11 जुलाई 2026
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बांग्लादेश में छह महीनों में 360 छात्रों की सड़क हादसों में मौत, जात्री कल्याण समिति ने उठाई जागरूकता अभियान की मांग

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बांग्लादेश में छह महीनों में 360 छात्रों की सड़क हादसों में मौत, जात्री कल्याण समिति ने उठाई जागरूकता अभियान की मांग

सारांश

बांग्लादेश में सिर्फ छह महीनों में 360 छात्रों की सड़क हादसों में मौत — यह आँकड़ा किसी एक घटना की नहीं, बल्कि एक व्यवस्थागत विफलता की कहानी है। 2011 की मीरसराय त्रासदी के 15 साल बाद भी सरकारी जागरूकता अभियान नदारद हैं।

मुख्य बातें

बांग्लादेश में जनवरी–जून 2025 के दौरान सड़क दुर्घटनाओं में 360 छात्रों की मौत और 109 घायल — जात्री कल्याण समिति के आँकड़े।
मार्च सबसे घातक महीना: 59 हादसों में 67 छात्रों की मौत; मई में सर्वाधिक 61 दुर्घटनाएँ और 73 मौतें ।
समिति के महासचिव मोजम्मेल हक चौधरी ने 11 जुलाई 2011 की मीरसराय त्रासदी — बांग्लादेश का सबसे भीषण एकल सड़क हादसा ( 45 मौतें ) — की 15वीं बरसी पर यह बयान जारी किया।
समिति ने पाठ्यपुस्तकों में सड़क सुरक्षा विषय, मासिक जागरूकता सत्र, ज़ेब्रा क्रॉसिंग, रोड सेफ्टी गार्ड और स्कूल-स्तरीय सुरक्षा समितियों की माँग की।
आलोचकों का कहना है कि 2018 के छात्र आंदोलन के बाद भी सरकारी क्रियान्वयन अपर्याप्त रहा।

बांग्लादेश में जनवरी से जून 2025 के बीच सड़क दुर्घटनाओं में 360 छात्रों की जान चली गई, जबकि 109 अन्य घायल हुए। यह चौंकाने वाला आँकड़ा बांग्लादेश पैसेंजर्स वेलफेयर एसोसिएशन (जात्री कल्याण समिति) ने 11 जुलाई को जारी एक आधिकारिक बयान में सामने रखा। समिति ने यह बयान 2011 की मीरसराय त्रासदी की 15वीं बरसी के अवसर पर जारी किया।

मासिक आँकड़े: मार्च और मई सबसे घातक

समिति के आँकड़ों के अनुसार, जनवरी में 57 दुर्घटनाओं में 57 छात्रों की मौत हुई और 22 घायल हुए। फरवरी में 39 हादसों में 47 छात्रों ने जान गंवाई, जबकि 11 घायल हुए।

मार्च सबसे घातक महीना रहा — 59 दुर्घटनाओं में 67 छात्रों की मौत हुई और 1 घायल हुआ। अप्रैल में 51 हादसों में 56 छात्रों की जान गई और 25 घायल हुए। मई में सर्वाधिक 61 दुर्घटनाएँ दर्ज हुईं, जिनमें 73 छात्रों की मौत और 23 घायल हुए। जून में 53 हादसों में 60 छात्रों की मौत हुई तथा 27 अन्य घायल हुए।

मीरसराय त्रासदी की याद और सरकार पर आरोप

जात्री कल्याण समिति के महासचिव मोजम्मेल हक चौधरी ने 11 जुलाई 2011 की मीरसराय त्रासदी का स्मरण कराया। उस दिन चट्टोग्राम के मीरसराय उपजिला के विभिन्न स्कूलों के छात्रों को ले जा रहा एक मिनी ट्रक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे खाई में जा गिरा था, जिसमें 45 लोगों की मौत हुई थी। इसे आज भी बांग्लादेश के इतिहास का सबसे भीषण एकल सड़क हादसा माना जाता है।

चौधरी ने आरोप लगाया कि इस भीषण हादसे के बाद भी सरकार ने छात्रों की सड़क सुरक्षा को लेकर कोई प्रभावी जागरूकता अभियान नहीं चलाया। उन्होंने कहा, "छात्रों के बीच सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाकर सुरक्षित सड़कें और अधिक अनुशासित समाज का निर्माण किया जा सकता है।"

उन्होंने यह भी कहा, "मीरसराय जैसी त्रासदी दोबारा न हो — इसके लिए छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों को शामिल कर नियमित सड़क सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम नहीं चलाए जा रहे हैं। इसके कारण हर साल बड़ी संख्या में छात्र सड़क हादसों का शिकार हो रहे हैं — कई घायल होते हैं और कुछ हमेशा के लिए दिव्यांग हो जाते हैं।"

जात्री कल्याण समिति की पाँच प्रमुख सिफारिशें

भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए समिति ने सरकार के सामने पाँच ठोस सुझाव रखे हैं:

