महिला आरक्षण पर मायावती का कांग्रेस और सपा पर तीखा हमला, सत्ता में रहते हुए नहीं दिखी गंभीरता

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महिला आरक्षण पर मायावती का कांग्रेस और सपा पर तीखा हमला, सत्ता में रहते हुए नहीं दिखी गंभीरता

सारांश

मायावती ने महिला आरक्षण पर कांग्रेस और सपा पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि इन पार्टियों ने सत्ता में रहते हुए वंचित समाज के अधिकारों के लिए गंभीरता नहीं दिखाई।

Key Takeaways

  • मायावती का सरकार पर हमला: कांग्रेस और सपा पर गंभीर आरोप
  • वंचित वर्गों के अधिकार: राजनीतिक दलों की अनदेखी
  • महिला आरक्षण की आवश्यकता: महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने का प्रयास
  • सपा का दोहरा चरित्र: सत्ता में रहते हुए भिन्न रवैया
  • आगे का रास्ता: समाज को आत्मनिर्भर बनाना आवश्यक

लखनऊ, 17 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस और सपा पर जोरदार हमला करते हुए आरोप लगाया है कि इन पार्टियों ने सत्ता में रहते हुए एससी, एसटी, ओबीसी और मुस्लिम समाज के अधिकारों को लागू करने में कोई गंभीरता नहीं दिखाई। अब ये पार्टियां राजनीतिक लाभ के लिए इन वर्गों की बात कर रही हैं।

उन्होंने चेतावनी दी कि इन वर्गों को ऐसे दोहरे चरित्र वाली पार्टियों से सावधान रहना चाहिए और अपने अधिकारों व आत्मनिर्भरता पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। मायावती ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर कांग्रेस पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि एससी, एसटी व ओबीसी के संवैधानिक अधिकारों के प्रति कांग्रेस का रवैया हमेशा ढुलमुल रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि महिला आरक्षण में इन वर्गों की भागीदारी की बात करने वाली कांग्रेस ने केंद्र की सत्ता में रहते हुए कभी भी इनका आरक्षण कोटा पूरा करने की गंभीरता नहीं दिखाई। मायावती ने कांग्रेस को एक अवसरवादी पार्टी करार दिया।

उन्होंने कहा कि ओबीसी समाज के लिए मंडल कमीशन की रिपोर्ट के अनुसार 27 प्रतिशत आरक्षण को लागू नहीं किया गया, जो बाद में बसपा के प्रयासों से पूर्व प्रधानमंत्री वी.पी. सिंह की सरकार में लागू हुआ। इसी प्रकार, यूपी में पिछड़े मुस्लिमों को ओबीसी का लाभ देने के लिए पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट को सपा ने ठंडे बस्ते में डाल दिया, जिसे बसपा ने 3 जून 1995 को तुरन्त लागू कर दिया।

बसपा मुखिया ने कहा कि सपा का रवैया तब बदलता है जब वह सरकार में नहीं होती, लेकिन जब सत्ता में होती है तो संकीर्ण जातिवादी दृष्टिकोण अपनाती है। अतः इन वर्गों को ऐसे छलावे और दोहरे चरित्र वाली पार्टियों से सावधान रहना होगा।

उन्होंने आगे कहा कि महिला आरक्षण के लिए पिछली (2011) जनगणना के आधार पर परिसीमन करने का मुद्दा महत्वपूर्ण है। यदि इसे जल्दी लागू करना है, तो उसी जनगणना के आधार पर इसे करना होगा। यदि वर्तमान में कांग्रेस पार्टी केंद्र की सत्ता में होती, तो यह भी भाजपा की तरह ही कदम उठाती।

मायावती ने निष्कर्ष निकाला कि देश में एससी, एसटी, ओबीसी और मुस्लिम समाज के वास्तविक हितों के लिए कोई पार्टी गंभीर नहीं रही है। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण के मामले में जो कुछ भी इन वर्गों को मिलेगा, उसे स्वीकार करना चाहिए और आगे के अच्छे समय में इनके हितों का सही ध्यान रखा जाएगा। इनको खुद को मजबूत बनाना होगा। यही उनकी सलाह है।

Point of View

क्योंकि यह दर्शाता है कि राजनीतिक दलों के बीच दावों और कार्यों में कितना अंतर हो सकता है। वंचित वर्गों के अधिकारों की बात करते समय, यह आवश्यक है कि राजनीतिक दल उनके लिए सच्चे और ईमानदार रहें।
NationPress
17/04/2026

Frequently Asked Questions

महिला आरक्षण क्या है?
महिला आरक्षण का अर्थ है कि राजनीतिक प्रतिनिधित्व में महिलाओं को एक निश्चित प्रतिशत आरक्षण प्रदान करना, ताकि उनकी भागीदारी बढ़ सके।
मायावती ने कांग्रेस पर क्या आरोप लगाया?
मायावती ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने सत्ता में रहते हुए वंचित वर्गों के अधिकारों को लागू करने में गंभीरता नहीं दिखाई।
महिला आरक्षण का लाभ किसे मिलेगा?
महिला आरक्षण का लाभ उन महिलाओं को मिलेगा जो राजनीतिक चुनावों में भाग लेंगी, विशेषकर वंचित वर्गों की महिलाओं को।
क्या सपा ने पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट लागू की थी?
नहीं, मायावती के अनुसार, सपा ने पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट को लागू नहीं किया था।
महिला आरक्षण कब से लागू होगा?
महिला आरक्षण का कार्यान्वयन जनगणना के आधार पर किया जाएगा, जिसके लिए अभी आदेश और प्रक्रिया की आवश्यकता है।
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