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दिल्ली पुलिस ने 24 घंटे में सुलझाई ₹37.5 लाख की 'खुद रची' लूट, तीन गिरफ्तार

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दिल्ली पुलिस ने 24 घंटे में सुलझाई ₹37.5 लाख की 'खुद रची' लूट, तीन गिरफ्तार

सारांश

दिल्ली पुलिस ने 24 घंटे के भीतर ₹37.5 लाख की उस लूट का पर्दाफाश किया जो असल में कंपनी के दो कर्मचारियों की खुद रची साजिश थी। सीसीटीवी, कॉल रिकॉर्ड और एक चतुर जाल की मदद से तीनों आरोपी गिरफ्तार हुए और ₹36.92 लाख बरामद हो गए।

मुख्य बातें

दिल्ली पुलिस ने ₹37.5 लाख की 'खुद रची' लूट को 24 घंटे के भीतर सुलझाया।
गिरफ्तार आरोपियों में अभिषेक (26) , योगेश (26) और विपिन (29) शामिल; बाकी आरोपियों की तलाश जारी।
पुलिस ने ₹36.92 लाख नकद , चार मोबाइल फोन और अपराध में इस्तेमाल मोटरसाइकिल बरामद की।
सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और बयानों में विसंगतियों ने साजिश का भंडाफोड़ किया।
वजीराबाद पुलिस स्टेशन और नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट स्पेशल स्टाफ की संयुक्त टीम ने ऑपरेशन को अंजाम दिया।

दिल्ली पुलिस ने 11 जुलाई 2026 को ₹37.5 लाख की एक 'खुद रची गई' लूट का 24 घंटे के भीतर पर्दाफाश कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिनमें पीड़ित कंपनी के दो कर्मचारी भी शामिल हैं। पुलिस ने इस कार्रवाई में ₹36.92 लाख नकद, चार मोबाइल फोन और अपराध में इस्तेमाल की गई मोटरसाइकिल बरामद की है।

मामले का पूरा घटनाक्रम

9 जुलाई को आउटर रिंग रोड पर बुराड़ी फ्लाईओवर के पास एक पीसीआर कॉल मिली, जिसमें बताया गया कि मोटरसाइकिल सवार तीन अज्ञात लोगों ने ₹37.5 लाख से भरा बैग छीन लिया। शिकायतकर्ता मोहन दास ने पुलिस को बताया कि उन्होंने, अभिषेक और योगेश ने चांदनी चौक से ₹45.5 लाख इकट्ठा किए थे, जो उनके मालिक के सरस्वती विहार स्थित घर पहुँचाने थे। मोहन दास और अभिषेक एक मोटरसाइकिल पर ₹37.5 लाख ले जा रहे थे, जबकि योगेश दूसरी मोटरसाइकिल पर ₹8 लाख लेकर चल रहा था।

जाँच में उजागर हुईं विसंगतियाँ

वजीराबाद पुलिस स्टेशन और नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट स्पेशल स्टाफ की संयुक्त टीम ने सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण किया, कॉल डिटेल रिकॉर्ड खंगाले और कंपनी के कर्मचारियों से पूछताछ की। जाँच में अभिषेक और योगेश के बयानों में गंभीर विसंगतियाँ सामने आईं। जिस मोबाइल फोन के बारे में कर्मचारियों ने दावा किया था कि लुटेरे उसे ले गए, वह उनकी मोटरसाइकिल के स्टोरेज कंपार्टमेंट से ही बरामद हुआ। इसके अलावा, योगेश के कंधे पर चोट का निशान भी असली नहीं लग रहा था, जिसने पुलिस की शंका को और पुख्ता किया।

साजिश का पर्दाफाश और गिरफ्तारी

लगातार पूछताछ के दौरान अभिषेक (26) और योगेश (26) ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि उन्होंने अपने करीबी साथी विपिन (29) के साथ मिलकर यह साजिश रची थी। विपिन पहले रोहिणी में एक कैफे चलाता था। तकनीकी जाँच से पुष्टि हुई कि जब चांदनी चौक से कैश इकट्ठा किया जा रहा था, तब विपिन वहीं मौजूद था। जाँचकर्ताओं ने विपिन को जाल में फँसाने के लिए उसे यह यकीन दिलाया कि उसके साथी पुलिस से बच निकले हैं और पैसों में हिस्सा माँग रहे हैं। इस झाँसे में आकर विपिन ने जहाँगीरपुरी में अपनी लोकेशन बता दी, जहाँ 10 जुलाई को उसे गिरफ्तार कर लिया गया। उसके घर की तलाशी में ₹36.92 लाख नकद बरामद हुए।

