4 अगस्त 2026
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CSAM और WhatsApp यूजरनेम फीचर पर मेटा से जवाब माँगेगी सरकार, 5 अगस्त को अहम बैठक संभव

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CSAM और WhatsApp यूजरनेम फीचर पर मेटा से जवाब माँगेगी सरकार, 5 अगस्त को अहम बैठक संभव

सारांश

केंद्र सरकार 5 अगस्त को मेटा के अधिकारियों को तलब कर CSAM, व्हाट्सएप यूजरनेम फीचर और वेरिफाइड अकाउंट्स की मॉडरेशन नीति पर जवाब माँगेगी — यह बैठक PM मोदी की पोस्ट हटाए जाने के विवाद के बाद सरकार और मेटा के बीच बढ़ते तनाव की अगली कड़ी है।

मुख्य बातें

केंद्र सरकार 5 अगस्त 2026 को मेटा के शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक कर सकती है।
कृष्णन ने 4 अगस्त को बैठक की संभावना की पुष्टि की।
एजेंडे में CSAM से निपटने के उपाय, व्हाट्सएप यूजरनेम फीचर के जोखिम और वेरिफाइड अकाउंट्स की कंटेंट मॉडरेशन प्रक्रिया शामिल है।
सरकार पहले ही व्हाट्सएप को यूजरनेम फीचर तब तक न लागू करने को कह चुकी है जब तक साइबर अपराध और पहचान-चोरी के जोखिमों का समाधान न हो।
विवाद की शुरुआत PM मोदी की एक पोस्ट हटाए जाने से हुई, जिसे बाद में मेटा ने तकनीकी त्रुटि बताते हुए खेद जताया।

केंद्र सरकार 5 अगस्त 2026 को मेटा के शीर्ष अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक कर सकती है, जिसमें बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM), व्हाट्सएप के यूजरनेम फीचर और वेरिफाइड अकाउंट्स से जुड़ी कंटेंट मॉडरेशन प्रक्रिया पर स्पष्टीकरण माँगा जाएगा। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सचिव एस. कृष्णन ने मंगलवार, 4 अगस्त को इस बैठक की संभावना की पुष्टि की।

बैठक की पृष्ठभूमि

यह बैठक ऐसे समय में प्रस्तावित है जब मेटा पिछले कुछ हफ्तों से सरकार की जाँच के दायरे में है। कुछ दिन पहले सरकार ने मेटा के ग्लोबल अफेयर्स प्रमुख जोएल कपलान को तलब कर कंपनी की नीतियों पर स्पष्टीकरण माँगा था। विवाद तब सामने आया जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक सोशल मीडिया पोस्ट — जिसमें उन्होंने परीक्षा प्रश्नपत्र लीक मामले पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों को संबोधित किया था — हटा दी गई थी। बाद में मेटा ने स्वीकार किया कि यह उसकी स्वचालित मॉडरेशन प्रणाली की तकनीकी त्रुटि थी और कंपनी ने इस पर खेद जताया।

CSAM पर सरकार की चिंता

बैठक के सबसे प्रमुख एजेंडा बिंदुओं में से एक मेटा के प्लेटफॉर्म पर बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM) से निपटने के लिए उठाए गए कदमों की समीक्षा होगी। एस. कृष्णन के अनुसार, यह मुद्दा पहले भी कंपनी के सामने उठाया जा चुका है और सरकार अब यह जानना चाहती है कि मेटा ने इस दिशा में क्या ठोस प्रगति की है। सरकार यह भी जाँचना चाहती है कि मौजूदा उपाय कितने प्रभावी हैं और आपत्तिजनक सामग्री के प्रसार को रोकने में कहाँ कमी रह रही है।

व्हाट्सएप यूजरनेम फीचर पर आपत्ति

सरकार व्हाट्सएप के प्रस्तावित यूजरनेम फीचर को लेकर भी अपनी आपत्तियाँ दोहराने की स्थिति में है। MeitY पहले ही व्हाट्सएप को निर्देश दे चुका है कि जब तक पहचान की चोरी, ऑनलाइन धोखाधड़ी और साइबर अपराध से जुड़े जोखिमों का संतोषजनक समाधान नहीं हो जाता, तब तक इस फीचर को लागू न किया जाए। सरकार का मानना है कि उचित सुरक्षा उपायों के अभाव में यह फीचर फर्जी अकाउंट बनाकर ठगी करने वालों के लिए नया माध्यम बन सकता है।

