11 जुलाई 2026
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चमोली में दीवार गिरने से डॉ. नवीन चंद्र डिमरी की मौत, नारायणबगड़ सरकारी अस्पताल में हादसा

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चमोली में दीवार गिरने से डॉ. नवीन चंद्र डिमरी की मौत, नारायणबगड़ सरकारी अस्पताल में हादसा

सारांश

चमोली के नारायणबगड़ सरकारी अस्पताल में मरम्मत कार्य का निरीक्षण कर रहे चिकित्सा प्रभारी डॉ. नवीन चंद्र डिमरी की मौत ने सरकारी स्वास्थ्य ढाँचे की जर्जर हालत उजागर कर दी — 25 जून की बारिश से क्षतिग्रस्त दीवार को सुरक्षित किए बिना काम शुरू करना इस त्रासदी की जड़ बना।

मुख्य बातें

चिकित्सा प्रभारी डॉ.
नवीन चंद्र डिमरी की 11 जुलाई को नारायणबगड़ सरकारी अस्पताल में क्षतिग्रस्त दीवार गिरने से मौत हो गई।
25 जून की भारी बारिश में आए मलबे ने अस्पताल की बाउंड्रीवाल को कमज़ोर कर दिया था, जो मरम्मत के दौरान ढह गई।
डिमरी को उप चिकित्सालय कर्णप्रयाग रेफर किया गया, जहाँ उन्हें मृत घोषित किया गया।
पिथौरागढ़ के मुनस्यारी में बिल्जू नदी उफान से मिलम मार्ग बंद, लगभग 80-90 परिवार संपर्क से कटे।
ग्रामीण जान जोखिम में डालकर उफनती नदी पार करने को मजबूर; स्वास्थ्य आपात स्थिति में मदद पहुँचना दुश्वार।

उत्तराखंड के चमोली जिले में शनिवार, 11 जुलाई को नारायणबगड़ स्थित सरकारी अस्पताल परिसर में मरम्मत कार्य के दौरान क्षतिग्रस्त बाउंड्रीवाल के अचानक ढह जाने से चिकित्सा प्रभारी डॉ. नवीन चंद्र डिमरी गंभीर रूप से घायल हो गए और बाद में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। उप चिकित्सालय कर्णप्रयाग में चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित किया। इस दर्दनाक घटना से स्थानीय निवासी और व्यापारी गहरे सदमे में हैं।

हादसे का घटनाक्रम

25 जून को हुई भारी बारिश के बाद बाढ़ के मलबे ने अस्पताल की बाउंड्रीवाल को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया था। शनिवार को उसी दीवार की मरम्मत का काम चल रहा था। डॉ. डिमरी मरम्मत कार्य का निरीक्षण करने के लिए मौके पर पहुँचे थे कि तभी पहले से खोखली हो चुकी दीवार अचानक भरभराकर उनके ऊपर गिर पड़ी और वे मलबे के नीचे दब गए।

बचाव और उपचार

हादसे की सूचना मिलते ही अस्पताल के स्वास्थ्यकर्मियों और स्थानीय व्यापारियों ने तत्काल बचाव अभियान चलाया और डॉ. डिमरी को मलबे से बाहर निकाला। प्राथमिक उपचार के लिए उन्हें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नारायणबगड़ ले जाया गया। चिकित्सकों के परामर्श पर उन्हें बेहतर इलाज के लिए उप चिकित्सालय कर्णप्रयाग रेफर किया गया, जहाँ उन्होंने दम तोड़ दिया।

उत्तराखंड में बारिश का कहर

यह हादसा ऐसे समय में हुआ है जब उत्तराखंड के कई जिले भारी मानसूनी बारिश की मार झेल रहे हैं। पिथौरागढ़ जिले के मुनस्यारी के मल्ला जोहार क्षेत्र में बिल्जू नदी उफान पर आने से मिलम जाने वाला मुख्य सड़क मार्ग बंद हो गया है। इससे क्षेत्र के लगभग 80 से 90 परिवारों का बाकी दुनिया से संपर्क कट गया है।