साजिश की पूरी कहानी

पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि अभिषेक और योगेश अपने मालिक के लिए नियमित रूप से बड़ी मात्रा में कैश ले जाते थे। इसी दौरान उन्होंने विपिन के साथ मिलकर लूट की योजना बनाई और चांदनी चौक से सरस्वती विहार के रूट की पूरी जानकारी जुटाई। तीनों ने लूट को अंजाम देने के लिए तीन और साथियों को शामिल किया। जब आम लोगों ने एक कथित लुटेरे को पकड़ लिया, तो अभिषेक और योगेश ने उसे पुलिस के हवाले करने के बजाय जानबूझकर भागने दिया और बाद में यह मनगढ़ंत कहानी गढ़ी कि भागते वक्त उसने योगेश को चोट पहुँचाई।

आगे की जाँच जारी

दिल्ली पुलिस के अनुसार, साजिश में शामिल शेष आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए जाँच जारी है। यह मामला इस बात की याद दिलाता है कि आंतरिक धोखाधड़ी को उजागर करने में तकनीकी साक्ष्य और त्वरित पुलिस कार्रवाई कितनी निर्णायक भूमिका निभाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि कार्यस्थल पर विश्वास के दुरुपयोग की एक परतदार कहानी है — जहाँ नियोक्ता का भरोसा ही हथियार बना। दिल्ली पुलिस की 24 घंटे की कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन असली सवाल यह है कि इतनी बड़ी नकद राशि बिना डिजिटल ट्रेल के क्यों ले जाई जा रही थी। बड़े कैश लेनदेन की यह अनौपचारिक व्यवस्था ही ऐसी साजिशों को जन्म देती है। जब तक व्यावसायिक नकद प्रबंधन में पारदर्शिता नहीं आती, ऐसी 'अंदरूनी लूट' की घटनाएँ दोहराती रहेंगी।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली में ₹37.5 लाख की 'खुद रची' लूट क्या थी?
यह एक विज्ञापन और अखबार प्रकाशन कंपनी के दो कर्मचारियों द्वारा रची गई साजिश थी, जिन्होंने चांदनी चौक से इकट्ठा किए गए ₹37.5 लाख को ले जाते समय लूट का नाटक किया। 9 जुलाई को बुराड़ी फ्लाईओवर के पास इस कथित लूट की सूचना दी गई थी।
पुलिस को साजिश का शक कैसे हुआ?
जाँच में अभिषेक और योगेश के बयानों में विसंगतियाँ मिलीं — जो मोबाइल फोन लुटेरे ले गए बताया गया वह मोटरसाइकिल के स्टोरेज से निकला, और योगेश की कंधे की चोट भी असली नहीं लग रही थी। सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल रिकॉर्ड ने इन संदेहों को पक्का किया।
तीसरे आरोपी विपिन को कैसे पकड़ा गया?
पुलिस ने विपिन को जाल में फँसाने के लिए उसे यह यकीन दिलाया कि उसके साथी पुलिस से बच निकले हैं और पैसों में हिस्सा माँग रहे हैं। इस झाँसे में आकर विपिन ने जहाँगीरपुरी में अपनी लोकेशन बताई और 10 जुलाई को भागने की कोशिश में गिरफ्तार हो गया।
इस मामले में कितनी रकम बरामद हुई?
पुलिस ने विपिन के घर से ₹36.92 लाख नकद बरामद किए, साथ ही चार मोबाइल फोन और अपराध में इस्तेमाल मोटरसाइकिल भी जब्त की। लूटी गई कुल ₹37.5 लाख में से लगभग पूरी रकम वापस मिल गई है।
क्या इस मामले में और आरोपी हैं?
हाँ, पुलिस के अनुसार तीनों मुख्य आरोपियों ने लूट को अंजाम देने के लिए तीन और साथियों को शामिल किया था। उनकी पहचान और गिरफ्तारी के लिए जाँच जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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