11 जुलाई 2026
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मायावती का विपक्ष पर तीखा प्रहार: दलितों को भटकाने की साजिश हो रही है — BSP प्रमुख

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मायावती का विपक्ष पर तीखा प्रहार: दलितों को भटकाने की साजिश हो रही है — BSP प्रमुख

सारांश

2027 विधानसभा चुनाव से पहले मायावती ने विपक्ष पर सीधा हमला बोला — आरोप लगाया कि दलितों को उग्र आंदोलनों और भावनात्मक नारों से भटकाया जा रहा है। BSP प्रमुख ने इसे बहुजन समाज को बाँटने की सोची-समझी रणनीति बताते हुए डॉ. आंबेडकर और कांशीराम की विरासत का आह्वान किया।

मुख्य बातें

मायावती ने 11 जुलाई 2026 को सोशल मीडिया पर बयान जारी कर विपक्षी दलों पर दलितों को गुमराह करने का आरोप लगाया।
BSP प्रमुख ने कहा कि पार्टी सड़क जाम, तोड़फोड़ और हिंसा की राजनीति नहीं करती; संवैधानिक दायरे में काम करती है।
2027 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले विरोधी दल बहुजन समाज को बाँटने की कोशिश कर रहे हैं — मायावती का दावा।
उन्होंने सहारनपुर हिंसा प्रकरण और राज्यसभा से इस्तीफ़े का हवाला देकर BSP के संघर्ष की याद दिलाई।
भीमराव आंबेडकर की 'सत्ता की मास्टर चाबी' और कांशीराम की विरासत को BSP का मूल मिशन बताया।

बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने 11 जुलाई 2026 को कहा कि कुछ राजनीतिक दल और उनके संरक्षण में काम करने वाले संगठन दलितों एवं बहुजन समाज को उग्र आंदोलनों तथा भावनात्मक नारों के ज़रिए गुमराह करने में जुटे हैं। लखनऊ से जारी अपने सोशल मीडिया बयान में उन्होंने बिना किसी दल का नाम लिए यह आरोप लगाया और समाज से ऐसे प्रयासों के प्रति सतर्क रहने की अपील की।

मायावती का मुख्य आरोप

मायावती ने कहा कि BSP चुनावी स्वार्थ के लिए सड़क जाम, धरना-प्रदर्शन, तोड़फोड़, हिंसा और भ्रामक प्रचार की राजनीति नहीं करती। उनके अनुसार, जो दल दलित हितों का नाम लेकर ऐसे आंदोलन खड़े करते हैं, वे वास्तव में केवल राजनीतिक स्वार्थ साध रहे हैं। उन्होंने इसे बहुजन समाज को बाँटने और भ्रमित करने की सोची-समझी रणनीति बताया।

उन्होंने यह भी चेताया कि बेरोज़गार युवा और वंचित वर्ग के लोग यदि ऐसे आंदोलनों में शामिल होते हैं, तो उन्हें मुकदमों, जेल और सरकारी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है — जिसका सबसे बड़ा नुकसान उनके भविष्य और परिवार को होता है।

BSP की शासन विरासत का दावा

मायावती ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में BSP की चार सरकारों के दौरान जनकल्याण, कानून-व्यवस्था और विकास के क्षेत्र में आदर्श शासन का उदाहरण पेश किया गया। उन्होंने कहा कि पार्टी ने हमेशा 'सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय' की नीति पर चलते हुए गरीबों, दलितों, पिछड़ों, आदिवासियों, अल्पसंख्यकों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के हितों को प्राथमिकता दी है।

सहारनपुर हिंसा और राज्यसभा इस्तीफे का संदर्भ

BSP प्रमुख ने सहारनपुर हिंसा प्रकरण का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय पार्टी ने सड़क से लेकर संसद तक दलितों की आवाज़ उठाई थी। उन्होंने याद दिलाया कि संसद में संतोषजनक सुनवाई न होने पर उन्होंने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफ़ा देकर विरोध दर्ज कराया था। उनके अनुसार, BSP का संघर्ष हमेशा संवैधानिक और लोकतांत्रिक दायरे में रहा है।

