ओडिशा विधानसभा का विशेष सत्र आज: महिला आरक्षण पर चर्चा, 30 प्लाटून सुरक्षाबल तैनात
सारांश
Key Takeaways
संसदीय कार्य मंत्री मुकेश महालिंग ने बुधवार, 30 अप्रैल 2025 को भुवनेश्वर स्थित लोक भवन में राज्यपाल हरि बाबू कंभमपति से मुलाकात कर ओडिशा विधानसभा के विशेष सत्र के एजेंडे और महत्व के बारे में विस्तृत जानकारी दी। यह विशेष सत्र 30 अप्रैल को 17वीं ओडिशा विधानसभा के एक दिवसीय सत्र के रूप में बुलाया गया है, जिसमें 'भारतीय लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी' विषय पर गहन चर्चा प्रस्तावित है।
विशेष सत्र का उद्देश्य
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, यह विशेष सत्र भारतीय लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी को केंद्र में रखकर बुलाया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य शासन और निर्णय लेने की प्रक्रिया में महिलाओं की भूमिका को और अधिक सशक्त बनाना है। महालिंग ने राज्यपाल को सदन में उठाए जाने वाले मुख्य विषयों और प्रस्तावित चर्चाओं से अवगत कराया।
गौरतलब है कि यह सत्र ऐसे समय में बुलाया गया है जब राष्ट्रीय स्तर पर महिला आरक्षण विधेयक के पारित न होने को लेकर राजनीतिक खींचतान जारी है। ओडिशा विधानसभा का यह कदम उस व्यापक बहस में राज्य की भागीदारी को रेखांकित करता है।
राज्यपाल की प्रतिक्रिया
राज्यपाल हरि बाबू कंभमपति ने इस पहल की सराहना की और उम्मीद जताई कि ये चर्चाएँ सार्थक और परिणाम-उन्मुख होंगी। उन्होंने लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के महत्व पर जोर देते हुए विशेष सत्र के सुचारू संचालन के लिए शुभकामनाएँ दीं।
सुरक्षा व्यवस्था
पुलिस कमिश्नर सुरेश देव दत्ता सिंह ने अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ मिलकर विधानसभा परिसर में सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। मीडियाकर्मियों से बात करते हुए उन्होंने बताया कि सुरक्षा के लिए लगभग 30 प्लाटून तैनात की गई हैं और लगभग 100 वरिष्ठ अधिकारी इन व्यवस्थाओं की निगरानी कर रहे हैं।
इसके अलावा 11 'क्विक रिस्पॉन्स टीमें' (त्वरित प्रतिक्रिया दल) तैनात की गई हैं — जिनमें से सात विधानसभा परिसर के अंदर और चार आसपास के बाहरी क्षेत्रों में तैनात हैं।
राजनीतिक दलों की भागीदारी
सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ-साथ विपक्षी दल — बीजू जनता दल (BJD) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) — से अपेक्षा है कि वे इस एक दिवसीय विशेष सत्र में सक्रिय रूप से भाग लेंगे और महिला प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर अपने-अपने दृष्टिकोण रखेंगे। यह ऐसे समय में आया है जब महिला आरक्षण विधेयक राष्ट्रीय राजनीतिक विमर्श के केंद्र में बना हुआ है।
आगे क्या
इस विशेष सत्र में होने वाली चर्चाओं से ओडिशा सरकार की महिला सशक्तिकरण नीति की दिशा स्पष्ट हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य विधानसभाओं में इस तरह की बहसें केंद्र पर महिला आरक्षण विधेयक को लागू करने का दबाव बढ़ा सकती हैं।