कंटेंट मॉडरेशन नीति पर सवाल

बैठक में मेटा की कंटेंट मॉडरेशन नीति — विशेष रूप से वेरिफाइड और हाई-प्रोफाइल अकाउंट्स से जुड़े पोस्ट हटाने की प्रक्रिया — पर भी चर्चा अपेक्षित है। सरकार का कहना है कि किसी वेरिफाइड यूजर का कंटेंट हटाने से पहले पर्याप्त जाँच और सुरक्षा व्यवस्था होनी चाहिए। अधिकारियों के अनुसार, मेटा से उसकी आंतरिक प्रक्रियाओं, मौजूदा व्यवस्था की कमियों और कंपनी के सामने आने वाली चुनौतियों के बारे में भी जवाब माँगा जा सकता है।

आगे क्या होगा

गौरतलब है कि यह बैठक उस व्यापक नियामकीय दबाव के संदर्भ में हो रही है जो भारत सरकार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बना रही है — जवाबदेही बढ़ाने, साइबर अपराधों पर नियंत्रण और ऑनलाइन सुरक्षा को मज़बूत करने के लिए। 5 अगस्त की प्रस्तावित बैठक मेटा और सरकार के बीच डिजिटल सुरक्षा तथा कंटेंट गवर्नेंस पर भविष्य की नीतिगत दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी समस्या बनी हुई है — जो यह दर्शाता है कि संवाद के बावजूद अनुपालन का तंत्र कमज़ोर है। व्हाट्सएप यूजरनेम फीचर पर सरकार की आपत्ति तकनीकी रूप से उचित है, परंतु बिना स्पष्ट कानूनी ढाँचे के ये निर्देश बाध्यकारी नहीं बन सकते।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

5 अगस्त को सरकार और मेटा के बीच किन मुद्दों पर बैठक होगी?
बैठक में मुख्य रूप से तीन मुद्दे हैं — मेटा के प्लेटफॉर्म पर CSAM से निपटने के उपाय, व्हाट्सएप के प्रस्तावित यूजरनेम फीचर से जुड़े साइबर सुरक्षा जोखिम, और वेरिफाइड अकाउंट्स से कंटेंट हटाने की प्रक्रिया। MeitY सचिव एस. कृष्णन ने इस बैठक की संभावना की पुष्टि की है।
व्हाट्सएप यूजरनेम फीचर पर सरकार को क्या आपत्ति है?
सरकार का मानना है कि उचित सुरक्षा उपायों के बिना यह फीचर पहचान की चोरी, ऑनलाइन धोखाधड़ी और साइबर अपराध के लिए नया माध्यम बन सकता है। MeitY ने व्हाट्सएप को पहले ही इन जोखिमों का संतोषजनक समाधान होने तक फीचर न लागू करने का निर्देश दिया है।
मेटा और भारत सरकार के बीच ताज़ा विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
विवाद तब शुरू हुआ जब PM नरेंद्र मोदी की एक सोशल मीडिया पोस्ट — जिसमें उन्होंने परीक्षा प्रश्नपत्र लीक पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों को संबोधित किया था — हटा दी गई। मेटा ने बाद में इसे अपनी स्वचालित मॉडरेशन प्रणाली की तकनीकी त्रुटि बताया और खेद जताया।
CSAM के मुद्दे पर सरकार मेटा से क्या जानना चाहती है?
सरकार यह जानना चाहती है कि मेटा ने अपने प्लेटफॉर्म पर बाल यौन शोषण सामग्री के प्रसार को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए हैं और वे कितने प्रभावी हैं। एस. कृष्णन के अनुसार, यह मुद्दा पहले भी उठाया जा चुका है और अब कंपनी से प्रगति रिपोर्ट माँगी जाएगी।
इस बैठक का डिजिटल नीति पर क्या असर हो सकता है?
यह बैठक भारत में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही और कंटेंट गवर्नेंस पर नीतिगत दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है। सरकार साइबर अपराधों पर नियंत्रण और ऑनलाइन सुरक्षा को मज़बूत करने पर ज़ोर दे रही है, और मेटा के जवाब आगे की नियामकीय कार्रवाई की दिशा तय कर सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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