3 जुलाई 2026
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ओडिशा पाठ्यपुस्तक विवाद: SCERT ने संशोधित किताबें वेबसाइट पर डालीं, 7 दिन में माँगे सुझाव

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ओडिशा पाठ्यपुस्तक विवाद: SCERT ने संशोधित किताबें वेबसाइट पर डालीं, 7 दिन में माँगे सुझाव

सारांश

ओडिशा में NEP 2020 के तहत तैयार पाठ्यपुस्तकों में 1,678 गलतियाँ मिलने के बाद SCERT ने संशोधित किताबें वेबसाइट पर डालीं और 7 दिन में जनता से सुझाव माँगे। सात अधिकारी निलंबित, छह पर अनुशासनात्मक कार्रवाई — यह मामला राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

मुख्य बातें

ओडिशा SCERT ने 3 जुलाई 2026 को कक्षा 1 से 8 की संशोधित पाठ्यपुस्तकें सार्वजनिक समीक्षा के लिए वेबसाइट पर अपलोड कीं।
नई किताबों में कुल 1,678 तथ्यात्मक, टाइपिंग और प्रिंटिंग त्रुटियाँ पाई गई थीं।
सुझाव व्हाट्सएप 7008546111 या हेल्पलाइन 18003456722 पर 7 दिनों के भीतर भेजे जा सकते हैं।
टीचर ट्रेनिंग और OSEPA के पूर्व निदेशक सहित 4 अधिकारी और 3 सहायक निदेशक निलंबित ; 6 अन्य पर अनुशासनात्मक कार्रवाई।
स्कूल और जन शिक्षा सचिव एन.
तिरुमाला नायक ने कहा — समीक्षा के बाद ही किताबों का अंतिम प्रकाशन होगा।

ओडिशा के स्टेट काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (SCERT) ने 3 जुलाई 2026 को कक्षा 1 से 8 तक की संशोधित पाठ्यपुस्तकों की डिजिटल प्रतियाँ सार्वजनिक समीक्षा के लिए अपनी वेबसाइट पर अपलोड कर दीं और सभी हितधारकों से सात दिनों के भीतर प्रतिक्रिया देने का आग्रह किया। यह कदम उन 1,678 तथ्यात्मक, टाइपिंग और प्रिंटिंग संबंधी त्रुटियों के उजागर होने के बाद उठाया गया है जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत 2026-27 शैक्षणिक सत्र के लिए तैयार की गई नई किताबों में पाई गई थीं।

क्या है पूरा मामला

NEP 2020 के अनुरूप तैयार की जा रही नई पाठ्यपुस्तकों में बड़े पैमाने पर गलतियाँ सामने आने के बाद राज्यभर में नाराज़गी फैल गई थी। रिपोर्टों के अनुसार, कक्षा 1 से 8 तक की किताबों में कुल 1,678 गलतियाँ — जिनमें तथ्यात्मक भूलें, भाषाई त्रुटियाँ और मुद्रण-संबंधी खामियाँ शामिल हैं — चिह्नित की गईं। गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में उभरा जब राज्य सरकार शिक्षा सुधार को अपनी प्राथमिकताओं में गिना रही है।

सार्वजनिक भागीदारी की प्रक्रिया

SCERT ने एक सार्वजनिक सूचना जारी कर शिक्षकों, शिक्षाविदों, अभिभावकों, छात्रों और आम नागरिकों से अपील की है कि वे किताबों में पाई गई किसी भी प्रकार की कमी — चाहे तथ्यात्मक हो, भाषाई हो या मुद्रण से जुड़ी हो — की सूचना दें। सुझाव ईमेल या व्हाट्सएप नंबर 7008546111 पर भेजे जा सकते हैं। इसके अतिरिक्त विद्या समीक्षा केंद्र की हेल्पलाइन 18003456722 भी सक्रिय की गई है। स्कूल और जन शिक्षा विभाग तथा ओडिशा स्कूल शिक्षा कार्यक्रम प्राधिकरण (OSEPA) की वेबसाइटों पर डिजिटल प्रतियाँ उपलब्ध हैं।

सरकार की प्रतिक्रिया और कार्रवाई

मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। टीचर ट्रेनिंग विभाग और OSEPA के पूर्व निदेशक सहित चार अधिकारियों और तीन सहायक निदेशकों को निलंबित कर दिया गया है। इसके अलावा छह अन्य अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई भी प्रारंभ की गई है।

स्कूल और जन शिक्षा सचिव एन. तिरुमाला नायक ने स्पष्ट किया कि प्राप्त सभी सुझावों और आपत्तियों की समीक्षा के बाद ही पाठ्यपुस्तकों को अंतिम रूप दिया जाएगा। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि जब तक संशोधित और अंतिम पुस्तकें उपलब्ध नहीं होतीं, तब तक शिक्षकों और छात्रों को सही जानकारी अलग से उपलब्ध कराई जाएगी ताकि पठन-पाठन बाधित न हो।

