1 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

व्हाट्सऐप यूजरनेम फीचर पर केंद्र सरकार सख्त, जल्द भेजा जा सकता है नोटिस

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
व्हाट्सऐप यूजरनेम फीचर पर केंद्र सरकार सख्त, जल्द भेजा जा सकता है नोटिस

सारांश

व्हाट्सऐप का यूजरनेम फीचर गोपनीयता का वादा करता है — लेकिन केंद्र सरकार को डर है कि यह फर्जी पहचान और साइबर ठगी का नया अड्डा बन सकता है। नोटिस की तैयारी और टेलीकॉम साइबर नियमों की आड़ में यह टकराव बड़े प्लेटफॉर्म की जवाबदेही की बहस को नई धार दे रहा है।

मुख्य बातें

केंद्र सरकार व्हाट्सऐप के आगामी यूजरनेम फीचर को लेकर गंभीर चिंता जता रही है और जल्द नोटिस भेजे जाने की संभावना है।
सरकार की आशंका है कि यह फीचर फर्जी पहचान बनाने और साइबर धोखाधड़ी के लिए इस्तेमाल हो सकता है।
मेटा के अनुसार, यूजरनेम फीचर का उद्देश्य उपयोगकर्ताओं के मोबाइल नंबर की गोपनीयता सुरक्षित करना है।
टेलीकॉम साइबर सिक्योरिटी रूल्स, 2024 के तहत भारत में मैसेजिंग अकाउंट का सत्यापित मोबाइल नंबर से जुड़ा होना अनिवार्य है।
साइबर विशेषज्ञों ने एंटी-अब्यूज सिस्टम की अनिवार्यता पर ज़ोर दिया है; उद्यमी अंकुर वारिकू ने भी सोशल मीडिया पर चिंता जताई।

केंद्र सरकार ने मेटा के स्वामित्व वाले मैसेजिंग प्लेटफॉर्म व्हाट्सऐप के आगामी यूजरनेम फीचर के संभावित दुरुपयोग को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस फीचर से जुड़ी गंभीर चिंताओं के मद्देनजर व्हाट्सऐप को जल्द ही आधिकारिक नोटिस भेजा जा सकता है। यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है जब भारत में साइबर धोखाधड़ी और डिजिटल इम्पर्सोनेशन के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं।

यूजरनेम फीचर क्या है और क्यों उठे सवाल

व्हाट्सऐप जल्द ही एक नया फीचर लॉन्च करने की तैयारी में है, जिसके तहत उपयोगकर्ता अपना मोबाइल नंबर साझा किए बिना केवल एक यूनिक यूजरनेम के ज़रिए परिवार, दोस्तों और व्यवसायों से संपर्क कर सकेंगे। मेटा का कहना है कि इस फीचर का मुख्य उद्देश्य उपयोगकर्ताओं के मोबाइल नंबर की गोपनीयता सुनिश्चित करना है और किसी से संपर्क करने के लिए सामने वाले को सटीक यूजरनेम जानना अनिवार्य होगा।

हालाँकि, सरकारी सूत्रों के अनुसार, सरकार को आशंका है कि यह फीचर टेलीग्राम की तरह फर्जी पहचान बनाने, लोगों को ठगने और भ्रामक जानकारी फैलाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। सरकार का स्पष्ट मत है कि व्हाट्सऐप जैसे प्लेटफॉर्म को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके उत्पाद इम्पर्सोनेशन या दुष्प्रचार का माध्यम न बनें।

कानूनी ढाँचा और सरकार का पक्ष

भारत के मौजूदा कानूनों के तहत व्हाट्सऐप और टेलीग्राम जैसे मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर अकाउंट का एक सत्यापित मोबाइल नंबर से जुड़ा होना अनिवार्य है। टेलीकॉम साइबर सिक्योरिटी रूल्स, 2024 के अंतर्गत दूरसंचार विभाग (DoT) डिजिटल धोखाधड़ी रोकने के लिए सिम-बाइंडिंग से संबंधित कड़े प्रावधान लागू करता है।

सरकारी सूत्रों का कहना है कि यदि किसी नए फीचर के कारण साइबर अपराध या धोखाधड़ी की आशंका बढ़ती है, तो संबंधित प्लेटफॉर्म को भी उसकी जवाबदेही वहन करनी होगी। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब भारत दुनिया के सबसे बड़े व्हाट्सऐप बाज़ारों में से एक है।

साइबर विशेषज्ञों की चिंताएँ

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यूजरनेम फीचर गोपनीयता बढ़ाने के साथ-साथ फर्जी पहचान और ऑनलाइन धोखाधड़ी के जोखिम भी पैदा कर सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत जैसे विशाल डिजिटल बाज़ार में करोड़ों उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा के लिए एक मज़बूत एंटी-अब्यूज सिस्टम और प्रभावी सुरक्षा उपाय अनिवार्य होंगे।

