मेटा का AI इमेज फीचर लॉन्च के 3 दिन में बंद, इंस्टाग्राम यूजर्स की प्राइवेसी पर उठे गंभीर सवाल
सारांश
मुख्य बातें
मेटा को अपना नया एआई इमेज जनरेशन फीचर लॉन्च के महज तीन दिन के भीतर वापस लेना पड़ा, जब दुनियाभर में प्राइवेसी विशेषज्ञों, कलाकार संगठनों और करोड़ों इंस्टाग्राम यूजर्स ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई। 7 जुलाई 2026 को लॉन्च हुआ यह फीचर 10 जुलाई तक निष्क्रिय कर दिया गया।
फीचर क्या था और कैसे काम करता था
मेटा ने अपने इन-हाउस एआई मॉडल म्यूज़ इमेज के ज़रिए यह फीचर पेश किया था। इसके तहत कोई भी व्यक्ति किसी सार्वजनिक इंस्टाग्राम अकाउंट का यूज़रनेम दर्ज करके उस अकाउंट की मौजूदा तस्वीरों के आधार पर एआई से नई इमेज तैयार कर सकता था।
यह फीचर 18 वर्ष या उससे अधिक उम्र के सभी सार्वजनिक इंस्टाग्राम अकाउंट्स पर डिफ़ॉल्ट रूप से सक्रिय था। मेटा ने यूज़र्स को सेटिंग्स के ज़रिए इससे बाहर निकलने का विकल्प दिया था, लेकिन यह सुविधा ऑप्ट-इन नहीं, बल्कि ऑप्ट-आउट आधारित थी — यानी जब तक यूज़र खुद न हटाए, उसकी तस्वीरें डिफ़ॉल्ट रूप से शामिल रहती थीं।
प्राइवेसी पर क्यों उठे सवाल
सबसे बड़ी आपत्ति यह थी कि जिन लोगों की तस्वीरें एआई इमेज बनाने के लिए इस्तेमाल की जा रही थीं, उन्हें इसकी कोई पूर्व सूचना नहीं दी जाती थी। प्राइवेसी विशेषज्ञों का कहना है कि बिना सहमति के किसी की छवि का उपयोग डिजिटल पहचान के अधिकार का उल्लंघन है।
कलाकारों के संगठनों और टैलेंट एजेंसियों ने भी इस फीचर का खुलकर विरोध किया। आलोचकों का कहना है कि यह तकनीक डीपफेक और दुरुपयोग के नए द्वार खोल सकती है, खासकर महिलाओं और सार्वजनिक हस्तियों के लिए।
भारत सरकार की प्रतिक्रिया
भारत में भी इस मामले ने नीति-निर्माताओं का ध्यान खींचा। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि यदि इस फीचर को लेकर कोई शिकायत प्राप्त होती है, तो सरकार जाँच करेगी कि यह भारतीय कानूनों के अनुरूप है या नहीं। यह बयान ऐसे समय आया जब भारत का डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम लागू होने की प्रक्रिया में है।
एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग पर भी असर
इसी बीच मेटा ने इंस्टाग्राम पर उपलब्ध एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड (E2EE) डायरेक्ट मैसेज फीचर को भी बंद करने की घोषणा की है। कंपनी ने यूज़र्स से अनुरोध किया है कि वे अपने महत्वपूर्ण संदेश, फ़ोटो, वीडियो और अन्य मीडिया पहले डाउनलोड कर लें।
गौरतलब है कि एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन एक ऐसी तकनीक है जिसमें केवल संदेश भेजने और प्राप्त करने वाले ही उसे पढ़ सकते हैं। इस सुविधा के हटने के बाद, ज़रूरत पड़ने पर मेटा मैसेज, फ़ोटो, वीडियो और वॉयस नोट्स जैसी सामग्री तक पहुँच बना सकेगी — जो उपयोगकर्ताओं की निजता के लिहाज़ से एक और चिंता का विषय है।
आगे क्या होगा
मेटा ने माना है कि यह फीचर यूज़र्स की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाया और इसे हटाया जा रहा है। हालाँकि, कंपनी ने यह स्पष्ट नहीं किया कि भविष्य में इसे संशोधित रूप में वापस लाया जाएगा या नहीं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना वैश्विक स्तर पर एआई गवर्नेंस और डेटा सुरक्षा नियमों की तत्काल ज़रूरत को रेखांकित करती है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मेटा अपनी एआई रणनीति में पारदर्शिता और उपयोगकर्ता सहमति को किस तरह केंद्र में रखती है।