एनसीईआरटी किताबों की कमी पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की समीक्षा बैठक, 'लास्ट माइल डिलीवरी' पर सख्त निर्देश
सारांश
Key Takeaways
- केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 28 अप्रैल 2026 को एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तकों की उपलब्धता और वितरण की उच्चस्तरीय समीक्षा की।
- विशेष रूप से कक्षा 9 के छात्रों को कई विषयों की किताबें समय पर नहीं मिल पाई हैं, जिससे पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
- किताबों की कमी दिल्ली सहित बड़े शहरों और ग्रामीण-दूरदराज दोनों क्षेत्रों में देखी गई।
- मंत्री ने सप्लाई चेन मजबूत करने, छपाई क्षमता बढ़ाने और 'लास्ट माइल डिलीवरी' की कड़ी निगरानी के निर्देश दिए।
- अंतरिम उपाय के रूप में ई-पाठशाला प्लेटफॉर्म के जरिए डिजिटल पाठ्यपुस्तकों के उपयोग को बढ़ावा देने पर जोर।
- बैठक में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव संजय कुमार सहित शिक्षा मंत्रालय और एनसीईआरटी के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मंगलवार, 28 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली में एनसीईआरटी (राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद) की पाठ्यपुस्तकों की उपलब्धता, छपाई और वितरण व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की। नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के बाद देशभर में — विशेषकर कक्षा 9 के विद्यार्थियों के बीच — किताबों की कमी की शिकायतें सामने आने के बाद यह बैठक बुलाई गई। मंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि आपूर्ति में किसी भी देरी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
बैठक में कौन-कौन शामिल रहे
इस उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव संजय कुमार सहित शिक्षा मंत्रालय और एनसीईआरटी के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पुस्तकों के स्टॉक की स्थिति का आकलन किया गया और वितरण एजेंसियों तथा राज्य सरकारों के बीच समन्वय की समीक्षा भी की गई।
किताबों की कमी का दायरा कितना बड़ा
पाठ्यपुस्तकों की यह किल्लत केवल ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों तक सीमित नहीं है — दिल्ली जैसे महानगरों में भी अभिभावक और छात्र परेशान हैं। कक्षा 9 के विद्यार्थियों को कई विषयों की किताबें समय पर नहीं मिल पाई हैं, जिससे उनकी पढ़ाई की गति प्रभावित हो रही है। कुछ पुस्तकों की आपूर्ति हाल के दिनों में शुरू हुई है, लेकिन बड़ी संख्या में छात्र अभी भी जरूरी किताबों का इंतजार कर रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब देश के विभिन्न हिस्सों में नया शैक्षणिक सत्र पहले ही शुरू हो चुका है।
मंत्री के निर्देश और आगे की कार्ययोजना
धर्मेंद्र प्रधान ने अधिकारियों को तीन प्रमुख निर्देश दिए — पहला, सप्लाई चेन को और मजबूत बनाना; दूसरा, जरूरत पड़ने पर छपाई क्षमता बढ़ाना; और तीसरा, 'लास्ट माइल डिलीवरी' की निगरानी को सख्त करना। खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों तक समय पर किताबें पहुंचाने पर विशेष जोर दिया गया। बैठक में आगामी एनसीईआरटी पुस्तकों की तैयारी की समीक्षा भी की गई।
डिजिटल माध्यम बनेगा अस्थायी सहारा
मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक सभी छात्रों तक भौतिक पुस्तकें नहीं पहुंच जातीं, तब तक ई-पाठशाला प्लेटफॉर्म के जरिए उपलब्ध डिजिटल पाठ्यपुस्तकों के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। सरकार का कहना है कि वह इस मुद्दे को प्राथमिकता के आधार पर देख रही है। गौरतलब है कि एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तकों की आपूर्ति की समस्या पहली बार नहीं उठी है — पिछले कई शैक्षणिक सत्रों में भी वितरण में देरी की शिकायतें सामने आती रही हैं, जिससे यह सवाल उठता है कि दीर्घकालिक समाधान के लिए व्यवस्थागत बदलाव कब होगा।