आम जनता पर असर

ग्रामीणों का कहना है कि पुल न होने के कारण राशन, दवाइयाँ और अन्य जरूरी सामान लाना-ले जाना बेहद मुश्किल हो गया है। जो लोग आवश्यक कार्यों के लिए बाहर निकलने को मजबूर हैं, उन्हें उफनती नदी को जान जोखिम में डालकर पार करना पड़ रहा है। किसी स्वास्थ्य आपात स्थिति में चिकित्सा सहायता तक पहुँचना भी बड़ी चुनौती बन गई है।

क्या होगा आगे

डॉ. डिमरी की असामयिक मृत्यु ने सरकारी स्वास्थ्य ढाँचे की जर्जर स्थिति और मानसून से पहले रखरखाव में हुई चूक पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों की माँग है कि प्रशासन क्षतिग्रस्त बुनियादी ढाँचे की तत्काल मरम्मत करे और कटे हुए क्षेत्रों में संपर्क बहाल करने के लिए ठोस कदम उठाए।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों के रखरखाव में बरती जाने वाली लापरवाही का नतीजा है — क्षतिग्रस्त दीवार की पहचान 25 जून को ही हो गई थी, फिर भी उसे सुरक्षित किए बिना मरम्मत शुरू कर दी गई। यह पहाड़ी राज्यों में मानसून-पूर्व ऑडिट की अनिवार्यता को रेखांकित करता है, जो अक्सर कागज़ों तक सिमटी रहती है। पिथौरागढ़ में 80-90 परिवारों का कटना दर्शाता है कि आपदा प्रबंधन अभी भी प्रतिक्रियात्मक है, न कि निवारक।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चमोली में अस्पताल की दीवार गिरने से कौन घायल हुए और क्या हुआ?
नारायणबगड़ सरकारी अस्पताल में मरम्मत कार्य का निरीक्षण कर रहे चिकित्सा प्रभारी डॉ. नवीन चंद्र डिमरी क्षतिग्रस्त बाउंड्रीवाल के ढहने से मलबे में दब गए। इलाज के दौरान उप चिकित्सालय कर्णप्रयाग में उनकी मौत हो गई।
नारायणबगड़ अस्पताल की दीवार क्षतिग्रस्त क्यों थी?
25 जून को हुई भारी बारिश के कारण बाढ़ का मलबा अस्पताल की बाउंड्रीवाल से टकराया था, जिससे वह कमज़ोर हो गई थी। शनिवार को उसी दीवार की मरम्मत के दौरान यह हादसा हुआ।
उत्तराखंड में मानसून से कौन-से क्षेत्र सबसे ज़्यादा प्रभावित हैं?
चमोली के अलावा पिथौरागढ़ जिले के मुनस्यारी का मल्ला जोहार क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित है, जहाँ बिल्जू नदी के उफान से मिलम मार्ग बंद हो गया है और करीब 80-90 परिवार संपर्क से कट गए हैं।
मिलम मार्ग बंद होने से ग्रामीणों को क्या परेशानियाँ हो रही हैं?
राशन, दवाइयाँ और ज़रूरी सामान लाना-ले जाना बंद हो गया है। ग्रामीणों को उफनती नदी जान जोखिम में डालकर पार करनी पड़ रही है, और किसी स्वास्थ्य आपात स्थिति में चिकित्सा सहायता मिलना भी मुश्किल हो गया है।
इस हादसे से सरकारी स्वास्थ्य ढाँचे पर क्या सवाल उठे हैं?
डॉ. डिमरी की मौत ने यह सवाल खड़ा किया है कि मानसून से पहले सरकारी अस्पतालों के भवनों की सुरक्षा जाँच क्यों नहीं की गई। क्षतिग्रस्त दीवार की पहचान हफ्तों पहले हो चुकी थी, फिर भी बिना पर्याप्त सुरक्षा उपायों के मरम्मत कार्य शुरू किया गया।
राष्ट्र प्रेस
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