रोहित शर्मा की कप्तानी ने मुश्किल वक्त में ड्रेसिंग रूम को बचाया: अभिषेक नायर
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व सहायक कोच अभिषेक नायर ने पूर्व कप्तान रोहित शर्मा की नेतृत्व शैली की खुलकर तारीफ की है। नायर के अनुसार, रोहित की जिम्मेदारी स्वीकारने की आदत और खिलाड़ियों से ईमानदार संवाद ने टीम के सबसे कठिन क्षणों में ड्रेसिंग रूम को एकजुट रखा। यह बातें उन्होंने जियोस्टार पर राष्ट्रीय टीम के साथ अपने अनुभव साझा करते हुए कही।
मुंबई टेस्ट हार के बाद रोहित का रुख
नायर ने मुंबई टेस्ट की हार के बाद रोहित शर्मा के रवैये को याद करते हुए कहा, 'हमारे पास कप्तान के तौर पर रोहित शर्मा थे। मुझे याद है कि वह मुंबई टेस्ट के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में आए और कहा, कोई बात नहीं। हमने बहुत सी सीरीज जीती हैं, हम यह एक हार गए हैं। मैं इसकी जिम्मेदारी लूंगा।' नायर के मुताबिक, रोहित में हमेशा एक ऐसी बात थी जो माहौल को हल्का कर देती थी।
खिलाड़ियों की परवाह — रोहित की असली पहचान
पूर्व सहायक कोच ने बताया कि रोहित शर्मा हार के बाद सबसे पहले यह सोचते थे कि किस खिलाड़ी पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है। नायर ने कहा, 'वह सोचते थे कि सबसे ज्यादा असर किस पर पड़ा है, किसने रन नहीं बनाए हैं, और वह उन्हें कैसे बेहतर महसूस करा सकते हैं।' उन्होंने जोर देकर कहा कि रोहित ने कभी किसी एक खिलाड़ी पर इल्जाम नहीं लगाया — इसके बजाय वह खुद आलोचना झेलते थे।
सिडनी टेस्ट और संजू सैमसन का किस्सा
नायर ने दो अलग घटनाओं का उल्लेख किया जो रोहित के चरित्र को उजागर करती हैं। सिडनी टेस्ट में जब रोहित खुद नहीं खेल रहे थे, तब भी वह आए, इंटरव्यू दिया और बिना किसी बात को बढ़ा-चढ़ाकर बताए अपनी राय रखी। इसी तरह, बारबाडोस में टी20 विश्व कप फाइनल से पहले रोहित ने टॉस से पहले संजू सैमसन से बात की — भले ही संजू उस मैच में नहीं खेल रहे थे — क्योंकि उन्हें चिंता थी कि संजू कैसा महसूस कर रहे हैं।
युवा खिलाड़ियों पर रोहित का स्थायी असर
नायर ने कहा कि रोहित की कप्तानी का असर तकनीकी फैसलों से कहीं आगे था। उन्होंने कहा, 'आज भी किसी भी युवा क्रिकेटर से पूछिए, और वे रोहित शर्मा की कप्तानी के बारे में बहुत प्यार से बात करेंगे। वे आपको बताएंगे कि जब उन्होंने उन्हें डांटा भी, तो उन्होंने इसे गंभीरता से लिया क्योंकि वे जानते थे कि यह भरोसे और सच्ची देखभाल से आया था।' रोहित शर्मा के इस नेतृत्व-दर्शन की छाप आने वाली पीढ़ियों पर भी पड़ती रहेगी।