माँगी रिपोर्ट

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ओडिशा स्कूली किताबों में 1,678 गलतियाँ: CM माझी ने बनाई उच्चस्तरीय जाँच समिति, 7 दिन में माँगी रिपोर्ट

सारांश

ओडिशा की नई स्कूली किताबों में 1,678 गलतियाँ — और कक्षा 8 में अकेले 705। CM माझी ने 7 दिन में रिपोर्ट माँगी है। सवाल यह है कि ओडिशा पाठ्यचर्या 2025 की किताबें बिना पर्याप्त जाँच के लाखों बच्चों तक कैसे पहुँच गईं।

मुख्य बातें

CM मोहन चरण माझी के निर्देश पर 18 जून 2026 को उच्चस्तरीय जाँच समिति गठित।
ओडिशा पाठ्यचर्या 2025 के तहत कक्षा 1 से 8 की नई पाठ्यपुस्तकों में कुल 1,678 त्रुटियाँ चिह्नित।
सर्वाधिक 705 गलतियाँ कक्षा 8 की पुस्तकों में — 'जिज्ञासा' में 294 , संस्कृत में 114 ।
समिति की अध्यक्षता विकास आयुक्त देवरंजन कुमार सिंह करेंगे; 7 दिनों में रिपोर्ट सौंपनी होगी।
जिम्मेदार अधिकारियों और संस्थाओं की पहचान कर सख्त कार्रवाई के निर्देश।

ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के कड़े निर्देश के बाद 18 जून 2026 को राज्य सरकार ने कक्षा 1 से 8 तक की नई स्कूली पाठ्यपुस्तकों में पाई गई 1,678 त्रुटियों की जाँच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित की है। ओडिशा पाठ्यचर्या 2025 के तहत तैयार इन पुस्तकों में मिली खामियों ने लाखों विद्यार्थियों की पढ़ाई को प्रभावित किया है।

समिति का गठन और संरचना

मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, इस समिति की अध्यक्षता विकास आयुक्त एवं अतिरिक्त मुख्य सचिव देवरंजन कुमार सिंह करेंगे। ओड़िया भाषा, साहित्य एवं संस्कृति विभाग के सचिव विजय केतन उपाध्याय और सामान्य प्रशासन एवं लोक शिकायत विभाग की उप सचिव स्मिता पाणि इसमें सदस्य के रूप में शामिल हैं। समिति को सात दिनों के भीतर अपनी जाँच रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।

कितनी और कहाँ हैं गलतियाँ

रिपोर्टों के अनुसार, राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), ओडिशा द्वारा तैयार नई पाठ्यपुस्तकों में कुल 1,678 त्रुटियाँ चिह्नित की गई हैं। इनमें सर्वाधिक 705 गलतियाँ कक्षा 8 की पुस्तकों में मिली हैं — जिनमें 'जिज्ञासा' पुस्तक में 294, संस्कृत में 114, सामाजिक विज्ञान में 25 और साहित्य में 31 त्रुटियाँ शामिल हैं। इसके अलावा अंग्रेजी और गणित की पुस्तकों में भी महत्वपूर्ण खामियाँ सामने आई हैं।

गौरतलब है कि ये पुस्तकें ओडिशा पाठ्यचर्या 2025 के नए ढाँचे के तहत पहली बार लागू की गई थीं, जिससे यह मामला और भी संवेदनशील हो जाता है।

मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठक

मुख्यमंत्री माझी ने बुधवार को इस मुद्दे की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक बुलाई, जिसमें स्कूल एवं जनशिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड, मुख्य सचिव अनु गर्ग और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी वर्चुअल माध्यम से जुड़े। बैठक में उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि सभी चिह्नित गलतियों को तत्काल सुधारा जाए और लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों या संस्थानों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए।

माझी ने कहा कि शैक्षणिक सामग्री में शुद्धता और गुणवत्ता का सर्वोच्च स्तर बनाए रखना अनिवार्य है और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

