CSAM और WhatsApp यूजरनेम फीचर पर मेटा से जवाब माँगेगी सरकार, 5 अगस्त को अहम बैठक संभव
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार 5 अगस्त 2026 को मेटा के शीर्ष अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक कर सकती है, जिसमें बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM), व्हाट्सएप के यूजरनेम फीचर और वेरिफाइड अकाउंट्स से जुड़ी कंटेंट मॉडरेशन प्रक्रिया पर स्पष्टीकरण माँगा जाएगा। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सचिव एस. कृष्णन ने मंगलवार, 4 अगस्त को इस बैठक की संभावना की पुष्टि की।
बैठक की पृष्ठभूमि
यह बैठक ऐसे समय में प्रस्तावित है जब मेटा पिछले कुछ हफ्तों से सरकार की जाँच के दायरे में है। कुछ दिन पहले सरकार ने मेटा के ग्लोबल अफेयर्स प्रमुख जोएल कपलान को तलब कर कंपनी की नीतियों पर स्पष्टीकरण माँगा था। विवाद तब सामने आया जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक सोशल मीडिया पोस्ट — जिसमें उन्होंने परीक्षा प्रश्नपत्र लीक मामले पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों को संबोधित किया था — हटा दी गई थी। बाद में मेटा ने स्वीकार किया कि यह उसकी स्वचालित मॉडरेशन प्रणाली की तकनीकी त्रुटि थी और कंपनी ने इस पर खेद जताया।
CSAM पर सरकार की चिंता
बैठक के सबसे प्रमुख एजेंडा बिंदुओं में से एक मेटा के प्लेटफॉर्म पर बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM) से निपटने के लिए उठाए गए कदमों की समीक्षा होगी। एस. कृष्णन के अनुसार, यह मुद्दा पहले भी कंपनी के सामने उठाया जा चुका है और सरकार अब यह जानना चाहती है कि मेटा ने इस दिशा में क्या ठोस प्रगति की है। सरकार यह भी जाँचना चाहती है कि मौजूदा उपाय कितने प्रभावी हैं और आपत्तिजनक सामग्री के प्रसार को रोकने में कहाँ कमी रह रही है।
व्हाट्सएप यूजरनेम फीचर पर आपत्ति
सरकार व्हाट्सएप के प्रस्तावित यूजरनेम फीचर को लेकर भी अपनी आपत्तियाँ दोहराने की स्थिति में है। MeitY पहले ही व्हाट्सएप को निर्देश दे चुका है कि जब तक पहचान की चोरी, ऑनलाइन धोखाधड़ी और साइबर अपराध से जुड़े जोखिमों का संतोषजनक समाधान नहीं हो जाता, तब तक इस फीचर को लागू न किया जाए। सरकार का मानना है कि उचित सुरक्षा उपायों के अभाव में यह फीचर फर्जी अकाउंट बनाकर ठगी करने वालों के लिए नया माध्यम बन सकता है।
कंटेंट मॉडरेशन नीति पर सवाल
बैठक में मेटा की कंटेंट मॉडरेशन नीति — विशेष रूप से वेरिफाइड और हाई-प्रोफाइल अकाउंट्स से जुड़े पोस्ट हटाने की प्रक्रिया — पर भी चर्चा अपेक्षित है। सरकार का कहना है कि किसी वेरिफाइड यूजर का कंटेंट हटाने से पहले पर्याप्त जाँच और सुरक्षा व्यवस्था होनी चाहिए। अधिकारियों के अनुसार, मेटा से उसकी आंतरिक प्रक्रियाओं, मौजूदा व्यवस्था की कमियों और कंपनी के सामने आने वाली चुनौतियों के बारे में भी जवाब माँगा जा सकता है।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि यह बैठक उस व्यापक नियामकीय दबाव के संदर्भ में हो रही है जो भारत सरकार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बना रही है — जवाबदेही बढ़ाने, साइबर अपराधों पर नियंत्रण और ऑनलाइन सुरक्षा को मज़बूत करने के लिए। 5 अगस्त की प्रस्तावित बैठक मेटा और सरकार के बीच डिजिटल सुरक्षा तथा कंटेंट गवर्नेंस पर भविष्य की नीतिगत दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।