2027 चुनाव की पृष्ठभूमि में बयान

मायावती ने कहा कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी का जनाधार बढ़ता देख विरोधी दल बेचैन हैं। इसी कारण वे विभिन्न दलित संगठनों और राजनीतिक समूहों को आगे कर बहुजन समाज को विभाजित करने की कोशिश कर रहे हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में विपक्षी दल दलित मतदाताओं को साधने की कोशिश में जुटे हैं।

बाबा साहेब और कांशीराम की विरासत का आह्वान

मायावती ने कहा कि कांशीराम ने BSP की स्थापना बहुजन समाज को राजनीतिक शक्ति बनाकर सामाजिक न्याय का लक्ष्य हासिल करने के लिए की थी। उन्होंने डॉ. भीमराव आंबेडकर के 'सत्ता की मास्टर चाबी' के विचार का हवाला देते हुए कहा कि इस मिशन में बाधा डालने वाले तत्व बहुजन आंदोलन को कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं। आगे देखना होगा कि विपक्षी दल इस बयान पर किस तरह प्रतिक्रिया देते हैं और 2027 के चुनावी समीकरण किस दिशा में जाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसमें एक आंतरिक विरोधाभास है — BSP खुद पिछले दो लोकसभा और विधानसभा चुनावों में अपने पारंपरिक दलित मतदाता आधार का बड़ा हिस्सा गँवा चुकी है। विपक्ष को 'दलित विरोधी' बताने की रणनीति नई नहीं है, पर सवाल यह है कि क्या यह बयानबाज़ी ज़मीनी संगठन की कमी की भरपाई कर सकती है। डॉ. आंबेडकर और कांशीराम की विरासत का आह्वान भावनात्मक रूप से शक्तिशाली है, किंतु मतदाता अब BSP के शासनकाल के ठोस परिणामों की तुलना वर्तमान विकल्पों से करने लगे हैं — और यही तुलना 2027 की असली चुनौती है।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मायावती ने विपक्ष पर क्या आरोप लगाए हैं?
मायावती ने कहा कि कुछ राजनीतिक दल और उनके संरक्षण में काम करने वाले संगठन दलितों को उग्र आंदोलनों और भावनात्मक नारों के ज़रिए गुमराह कर रहे हैं। उनके अनुसार, ये दल दलित हितों के नाम पर केवल राजनीतिक स्वार्थ साध रहे हैं और 2027 चुनाव से पहले बहुजन समाज को बाँटने की कोशिश कर रहे हैं।
BSP की राजनीतिक रणनीति क्या है?
BSP संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के दायरे में रहकर 'सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय' की नीति पर काम करती है। मायावती के अनुसार, पार्टी सत्ता के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन और आर्थिक उत्थान का रास्ता अपनाती है, न कि सड़क जाम या तोड़फोड़ का।
मायावती ने सहारनपुर हिंसा का ज़िक्र क्यों किया?
मायावती ने सहारनपुर हिंसा प्रकरण का उल्लेख यह साबित करने के लिए किया कि BSP ने संकट के समय दलितों की आवाज़ उठाई थी। उन्होंने बताया कि संसद में संतोषजनक सुनवाई न होने पर उन्होंने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफ़ा देकर विरोध दर्ज कराया था।
2027 उत्तर प्रदेश चुनाव में BSP की क्या भूमिका होगी?
मायावती का दावा है कि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले BSP का जनाधार बढ़ रहा है, जिससे विरोधी दल बेचैन हैं। पार्टी डॉ. आंबेडकर और कांशीराम की विरासत को आधार बनाकर बहुजन समाज को एकजुट करने की रणनीति पर काम कर रही है।
मायावती के अनुसार बेरोज़गार युवाओं को किस बात से सावधान रहना चाहिए?
मायावती ने चेताया कि विपक्षी दलों द्वारा प्रायोजित आंदोलनों में शामिल होने पर बेरोज़गार युवाओं और वंचित वर्गों को मुकदमों, जेल और सरकारी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने इसे विरोधियों की सोची-समझी रणनीति बताया जिसका सबसे अधिक नुकसान युवाओं के भविष्य और परिवार को होता है।
राष्ट्र प्रेस
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