आम जनता और छात्रों पर असर

यह विवाद सीधे तौर पर कक्षा 1 से 8 तक के लाखों विद्यार्थियों और उनके परिवारों को प्रभावित करता है। त्रुटिपूर्ण पाठ्यसामग्री से बच्चों की बुनियादी शिक्षा पर पड़ने वाले दीर्घकालिक प्रभाव को लेकर शिक्षाविद् चिंतित हैं। सरकार का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य प्राथमिक स्तर के छात्रों को सटीक और त्रुटिरहित अध्ययन सामग्री सुनिश्चित करना है।

आगे क्या होगा

सात दिनों की समीक्षा अवधि समाप्त होने के बाद SCERT प्राप्त सुझावों को संकलित कर पाठ्यपुस्तकों में आवश्यक संशोधन करेगा। इसके बाद ही किताबों का अंतिम प्रकाशन किया जाएगा। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस पारदर्शी सार्वजनिक समीक्षा प्रक्रिया से भविष्य में ऐसी चूकों को रोकने में मदद मिल सकती है, बशर्ते जवाबदेही तंत्र को और मज़बूत किया जाए।

संपादकीय दृष्टिकोण

678 त्रुटियों वाली पाठ्यपुस्तकें छापना और फिर जनता से गलतियाँ ढूँढने को कहना — यह पारदर्शिता कम, व्यवस्था की विफलता का स्वीकारोक्ति अधिक है। निलंबन दंडात्मक संकेत देता है, लेकिन असली सवाल यह है कि NEP 2020 लागू करने की जल्दबाज़ी में गुणवत्ता-जाँच की कितनी परतें चूक गईं। सात दिन की समय-सीमा में लाखों अभिभावकों और शिक्षकों की सार्थक भागीदारी संदिग्ध है। जब तक पाठ्यपुस्तक निर्माण प्रक्रिया में संस्थागत सुधार नहीं होता, यह 'सार्वजनिक समीक्षा' एक औपचारिकता बनकर रह जाएगी।
RashtraPress
3 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओडिशा पाठ्यपुस्तक विवाद क्या है?
NEP 2020 के तहत 2026-27 शैक्षणिक सत्र के लिए तैयार ओडिशा की कक्षा 1 से 8 तक की नई पाठ्यपुस्तकों में 1,678 तथ्यात्मक, टाइपिंग और प्रिंटिंग त्रुटियाँ पाई गईं, जिससे राज्यभर में नाराज़गी फैल गई। इसके बाद सरकार ने अधिकारियों को निलंबित किया और संशोधित किताबों की सार्वजनिक समीक्षा शुरू की।
SCERT ओडिशा ने किताबों पर सुझाव कैसे और कहाँ भेजें?
सुझाव व्हाट्सएप नंबर 7008546111 या विद्या समीक्षा केंद्र की हेल्पलाइन 18003456722 पर भेजे जा सकते हैं। संशोधित किताबों की डिजिटल प्रतियाँ स्कूल और जन शिक्षा विभाग तथा OSEPA की वेबसाइटों पर उपलब्ध हैं। सुझाव देने की अंतिम तिथि घोषणा से 7 दिनों के भीतर है।
ओडिशा पाठ्यपुस्तक मामले में किन अधिकारियों पर कार्रवाई हुई?
टीचर ट्रेनिंग विभाग और ओडिशा स्कूल शिक्षा कार्यक्रम प्राधिकरण (OSEPA) के पूर्व निदेशक सहित चार अधिकारियों और तीन सहायक निदेशकों को निलंबित किया गया है। इसके अतिरिक्त छह अन्य अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई है।
संशोधित पाठ्यपुस्तकें कब तक अंतिम रूप लेंगी?
स्कूल और जन शिक्षा सचिव एन. तिरुमाला नायक के अनुसार, सात दिनों की समीक्षा अवधि में प्राप्त सभी सुझावों और आपत्तियों पर विचार करने के बाद ही किताबों को अंतिम रूप दिया जाएगा। तब तक शिक्षकों और छात्रों को सही जानकारी अलग से उपलब्ध कराई जाएगी।
इस विवाद से किन छात्रों पर असर पड़ेगा?
यह विवाद ओडिशा के कक्षा 1 से 8 तक के लाखों विद्यार्थियों को प्रभावित करता है, जिनके लिए ये किताबें 2026-27 शैक्षणिक सत्र में लागू होनी थीं। त्रुटिपूर्ण सामग्री से बच्चों की बुनियादी शिक्षा प्रभावित न हो, इसलिए सरकार ने अंतिम प्रकाशन तक वैकल्पिक सामग्री उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है।
राष्ट्र प्रेस
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