11 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

इमरान मसूद का भाजपा पर वार: 92,000 स्कूल बंद, शिक्षा हो देश की पहली प्राथमिकता

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
इमरान मसूद का भाजपा पर वार: 92,000 स्कूल बंद, शिक्षा हो देश की पहली प्राथमिकता

सारांश

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने भाजपा की धर्म-केंद्रित राजनीति पर सवाल उठाते हुए नीति आयोग रिपोर्ट का हवाला दिया — देश में 92,000 स्कूल बंद हैं, फिर भी सरकार की प्राथमिकता शिक्षा नहीं। अंबेडकर के विचारों की दुहाई देते हुए उन्होंने मुफ्त शिक्षा और स्वास्थ्य की माँग की।

मुख्य बातें

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने 11 जुलाई 2025 को भाजपा पर निशाना साधते हुए शिक्षा को देश की सर्वोच्च प्राथमिकता बताया।
मसूद ने दावा किया कि देशभर में करीब 92,000 स्कूल बंद हो चुके हैं — इसका संदर्भ नीति आयोग की रिपोर्ट से दिया।
BJP सांसद निशिकांत दुबे के 2004-2014 की कांग्रेस सरकार पर लगाए आरोपों को मसूद ने खारिज किया।
असम के बहुविवाह-विरोधी कल्याण प्रस्ताव पर कहा — स्थायी समाधान शिक्षा है, न कि प्रतिबंध।
भीमराव अंबेडकर के विचारों का हवाला देते हुए शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएँ पूरी तरह निःशुल्क करने की माँग की।
मध्य प्रदेश के दतिया उपचुनाव में नरोत्तम मिश्रा को टिकट न मिलने पर कहा — 'जैसी करनी, वैसी भरनी।'

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने 11 जुलाई 2025 को नई दिल्ली में केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (BJP) की नीतियों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि देश की सबसे बड़ी प्राथमिकता धर्म नहीं, बल्कि शिक्षा होनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि देशभर में करीब 92,000 स्कूल बंद हो चुके हैं, जो एक अत्यंत गंभीर स्थिति है। मसूद की यह प्रतिक्रिया BJP सांसद निशिकांत दुबे के उस बयान के जवाब में आई, जिसमें दुबे ने आरोप लगाया था कि 2004 से 2014 के बीच सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति के लिए देश को कमज़ोर किया।

निशिकांत दुबे के बयान पर पलटवार

मसूद ने कहा कि BJP सांसद निशिकांत दुबे को ऐसी बयानबाज़ी करने के बजाय नीति आयोग की रिपोर्ट पढ़नी चाहिए, जिसमें देश में बड़ी संख्या में स्कूल बंद होने पर गहरी चिंता जताई गई है। उनके अनुसार, सरकार को समाज को विभाजित करने वाले बयानों की बजाय शिक्षा से जुड़े ज़मीनी मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि 'छात्र किसी धर्म के नहीं होते — शिक्षा सबके लिए समान रूप से ज़रूरी है।'

असम के बहुविवाह प्रस्ताव पर मसूद की राय

असम सरकार के उस बजट प्रस्ताव पर भी मसूद ने अपनी राय रखी, जिसमें एक से अधिक विवाह करने वाले लोगों को राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं से वंचित करने की बात कही गई है। उन्होंने कहा कि ऐसी सामाजिक कुरीतियों का स्थायी समाधान कानूनी प्रतिबंध नहीं, बल्कि शिक्षा है। उनका तर्क था कि यदि बच्चों को अच्छी शिक्षा मिले, तो समाज में इस प्रकार की बुराइयाँ स्वतः कम होने लगेंगी।

अंबेडकर के विचारों का संदर्भ

मसूद ने डॉ. भीमराव अंबेडकर के शिक्षा-संबंधी दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा ही सामाजिक परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने माँग की कि सरकार प्राथमिक विद्यालयों को मज़बूत करने को प्राथमिकता दे और देश में शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाएँ पूरी तरह निःशुल्क की जाएँ, ताकि हर नागरिक को समान अवसर मिल सके।

