PM मोदी ने काशी विश्वनाथ में पूजा के बाद ₹36,230 करोड़ के गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया, 12 जिले जुड़े
सारांश
Key Takeaways
- PM नरेंद्र मोदी ने 29 अप्रैल को ₹36,230 करोड़ की लागत से बने 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे का हरदोई में उद्घाटन किया।
- एक्सप्रेसवे 6-लेन, एक्सेस-नियंत्रित ग्रीनफील्ड कॉरिडोर है जो उत्तर प्रदेश के 12 जिलों को जोड़ता है।
- मेरठ से प्रयागराज की यात्रा 10-12 घंटे से घटकर लगभग 6 घंटे होगी।
- शाहजहाँपुर में 3.5 किलोमीटर लंबी आपातकालीन हवाई पट्टी इस एक्सप्रेसवे की विशेष सुविधा है।
- मार्ग में 2,635 हेक्टेयर भूमि पर इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स गलियारे विकसित किए जाएँगे।
- उद्घाटन से पहले मोदी ने वाराणसी में श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में सुबह 8.30 बजे पूजा-अर्चना की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार, 29 अप्रैल को वाराणसी में श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन और पूजा-अर्चना की, जिसके बाद वे हरदोई रवाना हुए, जहाँ उन्होंने ₹36,230 करोड़ की लागत से निर्मित 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, यह उद्घाटन देश में विश्व स्तरीय बुनियादी ढाँचे के विकास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।
कार्यक्रम का क्रम
आधिकारिक बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने सुबह करीब 8.30 बजे श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन और पूजा-अर्चना की। इसके बाद वे हरदोई की यात्रा पर रवाना हुए, जहाँ सुबह करीब 11.30 बजे उन्होंने गंगा एक्सप्रेसवे का औपचारिक उद्घाटन किया और एक जनसभा को भी संबोधित किया।
एक्सप्रेसवे की मुख्य विशेषताएँ
आधिकारिक बयान के अनुसार, गंगा एक्सप्रेसवे एक 6-लेन, एक्सेस-नियंत्रित ग्रीनफील्ड हाई-स्पीड कॉरिडोर है, जिसकी कुल लंबाई 594 किलोमीटर और कुल निर्माण लागत लगभग ₹36,230 करोड़ है। यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के 12 जिलों — मेरठ, बुलंदशहर, हापुड़, अमरोहा, संभल, बदायूँ, शाहजहाँपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज — से होकर गुजरता है। इस प्रकार यह राज्य के पश्चिमी, मध्य और पूर्वी क्षेत्रों को एक निर्बाध हाई-स्पीड कॉरिडोर से जोड़ता है।
इस परियोजना की एक विशेष उपलब्धि शाहजहाँपुर जिले में बनाई गई 3.5 किलोमीटर लंबी आपातकालीन लैंडिंग सुविधा (हवाई पट्टी) है, जो इसे रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बनाती है।
यात्रा समय और आर्थिक असर
बयान में कहा गया है कि इस एक्सप्रेसवे के चालू होने से मेरठ और प्रयागराज के बीच यात्रा का समय वर्तमान के 10-12 घंटों से घटकर लगभग 6 घंटे रह जाएगा। इसके अतिरिक्त, एक्सप्रेसवे के मार्ग में पड़ने वाले 12 जिलों में 2,635 हेक्टेयर भूमि पर इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स गलियारों का विकास किया जाएगा।
बयान में यह भी कहा गया है कि यह एक्सप्रेसवे लॉजिस्टिक्स की लागत कम करेगा, सप्लाई चेन की क्षमता बेहतर बनाएगा और मैन्युफैक्चरिंग की प्रतिस्पर्धा को बढ़ाएगा। गौरतलब है कि बेहतर कनेक्टिविटी से किसानों को शहरी और निर्यात बाजारों तक सीधी पहुँच मिलेगी, जिससे उन्हें अपनी उपज के बेहतर दाम मिल सकेंगे और ग्रामीण आय को मजबूती मिलेगी।
एक्सप्रेसवे नेटवर्क में भूमिका
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे का एक बड़ा नेटवर्क आकार ले रहा है। गंगा एक्सप्रेसवे इस नेटवर्क की रीढ़ के रूप में काम करेगा। इससे जुड़े कई लिंक गलियारे या तो चालू हो चुके हैं या उनकी योजना बनाई जा रही है — जिनमें आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, जेवर लिंक एक्सप्रेसवे, फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेसवे और मेरठ से हरिद्वार तक प्रस्तावित विस्तार शामिल हैं।
आगे क्या
गंगा एक्सप्रेसवे के चालू होने के साथ, उत्तर प्रदेश अपने एक्सप्रेसवे नेटवर्क को और विस्तार देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। लिंक गलियारों और इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग जोन के विकास से आने वाले वर्षों में रोज़गार और औद्योगिक गतिविधि पर ठोस असर पड़ने की उम्मीद है।