व्हाट्सएप 'यूजरनेम' फीचर पर सरकार का मेटा को नोटिस, भारत में रोलआउट फिलहाल रोका
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने 1 जुलाई 2025 को व्हाट्सएप के प्रस्तावित 'यूजरनेम' फीचर को लेकर मेटा को औपचारिक नोटिस जारी किया है। सरकार ने मेटा से तीन दिनों के भीतर विस्तृत स्पष्टीकरण माँगा है और स्पष्ट निर्देश दिया है कि परामर्श प्रक्रिया पूरी होने तक भारत में इस फीचर का रोलआउट न किया जाए। यह कदम ऑनलाइन धोखाधड़ी और फर्जी पहचान के बढ़ते खतरों के बीच उठाया गया है।
सरकार की आशंकाएँ क्या हैं
सरकारी सूत्रों के अनुसार, केंद्र को गंभीर चिंता है कि यदि पर्याप्त सुरक्षा उपायों के बिना यह फीचर लागू किया गया, तो इसका दुरुपयोग फर्जी पहचान, प्रतिरूपण (इम्पर्सोनेशन), ऑनलाइन ठगी और गलत सूचना प्रसार के लिए हो सकता है। सूत्रों ने यह भी संकेत दिया है कि यदि किसी नए फीचर के कारण साइबर अपराध की संभावनाएँ बढ़ती हैं, तो संबंधित मैसेजिंग प्लेटफॉर्म की जवाबदेही तय की जा सकती है।
व्हाट्सएप का यूजरनेम फीचर क्या है
व्हाट्सएप का यह नया फीचर उपयोगकर्ताओं को बिना अपना मोबाइल नंबर साझा किए परिवार, दोस्तों या कारोबारियों से जुड़ने की सुविधा देगा। यूजर्स सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की तरह एक यूनिक यूजरनेम चुन सकेंगे, और किसी से संपर्क के लिए उसके सटीक यूजरनेम की आवश्यकता होगी। मेटा का तर्क है कि यह फीचर उपयोगकर्ताओं के फोन नंबर की गोपनीयता को मज़बूत करता है।
कानूनी और तकनीकी पेच
भारतीय कानूनों के तहत व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे मैसेजिंग प्लेटफॉर्म का सत्यापित मोबाइल नंबर से जुड़ा होना अनिवार्य है। टेलीकॉम साइबर सिक्योरिटी रूल्स, 2024 के तहत दूरसंचार विभाग (DoT) डिजिटल धोखाधड़ी पर अंकुश लगाने के लिए सिम-बाइंडिंग संबंधी सख्त प्रावधान लागू करता है। गौरतलब है कि टेलीग्राम और सिग्नल जैसे प्लेटफॉर्म लंबे समय से यूजर्स को फोन नंबर छिपाकर केवल यूजरनेम के माध्यम से संवाद करने की सुविधा देते रहे हैं — लेकिन भारत में इनके नियामकीय अनुपालन को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मज़बूत एंटी-अब्यूज सिस्टम नहीं बनाए गए, तो यह सुविधा फर्जी प्रोफाइल और ऑनलाइन ठगी को बढ़ावा दे सकती है, जिससे भारत के करोड़ों उपयोगकर्ता प्रभावित हो सकते हैं। उद्यमी अंकुर वारिकू ने भी सोशल मीडिया पर चिंता जताते हुए कहा था कि भारत जैसे देश में किसी प्रसिद्ध व्यक्ति या कंपनी से मिलते-जुलते फर्जी यूजरनेम बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी का कारण बन सकते हैं।
आगे क्या होगा
अब सबकी नज़रें मेटा की तीन दिनों के भीतर दी जाने वाली प्रतिक्रिया पर हैं। सरकार के साथ परामर्श प्रक्रिया के नतीजे यह तय करेंगे कि भारत में यह फीचर किन शर्तों पर और कब लॉन्च होगा। यह मामला भारत में बड़े टेक प्लेटफॉर्म और नियामकीय ढाँचे के बीच बढ़ते तनाव की एक और कड़ी है।