ओडिशा पाठ्यपुस्तक विवाद: CM मोहन माझी ने 4 अधिकारी निलंबित किए, 1,678 गलतियों पर सख्त कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने 26 जून 2026 को राज्य की स्कूली पाठ्यपुस्तकों में पाई गई 1,678 गलतियों के मामले में कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए 4 वरिष्ठ अधिकारियों को तत्काल निलंबित कर दिया। साथ ही 6 अन्य अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय जाँच की प्रक्रिया शुरू की गई है। यह कदम विकास आयुक्त अनु गर्ग की अध्यक्षता में गठित उच्चस्तरीय जाँच समिति की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद उठाया गया है।
किन अधिकारियों पर हुई कार्रवाई
निलंबित किए गए अधिकारियों में शिक्षक शिक्षा निदेशालय तथा राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) के पूर्व निदेशक मनोज पाधी और तीन सहायक निदेशक — प्रलिप्ता मिश्रा, दिलीप कुमार साहू तथा भारती टुडू — शामिल हैं। इसके अतिरिक्त सहायक निदेशक बंदिता पटनायक, मानस रंजन राउत, मनोरंजन महापात्र, डॉ. प्रशांत कुमार साहू, मानस कुमार नायक और डॉ. सुदर्शन संतरा के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई आरंभ की गई है।
गलतियों का दायरा और स्वरूप
जाँच समिति ने पाया कि नई प्रकाशित पाठ्यपुस्तकों में कुल 1,678 त्रुटियाँ थीं। इनमें सर्वाधिक 705 गलतियाँ अकेले कक्षा 8 की किताबों में मिलीं। विषय-वार देखें तो 'जिज्ञासा' में 294, संस्कृत में 114, साहित्य में 31 और सामाजिक विज्ञान में 25 गलतियाँ पाई गईं। अंग्रेज़ी और गणित की पुस्तकों में भी कई गंभीर त्रुटियाँ दर्ज की गईं। गौरतलब है कि समिति को कक्षा 1 से 8 तक की पाठ्यपुस्तकों की जाँच का दायित्व सौंपा गया था।
समिति की 14 सिफारिशें
तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति ने शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए 14 सिफारिशें दी हैं, जिन्हें राज्य सरकार ने पूर्णतः लागू करने की घोषणा की है। इनमें प्रमुख हैं — SCERT द्वारा 7 दिनों के भीतर एक मास्टर एराटा रजिस्टर तैयार करना, गंभीर त्रुटियों वाले पृष्ठों को बदलना या पुनर्मुद्रित करना, सभी छात्रों को मुद्रित सुधार-पत्र वितरित करना और सुधरी हुई PDF प्रति को आधिकारिक शिक्षण सामग्री घोषित करना।
समिति ने एक सार्वजनिक एराटा पोर्टल स्थापित करने, शिक्षकों के लिए तत्काल सुधार प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाने और SCERT में एक क्वालिटी एश्योरेंस सेल गठित करने की भी अनुशंसा की है।
डीटीपी एजेंसी और प्रिंटिंग प्रेस पर भी कार्रवाई
समिति ने डीटीपी एजेंसी, प्रिंटिंग प्रेस और पुस्तकों को मंजूरी देने वाले अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने की सिफारिश की है। भविष्य में किसी भी पाठ्यपुस्तक को भाषा, विषय-वस्तु, चित्रों और अन्य सभी पहलुओं की विधिवत जाँच एवं अनुमोदन के बिना मुद्रण के लिए नहीं भेजा जाएगा — यह नीतिगत निर्देश भी समिति की अनुशंसाओं में शामिल है।
आगे क्या होगा
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि समिति की सभी 14 सिफारिशें क्रमबद्ध रूप से लागू की जाएंगी। यह कार्रवाई ऐसे समय में आई है जब ओडिशा में नई भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार शिक्षा क्षेत्र में जवाबदेही सुनिश्चित करने के संकेत दे रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि एराटा पोर्टल और क्वालिटी सेल जैसी संस्थागत व्यवस्थाएँ दीर्घकालिक सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती हैं, बशर्ते इन्हें समयबद्ध ढंग से लागू किया जाए।