जाँच समिति का दायरा

समिति यह निर्धारित करेगी कि छपाई संबंधी ये त्रुटियाँ किस स्तर पर — सामग्री निर्माण, संपादन, प्रूफरीडिंग या मुद्रण — में हुईं। इसके साथ ही लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और संस्थाओं की पहचान कर उन पर उचित कार्रवाई की अनुशंसा भी समिति की रिपोर्ट का हिस्सा होगी।

आगे क्या होगा

समिति की रिपोर्ट आने के बाद राज्य सरकार सुधारात्मक कदम उठाएगी। शैक्षणिक सत्र जारी रहने के बीच यह देखना अहम होगा कि त्रुटियुक्त पुस्तकों का विकल्प छात्रों तक कितनी जल्दी पहुँचाया जाता है। यह मामला ओडिशा में शैक्षणिक सामग्री की गुणवत्ता नियंत्रण प्रक्रिया पर गहरे सवाल खड़े करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

678 त्रुटियाँ कोई मामूली प्रूफरीडिंग चूक नहीं हैं — यह उस पूरी प्रक्रिया की विफलता है जिसके तहत ओडिशा पाठ्यचर्या 2025 की किताबें बिना पर्याप्त गुणवत्ता जाँच के लाखों बच्चों तक पहुँचा दी गईं। असली सवाल यह है कि SCERT के संपादकीय और प्रूफरीडिंग तंत्र ने इतने बड़े पैमाने पर खामियाँ क्यों नहीं पकड़ीं। सात दिन की समयसीमा राजनीतिक तत्परता दर्शाती है, लेकिन जब तक रिपोर्ट में जवाबदेही तय नहीं होती और प्रक्रिया में संरचनात्मक सुधार नहीं होता, अगले सत्र में भी यही दोहराने का जोखिम बना रहेगा।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओडिशा स्कूली पाठ्यपुस्तकों में कितनी और किस तरह की गलतियाँ पाई गई हैं?
रिपोर्टों के अनुसार ओडिशा पाठ्यचर्या 2025 के तहत SCERT द्वारा तैयार कक्षा 1 से 8 की नई पाठ्यपुस्तकों में कुल 1,678 त्रुटियाँ पाई गई हैं। इनमें सर्वाधिक 705 गलतियाँ कक्षा 8 की पुस्तकों में हैं, जिनमें 'जिज्ञासा' में 294, संस्कृत में 114, सामाजिक विज्ञान में 25 और साहित्य में 31 त्रुटियाँ शामिल हैं।
जाँच समिति में कौन शामिल हैं और उसे क्या करना है?
समिति की अध्यक्षता विकास आयुक्त एवं अतिरिक्त मुख्य सचिव देवरंजन कुमार सिंह कर रहे हैं। इसमें ओड़िया भाषा विभाग के सचिव विजय केतन उपाध्याय और उप सचिव स्मिता पाणि सदस्य हैं। समिति गलतियों के स्तर और जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान कर सात दिनों में रिपोर्ट सौंपेगी।
CM माझी ने इस मामले में क्या कदम उठाए हैं?
मुख्यमंत्री माझी ने बुधवार को उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक बुलाई, जिसमें स्कूल मंत्री नित्यानंद गोंड और मुख्य सचिव अनु गर्ग भी शामिल हुए। उन्होंने सभी गलतियाँ तत्काल सुधारने और जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए।
इन गलतियों से छात्रों पर क्या असर पड़ रहा है?
कक्षा 1 से 8 तक के छात्रों की पढ़ाई इन त्रुटियुक्त पुस्तकों से प्रभावित हो रही है। ओडिशा पाठ्यचर्या 2025 के तहत ये पुस्तकें नए सत्र में पहली बार लागू की गई थीं, इसलिए बड़े पैमाने पर विद्यार्थी गलत सामग्री पढ़ रहे हैं।
जाँच रिपोर्ट के बाद आगे क्या होगा?
समिति की सात दिन में रिपोर्ट आने के बाद राज्य सरकार सुधारात्मक कदम उठाएगी और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी। त्रुटियुक्त पुस्तकों को सुधारकर छात्रों तक पहुँचाने की समयसीमा अभी घोषित नहीं की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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