वंदे मातरम गाइडलाइन और भाजपा की आंतरिक उठापटक

केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा पाँच महीने में दूसरी बार राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' को लेकर जारी की गई गाइडलाइन पर टिप्पणी करते हुए मसूद ने कहा कि पहले लोगों को शिक्षित करना ज़रूरी है। मध्य प्रदेश के दतिया उपचुनाव में पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा को BJP का टिकट न मिलने के विरोध में पार्टी कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा — 'जैसी करनी, वैसी भरनी।' उन्होंने आरोप लगाया कि यदि किसी विधायक की सदस्यता जबरन रद्द कराई जाती है, तो उसके राजनीतिक परिणाम भी भुगतने पड़ते हैं।

आगे क्या

यह बयान ऐसे समय में आया है जब संसद के मानसून सत्र की तैयारियाँ चल रही हैं और शिक्षा बजट आवंटन को लेकर विपक्ष सरकार पर दबाव बना रहा है। गौरतलब है कि नीति आयोग की रिपोर्ट में स्कूल बंद होने के आँकड़े सामने आने के बाद यह मुद्दा राष्ट्रीय बहस का केंद्र बनता जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 स्कूलों के बंद होने का आँकड़ा, यदि नीति आयोग की रिपोर्ट से सत्यापित है, तो यह वाकई गंभीर प्रश्न खड़ा करता है। लेकिन विडंबना यह है कि स्वयं कांग्रेस के शासनकाल में भी प्राथमिक शिक्षा के बुनियादी ढाँचे को लेकर सवाल उठते रहे हैं। मुफ्त शिक्षा और स्वास्थ्य की माँग राजनीतिक रूप से आकर्षक है, लेकिन इसके वित्तपोषण का कोई ठोस खाका पेश किए बिना यह नारे से आगे नहीं जाती। असली जवाबदेही तब बनेगी जब विपक्ष बंद स्कूलों को फिर से खोलने का एक क्रियान्वयन-योग्य रोडमैप सामने रखे।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इमरान मसूद ने भाजपा पर क्या आरोप लगाए?
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि भाजपा सरकार शिक्षा जैसे बुनियादी मुद्दों की अनदेखी कर समाज को विभाजित करने वाले बयानों पर ध्यान दे रही है। उन्होंने नीति आयोग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि देश में करीब 92,000 स्कूल बंद हो चुके हैं।
निशिकांत दुबे ने क्या बयान दिया था जिस पर मसूद ने प्रतिक्रिया दी?
BJP सांसद निशिकांत दुबे ने आरोप लगाया था कि 2004 से 2014 के बीच सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति के लिए देश को कमज़ोर किया। इमरान मसूद ने इस बयान को खारिज करते हुए कहा कि दुबे को ऐसी बयानबाज़ी के बजाय नीति आयोग की रिपोर्ट पढ़नी चाहिए।
असम के बहुविवाह प्रस्ताव पर मसूद का क्या रुख है?
मसूद ने कहा कि बहुविवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों का स्थायी समाधान कानूनी प्रतिबंध नहीं, बल्कि शिक्षा है। उनके अनुसार, यदि बच्चों को अच्छी शिक्षा मिले तो ऐसी बुराइयाँ स्वतः कम होने लगेंगी।
मसूद ने डॉ. अंबेडकर का ज़िक्र क्यों किया?
इमरान मसूद ने डॉ. भीमराव अंबेडकर के शिक्षा-संबंधी दृष्टिकोण का हवाला देते हुए कहा कि शिक्षा ही सामाजिक परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने सरकार से प्राथमिक विद्यालयों को मज़बूत करने और शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाएँ निःशुल्क करने की माँग की।
नरोत्तम मिश्रा और दतिया उपचुनाव पर मसूद ने क्या कहा?
मध्य प्रदेश के दतिया उपचुनाव में पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा को BJP का टिकट न मिलने पर पार्टी कार्यकर्ताओं के विरोध पर मसूद ने कहा — 'जैसी करनी, वैसी भरनी।' उन्होंने आरोप लगाया कि यदि किसी विधायक की सदस्यता जबरन रद्द कराई जाती है, तो उसके राजनीतिक परिणाम भी भुगतने पड़ते हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 4 महीने पहले
  4. 7 महीने पहले
  5. 8 महीने पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले