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PM मोदी ने ऑकलैंड में सुनाया 25 साल पुराना किस्सा, न्यूज़ीलैंड से मिला मफलर आज भी है संभालकर

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PM मोदी ने ऑकलैंड में सुनाया 25 साल पुराना किस्सा, न्यूज़ीलैंड से मिला मफलर आज भी है संभालकर

सारांश

ऑकलैंड में 'किआ ओरा मोदी' कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने 25-30 साल पुरानी न्यूज़ीलैंड यात्रा में मिला मफलर दिखाया और कहा — 'मैं इसकी देखभाल उसी तरह करता हूं जैसे आपके प्यार की।' 40 वर्षों बाद न्यूज़ीलैंड पहुंचे पहले भारतीय PM का यह भावुक संबोधन प्रवासी समुदाय के दिल को छू गया।

मुख्य बातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 जुलाई 2026 को ऑकलैंड में भारतीय प्रवासी कार्यक्रम 'किआ ओरा मोदी' को संबोधित किया।
मोदी 40 वर्षों के अंतराल के बाद न्यूज़ीलैंड का दौरा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं।
उन्होंने 25-30 साल पहले की न्यूज़ीलैंड यात्रा में मिला मफलर कार्यक्रम में लाकर भावुक संस्मरण साझा किया।
न्यूज़ीलैंड के PM क्रिस्टोफर लक्सन भी इस कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
मोदी ने 2001 की यात्रा के दौरान मनुकाऊ इंडियन एसोसिएशन के गुजराती स्कूल में सांस्कृतिक शिक्षा पर जोर दिया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 जुलाई 2026 को ऑकलैंड में भारतीय प्रवासियों के विशाल समागम को संबोधित करते हुए अपनी पहली न्यूज़ीलैंड यात्रा से जुड़ा एक भावुक संस्मरण साझा किया। उन्होंने बताया कि लगभग 25-30 वर्ष पहले की उस यात्रा में मिला मफलर वह आज भी संभालकर रखते हैं — और इसी मफलर को वह इस बार विशेष रूप से अपने साथ लेकर आए।

'किआ ओरा मोदी' कार्यक्रम में भावुक संबोधन

न्यूज़ीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के साथ आयोजित 'किआ ओरा मोदी' नामक भव्य भारतीय प्रवासी कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वह अपने साथ 140 करोड़ भारतीयों की शुभकामनाएं लेकर आए हैं। उन्होंने इस बात पर गर्व जताया कि 40 वर्षों के अंतराल के बाद न्यूज़ीलैंड का दौरा करने वाले वह पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं और इसे उन्होंने अपना 'सौभाग्य' बताया।

मोदी ने कार्यक्रम में उपस्थित लोगों से कहा, 'लगभग 25-30 साल पहले, जब मैं किसी सरकार का हिस्सा नहीं था और सार्वजनिक जीवन में मुझे बहुत कम लोग जानते थे, तब मुझे न्यूज़ीलैंड आने का अवसर मिला था। उस समय किसी ने मुझे तीन चीजें दी थीं — एक मफलर, एक टोपी और एक दस्ताना।' उन्होंने बताया कि इन तीनों में से वह मफलर आज अपने साथ इस कार्यक्रम में लेकर आए हैं, जिसे उन्होंने इन वर्षों में कई बार इस्तेमाल किया है। इस भावुक पल पर उपस्थित जनसमूह ने जोरदार तालियों से उनका स्वागत किया।

मफलर और प्रेम का रूपक

प्रधानमंत्री ने इस मफलर को प्रवासी भारतीयों के स्नेह का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा, 'मैं इसकी देखभाल उसी तरह करता हूं, जैसे मैं आपके मेरे प्रति प्यार की देखभाल करता हूं।' न्यूज़ीलैंड की ठंड को ध्यान में रखते हुए वह इस मफलर को विशेष रूप से साथ लाए थे।

2001 की यात्रा और गुजराती स्कूल का किस्सा

शुक्रवार को भारतीय समुदाय के सदस्यों ने भी प्रधानमंत्री मोदी का गर्मजोशी से स्वागत करते हुए उनकी वर्ष 2001 की न्यूज़ीलैंड यात्रा को याद किया। न्यूज़ीलैंड में भारतीय समुदाय के सदस्य दिनेश पाहुजा ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर सक्रिय 'मोदी स्टोरी' के साथ बातचीत में उस पुरानी यात्रा की यादें साझा कीं।

पाहुजा के अनुसार, गुजरात के मुख्यमंत्री बनने से पहले की उस यात्रा में मोदी ने एक गुजराती स्कूल का दौरा किया था। उन्होंने वहाँ पूछा था कि क्या स्कूल में केवल भाषा सिखाई जाती है या भारतीय मूल्यों और संस्कृति के बारे में भी चर्चा की जाती है। जब उन्हें बताया गया कि केवल भाषा पर जोर है, तो उन्होंने सुझाव दिया कि बच्चों को अपनी मातृभूमि से जोड़े रखने और भारत में हो रहे विकास को समझने के लिए भारतीय संस्कृति की शिक्षा भी आवश्यक है।

'मोदी स्टोरी' ने एक्स पर लिखा कि मनुकाऊ इंडियन एसोसिएशन द्वारा संचालित उस गुजराती स्कूल का दौरा करते हुए मोदी ने पाठ्यक्रम में सांस्कृतिक मूल्यों और विरासत को शामिल करने का सुझाव दिया था, ताकि बच्चे केवल भाषा न सीखें बल्कि अपनी भारतीय जड़ों से गर्व के साथ जुड़े रहें।

प्रवासी भारतीयों से जुड़ाव का संदेश

यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत और न्यूज़ीलैंड के द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊर्जा देने की कोशिश हो रही है। गौरतलब है कि न्यूज़ीलैंड में भारतीय मूल के लोगों की संख्या उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है और यह समुदाय दोनों देशों के बीच सेतु की भूमिका निभाता है। प्रधानमंत्री मोदी का यह भावुक संबोधन प्रवासी भारतीयों में अपनी सांस्कृतिक जड़ों के प्रति गहरे जुड़ाव को रेखांकित करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

इस भावनात्मक कूटनीति के समानांतर यह प्रश्न भी उठता है कि दोनों देशों के बीच व्यापार, वीज़ा सुविधा और शिक्षा सहयोग जैसे ठोस द्विपक्षीय एजेंडे पर कितनी प्रगति हुई — क्योंकि प्रवासी समुदाय को भावनाओं के साथ-साथ नीतिगत समर्थन की भी दरकार है।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM मोदी ने ऑकलैंड में कौन सा पुराना किस्सा सुनाया?
प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि लगभग 25-30 साल पहले जब वह पहली बार न्यूज़ीलैंड आए थे, तब किसी ने उन्हें एक मफलर, एक टोपी और एक दस्ताना दिया था। वह मफलर उन्होंने आज तक संभालकर रखा है और इस बार विशेष रूप से उसे ऑकलैंड के कार्यक्रम में लेकर आए।
'किआ ओरा मोदी' कार्यक्रम क्या था?
'किआ ओरा मोदी' ऑकलैंड में आयोजित एक भव्य भारतीय प्रवासी कार्यक्रम था, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ न्यूज़ीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन भी उपस्थित रहे। इस कार्यक्रम में भारतीय समुदाय के बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।
क्या मोदी पहले भी न्यूज़ीलैंड आ चुके हैं?
हां, प्रधानमंत्री मोदी ने करीब 25-30 साल पहले, गुजरात के मुख्यमंत्री बनने से पूर्व, न्यूज़ीलैंड का दौरा किया था। वर्तमान यात्रा के साथ वह 40 वर्षों के अंतराल के बाद न्यूज़ीलैंड पहुंचने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बन गए हैं।
मोदी ने न्यूज़ीलैंड के गुजराती स्कूल के बारे में क्या कहा था?
2001 की यात्रा के दौरान मोदी ने मनुकाऊ इंडियन एसोसिएशन द्वारा संचालित एक गुजराती स्कूल का दौरा किया था। उन्होंने सुझाव दिया था कि बच्चों को केवल भाषा नहीं, बल्कि भारतीय मूल्यों और संस्कृति की शिक्षा भी मिलनी चाहिए ताकि वे अपनी मातृभूमि से जुड़े रहें।
PM मोदी की न्यूज़ीलैंड यात्रा का महत्व क्या है?
यह यात्रा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि 40 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद कोई भारतीय प्रधानमंत्री न्यूज़ीलैंड पहुंचा है। इस यात्रा से भारत-न्यूज़ीलैंड द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा मिलने और प्रवासी भारतीय समुदाय के साथ संपर्क मजबूत होने की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
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