ओडिशा की कक्षा 5 की अंग्रेजी किताब में 'निंबूड़ा-निंबूड़ा' गाना, शिक्षा मंत्री ने कहा — जांच समिति गठित
सारांश
मुख्य बातें
ओडिशा के सरकारी स्कूलों की कक्षा 5 की अंग्रेजी पाठ्यपुस्तक में बॉलीवुड के प्रसिद्ध गाने 'निंबूड़ा-निंबूड़ा' के बोल लगभग ज्यों के त्यों छपे मिले हैं, जिसने भुवनेश्वर में राजनीतिक और शैक्षणिक हलकों में हलचल मचा दी है। 30 जून 2026 को यह मामला सामने आने के बाद राज्य सरकार ने तत्काल संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं।
मुख्य घटनाक्रम
ओडिशा के स्कूल एवं जनशिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार की लापरवाही किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि मामले की निगरानी एवं जांच के लिए एक समिति का गठन किया गया है और प्रभावित छात्रों को जल्द ही संशोधित पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराई जाएंगी।
शिक्षा विशेषज्ञों ने इसे गंभीर चूक करार दिया है। उनका कहना है कि पाठ्यपुस्तकें बच्चों के शैक्षणिक विकास की नींव होती हैं, इसलिए प्रकाशन से पूर्व बहु-स्तरीय संपादकीय जांच अनिवार्य है।
पाठ्यपुस्तक विवाद की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि यह अकेली गड़बड़ी नहीं है। हाल ही में प्रकाशित पाठ्यपुस्तकों में कक्षा 1 से 8 तक कुल 1,678 त्रुटियाँ पाई गई थीं, जिसके बाद विपक्षी दलों और शिक्षाविदों की ओर से तीखी आलोचना हुई। किताब में कविता, कहानी और शिक्षाप्रद अध्यायों की जगह फिल्मी गाने का छप जाना इस व्यापक लापरवाही का एक और उदाहरण माना जा रहा है।
सरकार की कार्रवाई
इससे पहले मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने पाठ्यपुस्तकों में व्यापक त्रुटियों के मद्देनज़र शिक्षक प्रशिक्षण विभाग और राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) के पूर्व निदेशक मनोज पाधी सहित चार वरिष्ठ अधिकारियों को निलंबित कर दिया था। इसके अतिरिक्त, विकास आयुक्त की अध्यक्षता वाली जांच समिति की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद छह अन्य अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू की गई थी।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
विपक्षी दलों ने इस पूरे प्रकरण को लेकर शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड का इस्तीफा माँगा है। आलोचकों का कहना है कि 1,678 त्रुटियों का सामने आना और उनके बाद भी नई किताबों में फिल्मी गानों का छपना यह दर्शाता है कि पाठ्यपुस्तक प्रकाशन की समीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह विफल रही है।
आगे क्या होगा
शिक्षा मंत्री के अनुसार गठित जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। संशोधित पाठ्यपुस्तकें शीघ्र वितरित करने का आश्वासन दिया गया है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या राज्य सरकार पाठ्यपुस्तक प्रकाशन की समीक्षा प्रणाली में संरचनात्मक बदलाव करती है, ताकि भविष्य में ऐसी चूकें न हों।