30 अप्रैल का पंचांग: नरसिंह जयंती पर रवि योग का शुभ संयोग, रात 9:12 बजे से भद्रा का साया
सारांश
Key Takeaways
- 30 अप्रैल 2026 (गुरुवार) को नरसिंह जयंती और छिन्नमस्ता जयंती का पावन संयोग।
- तिथि चतुर्दशी है; रात 9 बजकर 12 मिनट के बाद पूर्णिमा प्रारंभ।
- रवि योग सुबह 5:42 से रात 2:16 तक — दान, पूजा और शुभ कार्यों के लिए अत्यंत शुभ।
- अमृत काल शाम 7:20 से रात 9:04 तक; ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:16 से 4:49 तक।
- भद्रा रात 9:12 से अगले दिन सुबह 5:42 तक; राहुकाल दोपहर 1:59 से 3:38 तक।
नई दिल्ली: 30 अप्रैल 2026 (गुरुवार) का दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस दिन नरसिंह जयंती और छिन्नमस्ता जयंती का पावन संयोग है, साथ ही रवि योग के शुभ संकेत भी हैं। दृक पंचांग के अनुसार, दिन की तिथि चतुर्दशी है और रात 9 बजकर 12 मिनट के बाद पूर्णिमा का प्रारंभ होगा।
गुरुवार का धार्मिक महत्व
गुरुवार का दिन भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु को पीले वस्त्र अर्पित करने की परंपरा है और मनोकामना पूर्ति के लिए व्रत तथा अनुष्ठान किए जाते हैं। नरसिंह जयंती के अवसर पर भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार की विशेष पूजा-अर्चना का विधान है। यह दिन भक्तों के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर माना जाता है।
शुभ मुहूर्त का विवरण
दृक पंचांग के अनुसार, 30 अप्रैल को निम्नलिखित शुभ मुहूर्त रहेंगे:
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4 बजकर 16 मिनट से 4 बजकर 49 मिनट तक। यह समय ध्यान, योग और आध्यात्मिक साधना के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।
गोधूलि मुहूर्त: शाम 6 बजकर 55 मिनट से 7 बजकर 15 मिनट तक। इस काल में पूजा-पाठ और शुभ कार्य अत्यंत फलदायी होते हैं।
अमृत काल: शाम 7 बजकर 20 मिनट से रात 9 बजकर 4 मिनट तक। अमृत काल को हिंदू पंचांग में सर्वाधिक शुभ समय माना जाता है।
रवि योग का विशेष महत्व
गुरुवार को रवि योग सुबह 5 बजकर 42 मिनट से रात 2 बजकर 16 मिनट तक रहेगा। पंचांग शास्त्र के अनुसार, रवि योग में सूर्य और चंद्रमा के नक्षत्रों की स्थिति अत्यंत अनुकूल होती है, जिससे यह योग अत्यंत शुभ फलदायी बनता है। मान्यता है कि इस मुहूर्त में किए गए कार्य सफल होते हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। विशेष रूप से इस काल में किया गया दान अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है।
अशुभ काल और भद्रा का साया
शुभ मुहूर्तों के साथ-साथ 30 अप्रैल को कई अशुभ काल भी रहेंगे, जिनमें महत्वपूर्ण कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है:
राहुकाल: दोपहर 1 बजकर 59 मिनट से 3 बजकर 38 मिनट तक। गुलिक काल: सुबह 9 बजकर 1 मिनट से 10 बजकर 40 मिनट तक। वर्ज्य: सुबह 8 बजकर 56 मिनट से 10 बजकर 40 मिनट तक। यमगण्ड काल: सुबह 5 बजकर 42 मिनट से 7 बजकर 22 मिनट तक। दुर्मुहूर्त: सुबह 10 बजकर 7 मिनट से 10 बजे तक।
इसके अतिरिक्त, रात 9 बजकर 12 मिनट से अगले दिन सुबह 5 बजकर 42 मिनट तक भद्रा का साया रहेगा। भद्रा काल में विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्यों से परहेज करने की परंपरागत मान्यता है। इस प्रकार, 30 अप्रैल का दिन शुभ और अशुभ दोनों पक्षों का अनूठा संगम है — भक्तजन रवि योग और अमृत काल का लाभ उठाते हुए नरसिंह जयंती की उपासना कर सकते हैं।