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व्हाट्सएप यूजरनेम विवाद के बाद MeitY की बड़ी तैयारी: सभी मैसेजिंग ऐप्स पर लागू होंगे एक समान नियम

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व्हाट्सएप यूजरनेम विवाद के बाद MeitY की बड़ी तैयारी: सभी मैसेजिंग ऐप्स पर लागू होंगे एक समान नियम

सारांश

व्हाट्सएप के यूजरनेम फीचर पर सरकार की आपत्ति अब सिर्फ एक ऐप तक सीमित नहीं रही — MeitY पूरे मैसेजिंग सेक्टर के लिए एक समान नियम बनाने की तैयारी में है। डिजिटल अरेस्ट और फिशिंग की बढ़ती चिंताओं के बीच यह कदम भारत के डिजिटल नियमन की दिशा बदल सकता है।

मुख्य बातें

MeitY व्हाट्सएप यूजरनेम विवाद के बाद सभी मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स के लिए समान नियामकीय ढाँचा तैयार करने पर विचार कर रहा है।
सरकार ने पिछले सप्ताह व्हाट्सएप को नोटिस जारी कर भारत में यूजरनेम फीचर लॉन्च न करने का निर्देश दिया था।
टेलीग्राम ने भी अपने यूजरनेम फीचर पर सरकार के नोटिस का जवाब जुलाई में सौंप दिया।
सरकार की मुख्य चिंता फिशिंग , इम्पर्सनेशन और डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर अपराधों में इस फीचर के दुरुपयोग की है।
अंतिम निर्णय से पहले केंद्र सरकार प्रमुख मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स के साथ विस्तृत परामर्श करेगी।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) व्हाट्सएप के प्रस्तावित यूजरनेम फीचर पर उठे विवाद के बाद देश में संचालित सभी मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स के लिए एक समान नियामकीय ढाँचा (कॉमन रेगुलेटरी फ्रेमवर्क) तैयार करने पर विचार कर रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, यह ढाँचा किसी एक प्लेटफॉर्म को लक्षित करने के बजाय पूरे मैसेजिंग सेक्टर पर समान रूप से लागू होगा। नई दिल्ली से आई यह जानकारी डिजिटल सुरक्षा नीति की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देती है।

विवाद की जड़: यूजरनेम फीचर क्या है

व्हाट्सएप के प्रस्तावित यूजरनेम फीचर के तहत यूजर्स बिना अपना मोबाइल नंबर साझा किए एक-दूसरे से संपर्क कर सकेंगे। यह सुविधा उपयोगकर्ताओं को अतिरिक्त गोपनीयता (प्राइवेसी) प्रदान करती है, किंतु सरकार को आशंका है कि इसका दुरुपयोग फिशिंग, प्रतिरूपण (इम्पर्सनेशन), डिजिटल अरेस्ट जैसे ऑनलाइन फ्रॉड और साइबर अपराधों में किया जा सकता है। इसके अलावा, कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए ऐसे मामलों की जाँच करना और अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

सरकार की प्रतिक्रिया और नोटिस

केंद्र सरकार ने पिछले सप्ताह व्हाट्सएप को औपचारिक नोटिस जारी कर इस फीचर पर गंभीर चिंता जताई थी। साथ ही कंपनी को यह निर्देश भी दिया गया था कि जब तक सरकार के साथ परामर्श प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती और वह संतुष्ट नहीं हो जाती, तब तक भारत में इस फीचर को लॉन्च न किया जाए। व्हाट्सएप सरकार को अपना जवाब दे चुका है।

गौरतलब है कि टेलीग्राम ने भी अपने यूजरनेम फीचर को लेकर सरकार के नोटिस का जवाब जुलाई में ही सौंप दिया था। यह ऐसे समय में आया है जब सरकार डिजिटल पहचान और ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर पहले से सतर्क रुख अपनाए हुए है।

समान नियामकीय ढाँचे की दिशा में कदम

रिपोर्टों के अनुसार, MeitY अब एक ऐसा साझा रेगुलेटरी फ्रेमवर्क बनाने की दिशा में काम कर रहा है जो व्हाट्सएप, टेलीग्राम और अन्य सभी मैसेजिंग सेवाओं पर एक जैसा लागू हो। इससे पहले नियामकीय कदम अक्सर किसी एक प्लेटफॉर्म को लेकर उठाए जाते थे, जिससे 'अनइवन प्लेइंग फील्ड' की स्थिति बनती थी।

यह पहल IT अधिनियम और डिजिटल पर्सनल डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 के व्यापक ढाँचे के अंतर्गत आकार ले सकती है, हालाँकि अंतिम स्वरूप अभी तय नहीं हुआ है।

