व्हाट्सऐप यूजरनेम फीचर पर केंद्र सरकार सख्त, जल्द भेजा जा सकता है नोटिस
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने मेटा के स्वामित्व वाले मैसेजिंग प्लेटफॉर्म व्हाट्सऐप के आगामी यूजरनेम फीचर के संभावित दुरुपयोग को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस फीचर से जुड़ी गंभीर चिंताओं के मद्देनजर व्हाट्सऐप को जल्द ही आधिकारिक नोटिस भेजा जा सकता है। यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है जब भारत में साइबर धोखाधड़ी और डिजिटल इम्पर्सोनेशन के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं।
यूजरनेम फीचर क्या है और क्यों उठे सवाल
व्हाट्सऐप जल्द ही एक नया फीचर लॉन्च करने की तैयारी में है, जिसके तहत उपयोगकर्ता अपना मोबाइल नंबर साझा किए बिना केवल एक यूनिक यूजरनेम के ज़रिए परिवार, दोस्तों और व्यवसायों से संपर्क कर सकेंगे। मेटा का कहना है कि इस फीचर का मुख्य उद्देश्य उपयोगकर्ताओं के मोबाइल नंबर की गोपनीयता सुनिश्चित करना है और किसी से संपर्क करने के लिए सामने वाले को सटीक यूजरनेम जानना अनिवार्य होगा।
हालाँकि, सरकारी सूत्रों के अनुसार, सरकार को आशंका है कि यह फीचर टेलीग्राम की तरह फर्जी पहचान बनाने, लोगों को ठगने और भ्रामक जानकारी फैलाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। सरकार का स्पष्ट मत है कि व्हाट्सऐप जैसे प्लेटफॉर्म को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके उत्पाद इम्पर्सोनेशन या दुष्प्रचार का माध्यम न बनें।
कानूनी ढाँचा और सरकार का पक्ष
भारत के मौजूदा कानूनों के तहत व्हाट्सऐप और टेलीग्राम जैसे मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर अकाउंट का एक सत्यापित मोबाइल नंबर से जुड़ा होना अनिवार्य है। टेलीकॉम साइबर सिक्योरिटी रूल्स, 2024 के अंतर्गत दूरसंचार विभाग (DoT) डिजिटल धोखाधड़ी रोकने के लिए सिम-बाइंडिंग से संबंधित कड़े प्रावधान लागू करता है।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि यदि किसी नए फीचर के कारण साइबर अपराध या धोखाधड़ी की आशंका बढ़ती है, तो संबंधित प्लेटफॉर्म को भी उसकी जवाबदेही वहन करनी होगी। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब भारत दुनिया के सबसे बड़े व्हाट्सऐप बाज़ारों में से एक है।
साइबर विशेषज्ञों की चिंताएँ
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यूजरनेम फीचर गोपनीयता बढ़ाने के साथ-साथ फर्जी पहचान और ऑनलाइन धोखाधड़ी के जोखिम भी पैदा कर सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत जैसे विशाल डिजिटल बाज़ार में करोड़ों उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा के लिए एक मज़बूत एंटी-अब्यूज सिस्टम और प्रभावी सुरक्षा उपाय अनिवार्य होंगे।
गौरतलब है कि टेलीग्राम और सिग्नल जैसे प्लेटफॉर्म पहले से ही उपयोगकर्ताओं को मोबाइल नंबर छिपाकर केवल यूजरनेम के माध्यम से संवाद करने की सुविधा देते हैं, और इन पर दुरुपयोग की शिकायतें भी सामने आती रही हैं।
उद्यमी वर्ग की आवाज़
उद्यमी अंकुर वारिकू ने भी सोशल मीडिया पर इस फीचर को लेकर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि यदि व्हाट्सऐप ने प्रभावी एंटी-अब्यूज सिस्टम नहीं बनाया, तो भारत जैसे देश में किसी प्रसिद्ध व्यक्ति या प्रतिष्ठित कंपनी से मिलते-जुलते फर्जी यूजरनेम बनाकर बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी की जा सकती है।
आगे क्या होगा
सरकारी सूत्रों के अनुसार, व्हाट्सऐप को भेजे जाने वाले संभावित नोटिस में प्लेटफॉर्म से यह स्पष्ट करने को कहा जा सकता है कि वह इम्पर्सोनेशन और साइबर धोखाधड़ी रोकने के लिए क्या ठोस उपाय करेगा। यह मामला भारत में बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही और उपयोगकर्ता सुरक्षा के बीच संतुलन की बहस को एक बार फिर केंद्र में ले आया है।