गौरतलब है कि टेलीग्राम और सिग्नल जैसे प्लेटफॉर्म पहले से ही उपयोगकर्ताओं को मोबाइल नंबर छिपाकर केवल यूजरनेम के माध्यम से संवाद करने की सुविधा देते हैं, और इन पर दुरुपयोग की शिकायतें भी सामने आती रही हैं।

उद्यमी वर्ग की आवाज़

उद्यमी अंकुर वारिकू ने भी सोशल मीडिया पर इस फीचर को लेकर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि यदि व्हाट्सऐप ने प्रभावी एंटी-अब्यूज सिस्टम नहीं बनाया, तो भारत जैसे देश में किसी प्रसिद्ध व्यक्ति या प्रतिष्ठित कंपनी से मिलते-जुलते फर्जी यूजरनेम बनाकर बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी की जा सकती है।

आगे क्या होगा

सरकारी सूत्रों के अनुसार, व्हाट्सऐप को भेजे जाने वाले संभावित नोटिस में प्लेटफॉर्म से यह स्पष्ट करने को कहा जा सकता है कि वह इम्पर्सोनेशन और साइबर धोखाधड़ी रोकने के लिए क्या ठोस उपाय करेगा। यह मामला भारत में बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही और उपयोगकर्ता सुरक्षा के बीच संतुलन की बहस को एक बार फिर केंद्र में ले आया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वहाँ बिना मज़बूत सत्यापन तंत्र के यह सुविधा उल्टी पड़ सकती है। विडंबना यह है कि सरकार जिस 'सिम-बाइंडिंग' ढाँचे की दुहाई दे रही है, वह खुद भी फर्जी सिम की समस्या से पूरी तरह मुक्त नहीं है। असली सवाल यह है कि क्या सरकार केवल नोटिस भेजकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेगी, या मेटा के साथ मिलकर एक व्यावहारिक एंटी-अब्यूज ढाँचा तैयार करेगी — जो उपयोगकर्ता की गोपनीयता और सुरक्षा, दोनों को साधे।
RashtraPress
1 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

व्हाट्सऐप का यूजरनेम फीचर क्या है?
व्हाट्सऐप का आगामी यूजरनेम फीचर उपयोगकर्ताओं को अपना मोबाइल नंबर साझा किए बिना एक यूनिक यूजरनेम के ज़रिए दूसरों से संपर्क करने की सुविधा देगा। मेटा के अनुसार, इसका उद्देश्य उपयोगकर्ताओं की फोन नंबर गोपनीयता सुरक्षित करना है।
सरकार व्हाट्सऐप को नोटिस क्यों भेज सकती है?
सरकारी सूत्रों के अनुसार, सरकार को आशंका है कि यूजरनेम फीचर फर्जी पहचान बनाने और साइबर धोखाधड़ी के लिए इस्तेमाल हो सकता है। सरकार चाहती है कि व्हाट्सऐप स्पष्ट करे कि वह इम्पर्सोनेशन और दुरुपयोग रोकने के लिए क्या उपाय करेगा।
क्या भारत में यूजरनेम फीचर कानूनी रूप से मान्य होगा?
भारत के मौजूदा कानूनों के तहत मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर अकाउंट का एक सत्यापित मोबाइल नंबर से जुड़ा होना अनिवार्य है। टेलीकॉम साइबर सिक्योरिटी रूल्स, 2024 के तहत दूरसंचार विभाग (DoT) सिम-बाइंडिंग के कड़े प्रावधान लागू करता है, जो इस फीचर के साथ टकरा सकते हैं।
साइबर विशेषज्ञ इस फीचर को लेकर क्या कह रहे हैं?
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह फीचर गोपनीयता बढ़ाने के साथ-साथ फर्जी पहचान और ऑनलाइन धोखाधड़ी के जोखिम भी पैदा कर सकता है। उनके अनुसार, भारत जैसे बड़े डिजिटल बाज़ार में करोड़ों उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा के लिए मज़बूत एंटी-अब्यूज सिस्टम अनिवार्य होगा।
टेलीग्राम और सिग्नल से व्हाट्सऐप का यह फीचर कैसे अलग है?
टेलीग्राम और सिग्नल पहले से ही उपयोगकर्ताओं को मोबाइल नंबर छिपाकर केवल यूजरनेम के ज़रिए संवाद करने की सुविधा देते हैं। व्हाट्सऐप का यह फीचर इसी श्रेणी में आएगा, लेकिन व्हाट्सऐप की भारत में विशाल उपयोगकर्ता संख्या को देखते हुए दुरुपयोग का पैमाना कहीं अधिक हो सकता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 महीने पहले
  2. 4 महीने पहले
  3. 4 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 5 महीने पहले
  6. 6 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले