स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अमेरिकी-ईरान संघर्ष: $25 अरब खर्च, वैश्विक तेल आपूर्ति संकट और बढ़ती महंगाई की चेतावनी
सारांश
Key Takeaways
- अमेरिकी संसदीय समिति के वरिष्ठ सदस्य एडम स्मिथ ने कहा कि अमेरिका में गैस की कीमतें एक डॉलर से अधिक बढ़ चुकी हैं।
- पेंटागन के अनुसार अमेरिका-ईरान युद्ध पर अब तक करीब $25 अरब डॉलर खर्च हो चुके हैं, जिसका अधिकांश हिस्सा हथियारों और सैन्य अभियानों पर लगा।
- दर्जनों देश इस समय पेट्रोल की राशनिंग कर रहे हैं और गंभीर आर्थिक दबाव झेल रहे हैं।
- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अस्थिरता से ईंधन और उर्वरकों की कीमतें बढ़ रही हैं, महंगाई और गहराने की आशंका।
- जॉइंट चीफ्स के अध्यक्ष डैन केन ने कहा कि वैश्विक जोखिम तेज़ी से बढ़ रहे हैं।
अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते तनाव ने वैश्विक तेल आपूर्ति को गंभीर खतरे में डाल दिया है। 30 अप्रैल को वॉशिंगटन में अमेरिकी संसदीय समिति की सुनवाई के दौरान सांसदों ने चेतावनी दी कि ईंधन कीमतों में तेज बढ़ोतरी और वैश्विक सप्लाई चेन पर दबाव से महंगाई और गहरा सकती है। पेंटागन के अनुसार इस सैन्य अभियान पर अब तक करीब $25 अरब डॉलर खर्च हो चुके हैं।
संसदीय सुनवाई में उठे सवाल
बुधवार (स्थानीय समय) को हुई सुनवाई में संसदीय समिति के वरिष्ठ सदस्य एडम स्मिथ ने कहा, "अमेरिका में गैस की कीमतें एक डॉलर से अधिक बढ़ चुकी हैं।" उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह संकट केवल अमेरिका तक सीमित नहीं है — दर्जनों देश इस समय पेट्रोल की राशनिंग कर रहे हैं और गंभीर आर्थिक दबाव झेल रहे हैं। सांसदों ने अधिकारियों से पूछा कि क्या बढ़ती ऊर्जा कीमतों के व्यापक आर्थिक प्रभावों का सही आकलन किया जा रहा है।
युद्ध की आर्थिक कीमत
रक्षा विभाग के नियंत्रक जूल्स डब्ल्यू. हर्स्ट III के अनुसार, अब तक खर्च हुए करीब $25 अरब डॉलर का अधिकांश हिस्सा हथियारों और सैन्य अभियानों पर लगाया गया है। वहीं अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इस सैन्य अभियान का बचाव करते हुए कहा, "हम हर परिस्थिति में जीत के लिए लड़ते हैं।" गौरतलब है कि यह खर्च उस समय सामने आया है जब अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर महंगाई का दबाव पहले से ही बना हुआ है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का वैश्विक महत्व
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है, जहाँ से वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा गुज़रता है। यहाँ किसी भी प्रकार की बाधा से वैश्विक आपूर्ति तुरंत प्रभावित होती है और कीमतों में उछाल आता है। सांसदों के अनुसार, इस क्षेत्र में अस्थिरता के कारण ईंधन और उर्वरकों की कीमतें बढ़ रही हैं, जिससे ऊर्जा पर निर्भर देशों में महंगाई और बढ़ने की आशंका है। अलग-अलग राज्यों में तेल की कीमतें कथित तौर पर ₹90 से लेकर ₹135 प्रति लीटर के बीच चल रही हैं।
सैन्य और रणनीतिक दृष्टिकोण
जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष डैन केन ने कहा कि वैश्विक जोखिम तेज़ी से बढ़ रहे हैं, क्योंकि मौजूदा संघर्ष सीधे तौर पर सुरक्षा और अर्थव्यवस्था दोनों को प्रभावित कर रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर लंबे समय से तनाव चला आ रहा है। खाड़ी क्षेत्र में पहले भी ऐसे संकट उत्पन्न हो चुके हैं, जिनके कारण तेल की कीमतों में तेज वृद्धि देखी गई है।
आगे क्या होगा
मौजूदा संघर्ष ने यह चिंता और गहरी कर दी है कि यह स्थिति कितने समय तक जारी रहेगी और ऊर्जा पर निर्भर देशों — जिनमें भारत भी शामिल है — पर इसका कितना गहरा असर पड़ेगा। विशेषज्ञों के अनुसार यदि होर्मुज में बाधा लंबे समय तक बनी रही, तो वैश्विक मंदी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।