पहली सिफारिश के तहत स्कूलों की पाठ्यपुस्तकों में सड़क सुरक्षा से संबंधित विषयवस्तु शामिल करने की माँग की गई है। दूसरी सिफारिश में प्रत्येक माह कम-से-कम एक घंटे का सड़क सुरक्षा जागरूकता सत्र आयोजित करने और उसमें विशेषज्ञों को बुलाने की बात कही गई है।

तीसरी सिफारिश में राष्ट्रीय और क्षेत्रीय राजमार्गों पर — विशेष रूप से स्कूलों के निकट — सभी पैदल पार-स्थलों पर ज़ेब्रा क्रॉसिंग बनाने और स्कूल ज़ोन संकेतक बोर्ड लगाने की माँग है। चौथी सिफारिश में स्कूलों के पास राजमार्गों पर लाल झंडे और परावर्तक जैकेट पहने 'रोड सेफ्टी गार्ड' तैनात करने की बात है, ताकि वे यातायात रोककर छात्रों को सुरक्षित सड़क पार करा सकें। पाँचवीं सिफारिश में प्रत्येक शैक्षणिक संस्थान में छात्रों और शिक्षकों की भागीदारी से सड़क सुरक्षा समिति गठित करने की माँग की गई है।

आगे क्या

यह ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश में सड़क सुरक्षा को लेकर नागरिक समाज का दबाव बढ़ता जा रहा है। गौरतलब है कि 2018 में भी छात्रों ने ढाका में बड़े पैमाने पर सड़क सुरक्षा आंदोलन चलाया था, जिसके बाद कुछ नीतिगत बदलावों की घोषणा हुई थी — लेकिन ज़मीनी क्रियान्वयन सीमित रहा। जात्री कल्याण समिति की सिफारिशें सरकार के लिए एक स्पष्ट कार्यसूची प्रस्तुत करती हैं, और यह देखना होगा कि अधिकारी इस पर कितनी तेज़ी से कदम उठाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि नीतिगत जड़ता का प्रमाण है। 2011 की मीरसराय आपदा के बाद से जात्री कल्याण समिति जैसे संगठन बार-बार वही माँगें दोहरा रहे हैं, जो सरकारी फाइलों में दब जाती हैं। 2018 के छात्र आंदोलन ने अस्थायी हलचल पैदा की, लेकिन ज़ेब्रा क्रॉसिंग से लेकर स्कूल सुरक्षा समितियों तक — बुनियादी उपाय आज भी अधूरे हैं। सवाल यह नहीं है कि समाधान क्या हो, सवाल यह है कि राजनीतिक इच्छाशक्ति कब जागेगी।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बांग्लादेश में 2025 के पहले छह महीनों में कितने छात्र सड़क हादसों में मारे गए?
जात्री कल्याण समिति के आँकड़ों के अनुसार, जनवरी से जून 2025 के बीच बांग्लादेश में सड़क दुर्घटनाओं में 360 छात्रों की मौत हुई और 109 घायल हुए। मार्च और मई सबसे घातक महीने रहे।
मीरसराय सड़क हादसा क्या था और इसका इस रिपोर्ट से क्या संबंध है?
11 जुलाई 2011 को चट्टोग्राम के मीरसराय उपजिला में स्कूली छात्रों से भरा एक मिनी ट्रक खाई में गिर गया था, जिसमें 45 लोगों की मौत हुई थी — यह बांग्लादेश का सबसे भीषण एकल सड़क हादसा माना जाता है। जात्री कल्याण समिति ने इसी की 15वीं बरसी पर 2025 के आँकड़े जारी किए, यह रेखांकित करने के लिए कि उस त्रासदी के बाद भी हालात नहीं बदले।
जात्री कल्याण समिति ने सरकार से क्या माँगें रखी हैं?
समिति ने पाँच सिफारिशें दी हैं: पाठ्यपुस्तकों में सड़क सुरक्षा विषय शामिल करना, मासिक जागरूकता सत्र आयोजित करना, स्कूलों के पास ज़ेब्रा क्रॉसिंग और संकेतक बोर्ड लगाना, रोड सेफ्टी गार्ड तैनात करना और हर स्कूल में सड़क सुरक्षा समिति बनाना।
बांग्लादेश में छात्र सड़क सुरक्षा को लेकर पहले भी आंदोलन हुए हैं?
हाँ, 2018 में ढाका में छात्रों ने बड़े पैमाने पर सड़क सुरक्षा आंदोलन चलाया था, जिसके बाद सरकार ने कुछ नीतिगत बदलावों की घोषणा की थी। हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि ज़मीनी क्रियान्वयन अब तक अपर्याप्त रहा है।
इन हादसों में सबसे अधिक मौतें किस महीने हुईं?
जात्री कल्याण समिति के आँकड़ों के अनुसार, मार्च 2025 में 59 दुर्घटनाओं में 67 छात्रों की मौत हुई, जो मृत्यु संख्या के लिहाज़ से सबसे घातक महीना रहा। दुर्घटनाओं की संख्या के मामले में मई सबसे ऊपर रहा, जब 61 हादसों में 73 छात्रों ने जान गंवाई।
राष्ट्र प्रेस
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