आम जनता और प्लेटफॉर्म्स पर असर

यदि यह फ्रेमवर्क लागू होता है, तो मैसेजिंग ऐप्स को उपयोगकर्ता पहचान सत्यापन और कानून प्रवर्तन सहयोग के मामले में एक जैसे मानकों का पालन करना होगा। करोड़ों भारतीय उपयोगकर्ताओं के लिए इसका अर्थ यह हो सकता है कि यूजरनेम जैसी प्राइवेसी सुविधाएँ या तो विलंबित होंगी या उनमें सरकार-अनुमोदित सुरक्षा उपाय जोड़े जाएँगे।

आगे क्या होगा

रिपोर्टों के अनुसार, अंतिम निर्णय लेने से पहले केंद्र सरकार प्रमुख मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स के साथ विस्तृत चर्चा और परामर्श करेगी। डिजिटल अधिकार विशेषज्ञ और उद्योग संगठन इस प्रक्रिया पर नज़र बनाए हुए हैं। नीति का अंतिम मसौदा तैयार होने पर यह भारत के मैसेजिंग प्लेटफॉर्म नियमन में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि 'समान नियम' का अर्थ प्राइवेसी का संतुलन होगा या निगरानी का विस्तार। यूजरनेम फीचर पर आपत्ति जायज़ है, किंतु बिना मोबाइल नंबर के संपर्क की सुविधा लाखों उन उपयोगकर्ताओं के लिए भी ज़रूरी है जो उत्पीड़न और डेटा लीक से बचना चाहते हैं। नियामकीय ढाँचे में यदि केवल कानून प्रवर्तन की सुविधा को प्राथमिकता दी गई और उपयोगकर्ता अधिकारों की अनदेखी हुई, तो यह डिजिटल अधिकारों पर एक व्यापक प्रश्नचिह्न बन सकता है। परामर्श प्रक्रिया में नागरिक समाज और डिजिटल अधिकार संगठनों की भागीदारी इस नीति की विश्वसनीयता की कसौटी होगी।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

व्हाट्सएप यूजरनेम फीचर क्या है और सरकार को इस पर आपत्ति क्यों है?
व्हाट्सएप का प्रस्तावित यूजरनेम फीचर उपयोगकर्ताओं को बिना मोबाइल नंबर साझा किए एक-दूसरे से संपर्क करने की सुविधा देता है। सरकार को आशंका है कि इससे फिशिंग, इम्पर्सनेशन और डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर अपराधों में वृद्धि हो सकती है और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए जाँच कठिन हो जाएगी।
MeitY का प्रस्तावित नियामकीय ढाँचा किन प्लेटफॉर्म्स पर लागू होगा?
रिपोर्टों के अनुसार यह ढाँचा व्हाट्सएप, टेलीग्राम सहित भारत में संचालित सभी मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स पर समान रूप से लागू होगा। इसका उद्देश्य किसी एक प्लेटफॉर्म को लक्षित करने के बजाय पूरे सेक्टर में एक जैसा नियामकीय मानक स्थापित करना है।
क्या व्हाट्सएप ने सरकार के नोटिस का जवाब दिया है?
हाँ, व्हाट्सएप सरकार को अपना जवाब दे चुका है। इसी तरह टेलीग्राम ने भी अपने यूजरनेम फीचर पर सरकार के नोटिस का जवाब जुलाई में सौंप दिया। अंतिम निर्णय परामर्श प्रक्रिया पूरी होने के बाद लिया जाएगा।
क्या भारत में व्हाट्सएप यूजरनेम फीचर लॉन्च होगा?
फिलहाल सरकार ने व्हाट्सएप को निर्देश दिया है कि जब तक परामर्श प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती और सरकार संतुष्ट नहीं हो जाती, तब तक यह फीचर भारत में लॉन्च न किया जाए। इस फीचर का भविष्य नए नियामकीय ढाँचे पर निर्भर करेगा।
इस नीति का आम उपयोगकर्ताओं पर क्या असर पड़ेगा?
यदि समान नियामकीय ढाँचा लागू होता है, तो मैसेजिंग ऐप्स पर यूजरनेम जैसी प्राइवेसी सुविधाएँ या तो विलंबित होंगी या उनमें सरकार-अनुमोदित सुरक्षा उपाय अनिवार्य किए जाएँगे। करोड़ों भारतीय उपयोगकर्ताओं के लिए डिजिटल गोपनीयता और सुरक्षा के बीच संतुलन इस नीति का केंद्रीय मुद्दा होगा।
राष्ट्र प्रेस
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