मायावती का विपक्ष पर तीखा प्रहार: दलितों को भटकाने की साजिश हो रही है — BSP प्रमुख
सारांश
मुख्य बातें
बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने 11 जुलाई 2026 को कहा कि कुछ राजनीतिक दल और उनके संरक्षण में काम करने वाले संगठन दलितों एवं बहुजन समाज को उग्र आंदोलनों तथा भावनात्मक नारों के ज़रिए गुमराह करने में जुटे हैं। लखनऊ से जारी अपने सोशल मीडिया बयान में उन्होंने बिना किसी दल का नाम लिए यह आरोप लगाया और समाज से ऐसे प्रयासों के प्रति सतर्क रहने की अपील की।
मायावती का मुख्य आरोप
मायावती ने कहा कि BSP चुनावी स्वार्थ के लिए सड़क जाम, धरना-प्रदर्शन, तोड़फोड़, हिंसा और भ्रामक प्रचार की राजनीति नहीं करती। उनके अनुसार, जो दल दलित हितों का नाम लेकर ऐसे आंदोलन खड़े करते हैं, वे वास्तव में केवल राजनीतिक स्वार्थ साध रहे हैं। उन्होंने इसे बहुजन समाज को बाँटने और भ्रमित करने की सोची-समझी रणनीति बताया।
उन्होंने यह भी चेताया कि बेरोज़गार युवा और वंचित वर्ग के लोग यदि ऐसे आंदोलनों में शामिल होते हैं, तो उन्हें मुकदमों, जेल और सरकारी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है — जिसका सबसे बड़ा नुकसान उनके भविष्य और परिवार को होता है।
BSP की शासन विरासत का दावा
मायावती ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में BSP की चार सरकारों के दौरान जनकल्याण, कानून-व्यवस्था और विकास के क्षेत्र में आदर्श शासन का उदाहरण पेश किया गया। उन्होंने कहा कि पार्टी ने हमेशा 'सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय' की नीति पर चलते हुए गरीबों, दलितों, पिछड़ों, आदिवासियों, अल्पसंख्यकों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के हितों को प्राथमिकता दी है।
सहारनपुर हिंसा और राज्यसभा इस्तीफे का संदर्भ
BSP प्रमुख ने सहारनपुर हिंसा प्रकरण का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय पार्टी ने सड़क से लेकर संसद तक दलितों की आवाज़ उठाई थी। उन्होंने याद दिलाया कि संसद में संतोषजनक सुनवाई न होने पर उन्होंने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफ़ा देकर विरोध दर्ज कराया था। उनके अनुसार, BSP का संघर्ष हमेशा संवैधानिक और लोकतांत्रिक दायरे में रहा है।
2027 चुनाव की पृष्ठभूमि में बयान
मायावती ने कहा कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी का जनाधार बढ़ता देख विरोधी दल बेचैन हैं। इसी कारण वे विभिन्न दलित संगठनों और राजनीतिक समूहों को आगे कर बहुजन समाज को विभाजित करने की कोशिश कर रहे हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में विपक्षी दल दलित मतदाताओं को साधने की कोशिश में जुटे हैं।
बाबा साहेब और कांशीराम की विरासत का आह्वान
मायावती ने कहा कि कांशीराम ने BSP की स्थापना बहुजन समाज को राजनीतिक शक्ति बनाकर सामाजिक न्याय का लक्ष्य हासिल करने के लिए की थी। उन्होंने डॉ. भीमराव आंबेडकर के 'सत्ता की मास्टर चाबी' के विचार का हवाला देते हुए कहा कि इस मिशन में बाधा डालने वाले तत्व बहुजन आंदोलन को कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं। आगे देखना होगा कि विपक्षी दल इस बयान पर किस तरह प्रतिक्रिया देते हैं और 2027 के चुनावी समीकरण किस दिशा में जाते हैं।